स्कूल रैंकिंग में सफाई और अनुशासन के नंबर जुड़ेंगे:पिछड़ने वाले संस्थान के लिए योजना बनेगी; स्टूडेंट्स में अच्छी आदतें विकसित होंगी
स्कूली शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। विभाग ने स्कूलों की मासिक रैंकिंग प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए नए मापदंड निर्धारित किए हैं। अब स्कूलों को केवल छात्र संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि परिसर की स्वच्छता, शैक्षणिक अनुशासन और होमवर्क की नियमितता जैसे व्यावहारिक बिंदुओं पर भी परखा जाएगा। शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के अनुसार इन नए पैरामीटर्स को लागू करने के पीछे मुख्य तर्क यह है कि एक अनुशासित और स्वच्छ वातावरण ही बेहतर शिक्षा की नींव रख सकता है। नए नियमों से न केवल स्कूलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधरेगा, बल्कि शिक्षकों की सीधी जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी। कमजोर प्रदर्शन पर बनेगी कार्ययोजना रैंकिंग के नए मानकों का सीधा असर स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों की कार्यशैली पर पड़ेगा। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि जिन स्कूलों का प्रदर्शन रैंकिंग में लगातार निचले पायदान पर रहेगा, उनके लिए विशेष 'सुधारात्मक कार्ययोजना' तैयार की जाएगी। इसके विपरीत, शीर्ष पर रहने वाले स्कूलों और वहां के स्टाफ को विभाग द्वारा प्रोत्साहित किया जाएगा। विभाग का दावा है कि इस प्रतिस्पर्धात्मक माहौल से बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में सुधार होगा और विद्यार्थियों में अच्छी आदतें विकसित होंगी। इस तरह मिलेगी रैंकिंग नए नियमों के तहत कुल अंकों का विभाजन अलग-अलग श्रेणियों में किया गया है। अब हर महीने इन पैमानों पर स्कूलों की रिपोर्ट तैयार होगी। छात्रों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए एक समग्र मूल्यांकन प्रणाली अपनाई गई है, जिसमें शैक्षणिक और व्यावहारिक दोनों पक्षों को महत्व दिया गया है। इस प्रक्रिया में बोर्ड परीक्षा परिणाम को मुख्य आधार बनाया गया है, जहाँ 50% परिणाम आने पर प्रोत्साहन की शुरुआत होती है और 75% से अधिक परिणाम रहने पर विद्यार्थी को 10 अंक प्रदान किए जाते हैं, जबकि मध्यम स्तर पर 05 अंक का प्रावधान है। अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थी उपस्थिति पर विशेष बल दिया गया है; इसमें 80% हाजिरी होने पर 05 अंक, 90% हाजिरी पर 08 अंक और 95% से अधिक हाजिरी होने पर अधिकतम 10 अंक निर्धारित किए गए हैं। निरंतर अभ्यास और सीखने की प्रक्रिया को सक्रिय रखने के लिए होमवर्क चेक करने की पद्धति को भी अंकों से जोड़ा गया है। इसमें 50% कार्य पूरा होने पर 01 अंक और 75% से अधिक कार्य पूर्ण होने पर 03 अंक दिए जाते हैं। अंत में, शिक्षा के लिए उपयुक्त वातावरण और बुनियादी आवश्यकताओं को महत्व देते हुए स्वच्छता व सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। यदि विद्यालय में शौचालय और पेयजल व्यवस्था के 50% मानक पूर्ण पाए जाते हैं, तो इसके लिए 5 अंक आवंटित किए जाते हैं। यह व्यापक ढांचा न केवल बच्चों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाता है, बल्कि उन्हें नियमितता, स्वच्छता और उत्तरदायित्व का पाठ भी पढ़ाता है।