रास्ता खुलवाने की मांग को लेकर सचिवाल पर प्रदर्शन:इससे पहले भी कर चुके प्रदर्शन,आरोप-कुछ लोगों ने रास्ते के फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए
अलवर जिले की रैणी तहसील के गांव लूनिया बास भूड़ा के ग्रामीणों ने रास्ता खुलवाने की मांग को लेकर गुरुवार को जिला कलेक्टर से मुलाकात की। गांव से करीब 60-70 ग्रामीण मिनी सचिवालय पहुंचे और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि रैणी तहसील के लूनिया का बास गांव में कुछ खसरा नंबरों की जमीन से पिछले 60-70 सालों से आवागमन हो रहा है। ग्रामीणों ने धारा 251ए के तहत उपखंड अधिकारी रैणी को प्रार्थना पत्र देकर रास्ता प्राप्त किया था। इसके बदले डीएलसी दर के अनुसार राशि जमा कराकर रास्ते को राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज करवाया गया। ग्रामीण धर्मसिंह ने आरोप लगाया कि लंबे समय से प्रशासन से अनुरोध करने के बाद भी लूनिया का बास गांव के लिए रास्ता नहीं खोला गया है। उन्होंने बताया कि उपखंड अधिकारी रैणी द्वारा दिए गए रास्ते को रुकवाने के लिए तहसीलदार और पटवारी की ओर से कथित तौर पर एक फर्जी सहमति पत्र तैयार किया गया, जिस पर न तो किसी काश्तकार के हस्ताक्षर हैं और न ही ग्राम लूनियावास की कोई सहमति है। बिना सहमति के इस पत्र को राजस्व अपील अधिकारी अलवर की अदालत में पेश किया गया, ताकि गांव को मिलने वाला रास्ता रद्द कराया जा सके। ग्रामीणों ने कहा कि जब पूरी राशि जमा कर दी गई है और रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है, तो उसके बावजूद रास्ता नहीं दिया जाना अन्याय है। ग्रामीण इससे पहले भी सचिवालय आकर धरना दे चुके हैं।
अलवर जिले की रैणी तहसील के गांव लूनिया बास भूड़ा के ग्रामीणों ने रास्ता खुलवाने की मांग को लेकर गुरुवार को जिला कलेक्टर से मुलाकात की। गांव से करीब 60-70 ग्रामीण मिनी सचिवालय पहुंचे और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की।
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ग्रामीणों ने बताया कि रैणी तहसील के लूनिया का बास गांव में कुछ खसरा नंबरों की जमीन से पिछले 60-70 सालों से आवागमन हो रहा है। ग्रामीणों ने धारा 251ए के तहत उपखंड अधिकारी रैणी को प्रार्थना पत्र देकर रास्ता प्राप्त किया था। इसके बदले डीएलसी दर के अनुसार राशि जमा कराकर रास्ते को राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज करवाया गया।
ग्रामीण धर्मसिंह ने आरोप लगाया कि लंबे समय से प्रशासन से अनुरोध करने के बाद भी लूनिया का बास गांव के लिए रास्ता नहीं खोला गया है। उन्होंने बताया कि उपखंड अधिकारी रैणी द्वारा दिए गए रास्ते को रुकवाने के लिए तहसीलदार और पटवारी की ओर से कथित तौर पर एक फर्जी सहमति पत्र तैयार किया गया, जिस पर न तो किसी काश्तकार के हस्ताक्षर हैं और न ही ग्राम लूनियावास की कोई सहमति है।