बिना जरूरत बिजली का उपयोग एक गंभीर समस्या:बिजली निगम अधिकारी ने बिजली की बचत के उपाय
जयपुर विद्युत वितरण निगम (जेवीवीएनएल) झालावाड़ के कार्मिक अधिकारी डॉ. अभिनव शर्मा ने बिजली बचत को लेकर पहल की है। उन्होंनें आमजन को बिजली बचाने के कई प्रभावी तरीके बताए हैं। डॉ. शर्मा के अनुसार, बिजली की छीजत का अर्थ है कि ऐसी स्थिति में बिजली का उपयोग करना जब उसकी आवश्यकता न हो या जब कम बिजली से भी काम चलाया जा सकता हो। खाली कमरे में जलती लाइटें, स्टैंडबॉय मोड पर लगे उपकरण और खराब वायरिंग से होने वाला लीकेज इसके प्रमुख उदाहरण हैं। यह बर्बादी अक्सर हमारी आदतों का हिस्सा बन जाती है। बिजली बचाने का सबसे पहला और सरल उपाय है कि खाली कमरों में लाइट, पंखे, टीवी या एसी जैसे उपकरण बंद रखें। जब कोई व्यक्ति कमरे में न हो, तो इन उपकरणों को चालू रखने का कोई औचित्य नहीं है। इस छोटे से कदम से लाखों यूनिट बिजली बचाई जा सकती है। इसके अतिरिक्त, दिन के समय प्राकृतिक रोशनी का अधिकतम उपयोग करें। अक्सर घरों में दिन में भी लाइटें जली रहती हैं, जबकि बाहर पर्याप्त धूप होती है। खिड़कियां और रोशनदान खोलकर प्राकृतिक रोशनी का इस्तेमाल करना न केवल बिजली बचाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। LED बल्ब का करें उपयोग पुराने पीले बल्ब और ट्यूबलाइट की तुलना में LED बल्ब 70–80 प्रतिशत तक कम बिजली खर्च करते हैं। इनकी रोशनी भी अधिक होती है और आयु भी लंबी होती है। एक बार LED लगाने पर लंबे समय तक राहत मिलती है। 5-स्टार रेटिंग वाले उपकरण खरीदे फ्रिज, एसी, वॉशिंग मशीन जैसे उपकरण खरीदते समय केवल कीमत नहीं, बल्कि उनकी ऊर्जा-रेटिंग भी देखनी चाहिए। 5-स्टार रेटिंग वाले उपकरण कम बिजली में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। आज हर घर में मोबाइल, लैपटॉप, टीवी, सेट-टॉप बॉक्स जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होते हैं। इनमें से अधिकांश स्टैंडबाय मोड में भी बिजली खपत करते रहते हैं। मोबाइल चार्ज हो जाने के बाद चार्जर को प्लग से निकालना, टीवी देखने के बाद मेन स्विच बंद करना—ये छोटी आदतें हैं, लेकिन इनका सामूहिक प्रभाव बहुत बड़ा होता है। एसी और फ्रिज का समझदारी भरा उपयोग एसी का सही तापमान अक्सर लोग एसी को 18 या 20 डिग्री पर चलाते हैं, जबकि 24–26 डिग्री तापमान पर्याप्त होता है। हर 1 डिग्री कम करने पर बिजली खपत 5–6 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। खराब वायरिंग और अर्थिंग : छिपी हुई छीजत कई घरों में पुरानी वायरिंग होती है, इससे लीकेज करंट होता रहता है। यह लीकेज दिखाई नहीं देता, लेकिन मीटर में यूनिट बढ़ती रहती हैं। इसी तरह, खराब अर्थिंग भी न केवल बिजली की बर्बादी करती है, बल्कि दुर्घटना का कारण भी बन सकती है। समय-समय पर किसी योग्य इलेक्ट्रीशियन से वायरिंग और अर्थिंग की जांच कराना आवश्यक है। सोलर पैनल लगाए यह बेहतर साधन सोलर से न केवल बिजली बिल कम होता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलता है। छोटे स्तर पर सोलर लाइट, सोलर गार्डन लैंप या सोलर हीटर से भी शुरुआत की जा सकती है।