झालावाड़ कॉलेज में विश्व हिंदी दिवस पर संगोष्ठी आयोजित:वैश्विक स्तर पर हिंदी की बढ़ती प्रतिष्ठा और सांस्कृतिक विकास पर चर्चा
झालावाड़ के गवर्नमेंट पीजी कॉलेज में विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। हिंदी विभाग एवं हिंदी परिषद के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मौखिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, व्याख्यान और कविता पाठ शामिल थे। कार्यवाहक प्राचार्य प्रोफेसर अजय कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रोफेसर राजेश शर्मा ने भाषा के विकास को संस्कृति का विकास बताया। उन्होंने कहा कि अब तक आयोजित 12 विश्व हिंदी सम्मेलन वैश्विक स्तर पर हिंदी की बढ़ती प्रतिष्ठा का संकेत हैं। प्रोफेसर शर्मा ने भाषा और संस्कृति को अविस्मरणीय बताते हुए वर्तमान में भाषा की शुद्धता में आ रही कमी पर चिंता व्यक्त की और साहित्यिक शब्दों के प्रयोग पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि गीतकार रानी रावल रुद्रश्री ने स्वतंत्रता के बाद भी अंग्रेजी मानसिकता के प्रभाव को हिंदी के लिए हानिकारक बताया। उन्होंने कहा कि हमें मानसिक गुलामी से मुक्त होकर 'आजादी भाग 2' मनाना चाहिए। रावल ने अपनी रचनाएं "हिंदी बोलो भाई हिंदी हमारी पहचान...", "शिक्षा अगर संस्कार गिराये तो अनपढ़ ही अच्छे हैं..." और हाड़ौती रचना "म्हारा टाबर की महतारी..." सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के संयोजक और हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामकिशन माली ने प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसी क्रम में संस्कृत विभाग की प्रोफेसर डॉ. अशोक कंवर शेखावत और भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. हमीद अहमद ने भी हिंदी भाषा और उसकी प्रासंगिकता पर सारगर्भित व्याख्यान दिए। डॉ. शेखावत ने अपने व्याख्यान में हिन्दी एवं संस्कृत के अंतरसंबंधों पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत की भाषा परंपरा से हिंदी का गहरा संबंध बताया। प्रोफेसर हमीद अहमद ने हिंदी की सामंजस्यवादी प्रवृत्ति और सामासिकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिंदी का किसी भी अन्य भाषा से कोई विरोध या टकराव नहीं है। अंग्रेजी अपनी जगह उपयुक्त है, लेकिन हिंदी भी आज विश्व में अपना परचम लहरा रही है। स्नातक तृतीय सेमेस्टर के छात्रों वासुदेव और रवि वैष्णव ने भी संक्षिप्त व्याख्यान दिए। सभी वरिष्ठ संकाय सदस्य उपस्थित रहे। हिंदी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर सचिन जैन ने कार्यक्रम का संचालन किया।सभी संकाय सदस्य उपस्थित रहे।