नागौर में कड़ाके की सर्दी का असर:दूसरे दिन भी घना कोहरा, हाईवे पर रेंगते रहे वाहन; खेतों में पाले का डर
नागौर सहित ग्रामीण अंचल लगातार दूसरे दिन भी घने कोहरे और शीतलहर की चपेट में रहे। सुबह के समय विजिबिलिटी बेहद कम रही, जिससे हाईवे पर वाहन रेंगते नजर आए। वहीं, खेतों में ओस की बूंदें जमने से पाले की आशंका गहराने लगी है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। जिले के मेड़ता, रियां बड़ी और मुंडवा उपखंडों में सुबह देर तक सूरज के दर्शन नहीं हो सके। चारों ओर घने कोहरे की चादर छाई रही, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। मूंडवा में सर्दी का असर इस कदर देखने को मिला कि खेतों की मेड़ों पर लगी तारबंदी पर ओस की बूंदें जमी हुई नजर आईं। इस नजारे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पाला पड़ने से फसलों को नुकसान होने की आशंका बनी हुई है। मेड़ता (जारोड़ा) के जारोड़ा क्षेत्र में लगातार कोहरा छाया रहने से रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ा। सुबह के समय लोग घरों से निकलने से बचते नजर आए। रियां बड़ी में मौसम ने समय से पहले ही करवट ले ली। रात करीब दस बजे से ही कोहरे की चादर पूरे इलाके में फैल गई, जिससे देर रात तक दृश्यता बेहद कम रही। कहीं धूप, कहीं घना कोहरा पड़ोसी जिले डीडवाना-कुचामन में मौसम के दो अलग-अलग रूप देखने को मिले। जिला मुख्यालय पर जहां आसमान साफ रहा और दिन में धूप खिली, वहीं बर्फीली हवाओं ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया।इसके उलट, नावां उपखंड में घना कोहरा छाया रहा। मेगा हाईवे पर कोहरे की वजह से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर वाहन चलाने पड़े। जीरा-सरसों को नुकसान की आशंका कोहरे और शीतलहर की दोहरी मार से सबसे ज्यादा परेशानी राहगीरों और खुले में काम करने वाले मजदूरों को हो रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि तापमान में और गिरावट आई और ओस जमने का सिलसिला जारी रहा, तो रबी की फसलों, खासकर जीरा और सरसों को नुकसान पहुंच सकता है। फिलहाल लोग ठंड से बचने के लिए अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं।
राजस्थान के मध्यवर्ती इलाकों में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। नागौर जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचल आज लगातार दूसरे दिन भी घने कोहरे और हाड़ कपाने वाली शीतलहर की चपेट में रहे। आलम यह था कि दृश्यता (विजिबिलिटी) कम होने के कारण हाईवे पर वाहन रेंगते नजर आए, वहीं खेतों में ओस की बूंदें जमने से पाला पड़ने की आशंका गहरा गई है। उपखंडों में मौसम के कड़े तेवर जिले के मेड़ता, रियां बड़ी और मुंडवा उपखण्डों में सुबह देर तक सूरज के दर्शन नहीं हुए। मुंडवा: यहां सर्दी का सितम इस कदर था कि खेतों में मेड़ की तारबंदी पर ओस की बूंदें जमी हुई नज़र आईं, जिसे देख किसान फसलों की चिंता में नजर आए। मेड़ता (जारोड़ा): जारोड़ा क्षेत्र में लगातार कोहरा छाया रहने से दैनिक कामकाज प्रभावित रहा। रियां बड़ी: यहां मौसम ने समय से पहले करवट ली और रात दस बजे से ही कोहरे की चादर ने पूरे क्षेत्र को अपनी आगोश में ले लिया। डीडवाना-कुचामन: कहीं धूप तो कहीं धुंध पड़ोसी जिले डीडवाना-कुचामन में मौसम के दो अलग रूप देखने को मिले। जिला मुख्यालय पर हालांकि आसमान साफ रहा और धूप खिली, लेकिन बर्फीली हवाओं (शीतलहर) ने लोगों को देर तक घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया। इसके उलट, नावा उपखंड में भारी कोहरे के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहा। घने कोहरे की वजह से मेगा हाईवे पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर रेंगना पड़ा। खेती और आमजन पर प्रभाव कोहरे और शीतलहर की दोहरी मार से सबसे ज्यादा परेशानी राहगीरों और खुले में काम करने वाले मजदूरों को हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तापमान में और गिरावट आती है और ओस जमना जारी रहता है, तो रबी की फसलों, विशेषकर जीरा और सरसों को नुकसान पहुँच सकता है। फिलहाल, लोग ठंड से बचने के लिए अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं।