सिलारपुरी का पंचायत दर्जा छीनने पर आक्रोशित ग्रामीण:कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, कहा- 'रायपुर में विलय मंजूर नहीं, हमारी पंचायत हमारा हक'
झुंझुनूं जिले में पंचायत पुनर्गठन की प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है। जिले के सिलारपुरी गांव के ग्रामीणों ने अपनी ग्राम पंचायत का अस्तित्व समाप्त किए जाने के विरोध में जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सैकड़ों की संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके गांव की स्वतंत्र पहचान को बहाल नहीं किया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन की राह पकड़ेंगे। ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बंद कमरों में बैठकर पुनर्गठन का खाका तैयार किया है। सिलारपुरी, जो लंबे समय से एक स्वतंत्र और सशक्त ग्राम पंचायत के रूप में स्थापित है, उसे रातों-रात सूची से विलोपित कर रायपुर ग्राम पंचायत में मिला दिया गया। ग्रामीणों का तर्क है कि इस प्रक्रिया में न तो स्थानीय पंचायत की राय ली गई और न ही ग्रामीणों से कोई संवाद किया गया। ग्रामीणों में रोष ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि इस फैसले के दूरगामी दुष्परिणाम होंगे। अब ग्रामीणों को अपने मूलभूत कार्यों के लिए रायपुर पंचायत के चक्कर काटने होंगे, जिससे समय और धन की बर्बादी होगी। स्वतंत्र बजट और योजना चयन का अधिकार छिन जाने से सिलारपुरी के विकास की गति रुकने की आशंका है। सरकार ने अपने फैसले को वापस नहीं लिया और सिलारपुरी को पुनः स्वतंत्र पंचायत घोषित नहीं किया, तो आगामी चुनावों में पूरा गांव एकजुट होकर 'मतदान बहिष्कार' करेगा। ग्रामीणों ने कहा कि "लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है, और जब जनता की भावनाओं का ही गला घोंटा जा रहा हो, तो चुनाव का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
झुंझुनूं जिले में पंचायत पुनर्गठन की प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है। जिले के सिलारपुरी गांव के ग्रामीणों ने अपनी ग्राम पंचायत का अस्तित्व समाप्त किए जाने के विरोध में जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सैकड़ों की संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके गांव की स्वतंत्र पहचान को बहाल नहीं किया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन की राह पकड़ेंगे। ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बंद कमरों में बैठकर पुनर्गठन का खाका तैयार किया है। सिलारपुरी, जो लंबे समय से एक स्वतंत्र और सशक्त ग्राम पंचायत के रूप में स्थापित है, उसे रातों-रात सूची से विलोपित कर रायपुर ग्राम पंचायत में मिला दिया गया। ग्रामीणों का तर्क है कि इस प्रक्रिया में न तो स्थानीय पंचायत की राय ली गई और न ही ग्रामीणों से कोई संवाद किया गया। ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि इस फैसले के दूरगामी दुष्परिणाम होंगे। अब ग्रामीणों को अपने मूलभूत कार्यों के लिए रायपुर पंचायत के चक्कर काटने होंगे, जिससे समय और धन की बर्बादी होगी। स्वतंत्र बजट और योजना चयन का अधिकार छिन जाने से सिलारपुरी के विकास की गति रुकने की आशंका है। सरकार ने अपने फैसले को वापस नहीं लिया और सिलारपुरी को पुनः स्वतंत्र पंचायत घोषित नहीं किया, तो आगामी चुनावों में पूरा गांव एकजुट होकर 'मतदान बहिष्कार' करेगा। ग्रामीणों ने कहा कि "लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है, और जब जनता की भावनाओं का ही गला घोंटा जा रहा हो, तो चुनाव का कोई अर्थ नहीं रह जाता।