रसधारा के मंच पर ‘डाकघर’ और ‘नदी प्यासी थी’ मंचन ने दर्शकों को सोचने पर किया विवश
भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा रसधारा सांस्कृतिक संस्थान द्वारा आयोजित चार दिवसीय नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन कला, संवाद और संवेदना का सशक्त संगम देखने को मिला। प्रातः 10 बजे आयोजित रंग वार्ता में नाटक सइयां भये कोतवाल के निर्देशक निरंजन कुमार से संवाद हुआ। साथ ही अर्जुन देव चारण, स्वाति व्यास, राघवेंद्र रावत, ईश्वर दत्त माथुर, गोपाल आचार्य, नवल कुमार, देशराज मीणा और शिव प्रसाद ने लोक नाट्य एवं आधुनिक नाटकों के बुनियादी अंतर पर अपने विचार साझा किए। शाम 5 बजे रसधारा सभागार में रविन्द्रनाथ टैगोर लिखित डाकघर का मंचन कम्युनिटी थियेटर टोंक द्वारा किया गया। चितरंजन नामा के निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक गंभीर बीमारी से ग्रस्त बालक अमल की कथा के माध्यम से शारीरिक बंधनों के बीच कल्पनाओं की उड़ान और जीवन की सूक्ष्म संवेदनाओं को उकेरता है। सरल मंच सज्जा और सधे अभिनय ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। शाम 7 बजे टाउन हॉल में डॉ. धर्मवीर भारती लिखित नदी प्यासी थी का मंचन थर्ड बेल जोधपुर द्वारा किया गया। उम्मीद सिंह भाटी के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक में बाढ़, बलि और मानव मन की प्यास को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाया गया। नदी की उग्रता और पात्रों के भीतर उठते द्वंद्व एक-दूसरे से एकाकार होते नजर आए। महोत्सव के तहत सोमवार सुबह नदी प्यासी थी पर रंग चर्चा होगी, जबकि शाम को जामुन का पेड़ और खांचे का मंचन किया जाएगा।
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रसधारा सांस्कृतिक संस्थान द्वारा आयोजित चार दिवसीय नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन कला, संवाद और संवेदना का सशक्त संगम देखने को मिला। प्रातः 10 बजे आयोजित रंग वार्ता में नाटक सइयां भये कोतवाल के निर्देशक निरंजन कुमार से संवाद हुआ। साथ ही अर्जुन देव चारण, स्वाति व्यास, राघवेंद्र रावत, ईश्वर दत्त माथुर, गोपाल आचार्य, नवल कुमार, देशराज मीणा और शिव प्रसाद ने लोक नाट्य एवं आधुनिक नाटकों के बुनियादी अंतर पर अपने विचार साझा किए।
शाम 5 बजे रसधारा सभागार में रविन्द्रनाथ टैगोर लिखित डाकघर का मंचन कम्युनिटी थियेटर टोंक द्वारा किया गया। चितरंजन नामा के निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक गंभीर बीमारी से ग्रस्त बालक अमल की कथा के माध्यम से शारीरिक बंधनों के बीच कल्पनाओं की उड़ान और जीवन की सूक्ष्म संवेदनाओं को उकेरता है। सरल मंच सज्जा और सधे अभिनय ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। शाम 7 बजे टाउन हॉल में डॉ. धर्मवीर भारती लिखित नदी प्यासी थी का मंचन थर्ड बेल जोधपुर द्वारा किया गया।
उम्मीद सिंह भाटी के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक में बाढ़, बलि और मानव मन की प्यास को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाया गया। नदी की उग्रता और पात्रों के भीतर उठते द्वंद्व एक-दूसरे से एकाकार होते नजर आए। महोत्सव के तहत सोमवार सुबह नदी प्यासी थी पर रंग चर्चा होगी, जबकि शाम को जामुन का पेड़ और खांचे का मंचन किया जाएगा।