शहर को जल्द मिलेगी नई मेडिसिन विंग:दो यूनिट और खून जांच से शुरु होगी न्यू मेडिसिन विंग ; मुख्यमंत्री करेंगे उद्घाटन, तिथि फाइनल नहीं
प्रदेश की सबसे बड़ी मेडिसिन विंग इसी महीने शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल इसे जनता को समर्पित करेंगे। उनका दौरा 17-18 जनवरी को संभावित माना जा रहा है। इसके लिए भामाशह के प्रतिनिधियों को 13 को जयपुर बुलाया गया है। पीबीएम हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग की सात यूनिट है। विभाग के पास मेन बिल्डिंग में डी, ई,एफ,एच,आई,जे, के वार्ड, दो आईसीयू और एक कैजुअल्टी है। इन सभी को क्रमवार शिफ्ट किया जाएगा। प्रायोगिक तौर पर सबसे पहले विभाग के एचओडी प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा और सीनियर प्रोफेसर डॉ. वीर बहादुर की यूनिट शिफ्ट होगी। दोनों को के वार्ड मिला हुआ है। इनकी यूनिट में आने वाले मरीजों को इसी वार्ड भर्ती किया जाता है। इस वार्ड के मरीजों को जल्दी ही नई विंग में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। उसके 24 घंटे बाद एक-एक करके अन्य वार्डों के मरीजों को शिफ्ट किया जाएगा। मरीजों को शिफ्ट करने के लिए बाकायदा एंबुलेंस लगाई जाएगी। आईसीयू और कैजुअल्टी की शिफ्टिंग सबसे अंत में की जाएगी। मार्च तक विंग के सभी वार्ड शुरू हो जाएंगी। जांचें भी यहीं होंगी। मेन बिल्डिंग में विभाग के पास करीब 300 बेड हैं, जबकि मरीजों की संख्या मौसमी बीमारियों के दिनों में बढ़ जाती है। नई विंग के लिए मैन पावर के प्रस्ताव वित्त विभाग को भेज दिए गए हैं। नई मेडिसिन बिल्डिंग में ये सुविधाएं जनरल वार्ड 9, 3आईसीयू 20 बेड, 1 आइसोलेशन वार्ड 9 बेड, सिंगल बेड कॉटेज 39, डबल एंड थ्री बेड कॉटेज 14, 1 कैदी वार्ड 11 बेड, 1 आर्मी वार्ड 9 बेड, डॉक्टर्स चैंबर 8, पानी विद आरओ 16, 232 टॉयलेट, 91 बाथरूम, लेक्चरर थिएटर 150 चेयर, वेटिंग हॉल 600 चेयर, सीसीटीवी कैमरे 165, ऑक्सीजन प्लांट आदि। पीबीएम हॉस्पिटल से मेडिसिन विभाग के वार्ड खाली होने के बाद के, आई और जे वार्ड प्रसूति विभाग को दिए जाएंगे। के वार्ड में ऐसी महिलाओं को भर्ती किया जा सकेगा, जिनके पांच-दिन बाद डिलीवरी होने वाली है और उन्हें प्रॉब्लम ज्यादा है। वर्तमान में महिलाएं सेम डे ही डिलीवरी के लिए आ पाती हैं। उन्हें रोज दिखाने के लिए डॉक्टर के घरों पर जाना पड़ता है। वर्तमान में प्रसूति विभाग के पास एम 1, एम 2,एम 3, पी, क्यू, आर, एल वार्ड और लेबर रूम है। इनमें भी बेड कम पड़ रहे हैं। विभाग के पास आईसीयू तक नहीं है, जबकि सभी अस्पतालों में होता है। इसलिए उन्हें डी वार्ड आईसीयू देने पर विचार चल रहा है। हालांकि यह आईसीयू जनाना विंग के दूसरे किनारे पर है।