अमेरिका: ज़ोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क के मेयर पद की ली शपथ
34 साल के ममदानी अपने चुनाव प्रचार के दौरान इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना कर चुके हैं.
अमेरिका: ज़ोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क के मेयर पद की ली शपथ

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इमेज कैप्शन, ज़ोहरान ममदानी अपनी पत्नी रमा दुवाजी के साथ
2 घंटे पहले
ज़ोहरान ममदानी ने एक जनवरी, 2026 को न्यूयॉर्क के मेयर पद की शपथ ले ली.
वह शहर के पहले मुस्लिम मेयर और बीते 100 साल में सबसे कम उम्र के मेयर बनकर इतिहास रच चुके हैं.
शहर के 111वें मेयर के तौर पर उनके शपथ ग्रहण समारोह में उनका परिवार मौजूद रहा. न्यूयॉर्क के स्थानीय समय के अनुसार, नए साल में आधी रात को उन्होंने शपथ ली.
एक जनवरी को आम लोगों को ब्रॉडवे पर एक स्ट्रीट पार्टी में शामिल होने के लिए बुलाया गया है, जो सिटी हॉल तक जाती है.
डेमोक्रेटिक पार्टी के कैंडिडेट के तौर पर ज़ोहरान ममदानी ने नवंबर महीने की शुरुआत में न्यूयॉर्क के मेयर का चुनाव जीता था.
34 साल के ममदानी 100 साल से भी अधिक समय में न्यूयॉर्क के सबसे युवा, पहले मुसलमान और दक्षिण एशियाई मूल के मेयर बने हैं.
मेयर पद के लिए मुख्य मुक़ाबला ज़ोहरान ममदानी और एंड्रयू कुओमो के बीच था. ममदानी से डेमोक्रेट प्राइमरी में हारने के बाद कुओमो इंडिपेंडेंट उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे थे.
वहीं, रिपब्लिकन पार्टी की ओर से कर्टिस स्लिवा उम्मीदवार थे.

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इमेज कैप्शन, ज़ोहरान ममदानी 100 साल से ज़्यादा लंबे समय के इतिहास में न्यूयॉर्क के पहले दक्षिण एशियाई मूल के मेयर बने हैं
न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य ममदानी ने साल की शुरुआत एक काफ़ी हद तक अनजान उम्मीदवार के तौर पर की थी लेकिन वह पोल में सबसे ऊपर पहुंच गए थे.
उनके चुनाव ने प्रोग्रेसिव लोगों के लिए एक बड़ा बदलाव लाया, जो शहर के राजनीतिक केंद्र में बदलाव का संकेत था.
ममदानी ने ख़ुद को लोगों के उम्मीदवार और एक ऑर्गेनाइज़र के तौर पर पेश किया.
मेयर का चुनाव जीतने के बाद ममदानी ने आधे घंटे लंबे भाषण में राष्ट्रपति ट्रंप पर निशाना साधा था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव से पहले ज़ोहरान ममदानी को वोट न करने की अपील की थी.
उन्होंने फ़्री बस सेवा, यूनिवर्सल चाइल्डकेयर और बढ़ती महंगाई काबू करने समेत अपने सभी चुनावी वादों को पूरा करने की बात कही.
ज़ोहरान ममदानी को जानिए

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इमेज कैप्शन, ममदानी के भारतीय मूल के पिता महमूद ममदानी केपटाउन विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर थे
ज़ोहरान क्वामे ममदानी का जन्म साल 1991 में युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था.
ममदानी के पिता ने उन्हें एक क्रांतिकारी और घाना के पहले प्रधानमंत्री क्वामे एन्क्रूमाह के नाम पर मिडिल नेम क्वामे दिया था.
ममदानी मशहूर भारतीय-अमेरिकी फ़िल्म निर्देशक मीरा नायर और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के जाने-माने प्रोफे़सर महमूद ममदानी के बेटे हैं.
कंपाला में उन्होंने अपने शुरुआती दिन बिताए और फिर पांच साल की उम्र में दक्षिण अफ़्रीका आ गए.
ममदानी के भारतीय मूल के पिता महमूद ममदानी केपटाउन विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर थे.
केपटाउन में ही 1848 में शुरू हुए दक्षिण अफ़्रीका के सबसे पुराने स्कूल सेंट जॉर्ज ग्रामर में उन्होंने शुरुआती पढ़ाई-लिखाई की.
सात साल की उम्र में वे न्यूयॉर्क आ गए. उन्होंने ब्रॉन्क्स हाई स्कूल ऑफ़ साइंस से पढ़ाई की.
साल 2014 में उन्होंने बोडन कॉलेज से 'बैचलर इन अफ़्रीकन स्टडीज़' में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.
कुछ साल बाद 2018 में, ममदानी एक अमेरिकी नागरिक बन गए.
ममदानी का राजनीतिक सफ़र

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इमेज कैप्शन, एक-दूसरे का खुलकर विरोध करने वाले ममदानी और राष्ट्रपति ट्रंप ने बीच नवंबर महीने में 'सरप्राइज़' मीटिंग भी हुई
ज़ोहरान ममदानी ने सक्रिय राजनीति में क़दम रखने से पहले एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम किया.
राजनीति में आने से पहले ज़ोहरान ममदानी क्वींस, न्यूयॉर्क में बतौर फॉरक्लोज़र काउंसलर (घर ज़ब्ती मामलों में सलाहकार) का काम करते थे. ममदानी कम आय वाले परिवारों की मदद करते थे जो आर्थिक तंगी के कारण अपने घर खोने की कगार पर थे.
इस काम के दौरान उन्होंने देखा कि जिन परिवारों की मदद वह कर रहे थे, उनकी दिक्क़तें केवल आर्थिक नहीं बल्कि नीतिगत भी थीं. इसी अनुभव ने उन्हें सक्रिय राजनीति की ओर प्रेरित किया ताकि वह नीतियां बदल सकें जो आम लोगों को प्रभावित करती हैं.
इसके बाद साल 2020 में उन्होंने पहला चुनाव लड़ा. उन्होंने न्यूयॉर्क असेंबली के 36वें डिस्ट्रिक्ट (एस्टोरिया, क्वींस) से डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा.
ज़ोहरान ममदानी पहली बार में ही जीत गए और न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली में पहले दक्षिण एशियाई और पहले सोशलिस्ट प्रतिनिधि बने.
अब डेमोक्रेट ममदानी ने न्यूयॉर्क मेयर प्राइमरी में पूर्व गवर्नर को पीछे छोड़कर सभी को चौंका दिया है.
राज्य के पूर्व गवर्नर 67 वर्षीय कुओमो, यौन उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में 2021 में पद से इस्तीफ़ा देने के बाद राजनीतिक वापसी का प्रयास कर रहे थे.
जीत के बाद ममदानी ने कहा था, "आज रात हमने इतिहास लिखा है. जैसा कि नेल्सन मंडेला ने कहा था- 'जब तक यह पूरा नहीं हो जाता, यह हमेशा असंभव लगता है.' मेरे दोस्तों, हमने इसे कर दिखाया. मैं डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के रूप में आपकी न्यूयॉर्क सिटी का मेयर बनूंगा."
मोदी और इसराइल की आलोचना

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इमेज कैप्शन, ज़ोहरान ममदानी अपने माता-पिता और पत्नी के साथ
ज़ोहरान ममदानी इसराइल से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक की खुलकर आलोचना कर चुके हैं.
मई, 2025 में एक कार्यक्रम में उनसे एक सवाल पूछा गया कि अगर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैडिसन स्क्वेयर गार्डन में रैली करते हैं और फिर न्यूयॉर्क के मेयर के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करना चाहते हैं, तो क्या वह उसमें शामिल होंगे?
ममदानी ने इसका जवाब नहीं में दिया था और गुजरात में दंगों के लिए उनकी तीखी आलोचना की थी.
ज़ोहरान ममदानी का फ़लस्तीन के समर्थन और इसराइल की आलोचना को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी के ज़्यादातर नेताओं से मतभेद रहा है.
एक अमेरिकी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने इसराइल के यहूदी देश के रूप में अस्तित्व का विरोध किया था.
उन्होंने कहा, "मैं किसी ऐसे देश का समर्थन नहीं कर सकता जहां नागरिकता धर्म या किसी और आधार पर बांटी जाती हो. हर देश में समानता होनी चाहिए, यही मेरा विश्वास है."
मुस्लिम पहचान पर हुए हमले

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प्राइमरी चुनाव जीतने के बाद ममदानी की मुस्लिम पहचान पर हमले बढ़े. उनपर खुलेआम नस्ली हमले हुए.
रिपब्लिकन सांसद एंडी ओगल्स ने तो जस्टिस डिपार्टमेंट को पत्र लिखकर ज़ोहरान ममदानी की नागरिकता रद्द कर वापस भेजने की मांग कर दी थी.
ममदानी धार्मिक पहचान से जुड़े हमलों का खुलकर जवाब देते रहे हैं. उन्हें कैंपेन के दौरान हिंसक हमले की भी धमकियां मिलती रहीं. कई बार तो ममदानी ने अपने कैंपेन में उन धमकियों की रिकॉर्डिंग भी सुनाई थी.
इससे जुड़े मुद्दों पर ज़ोहरान ममदानी ने एमएसएनबीसी से बातचीत में कहा था, "मेरे नाम और आस्था के आधार पर नियमित रूप से हमले हो रहे हैं. इससे जूझना बहुत मुश्किल है. मेरी जीत यह बताने का मौक़ा है कि एक मुसलमान होना किसी दूसरे धर्म के अनुयायी होने जैसा ही है.''
साउथ कैरलाइना से रिपब्लिकन रीप्रेजेंटेटिव नैंसी मैक ने ईद के मौक़े पर ज़ोहरान ममदानी के कुर्ते पायजामे वाली तस्वीर शेयर करते हुए 25 जून को लिखा था, ''9/11 के बाद हमने कहा था- हम कभी नहीं भूलेंगे. मुझे लगता है कि हम भूल गए. यह बहुत ही दुखद है.''
9/11 का हमला जब हुआ था तो ज़ोहरान ममदानी नौ साल के थे और मैनहटन में रह रहे थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.