'बुलेट रानी' ने राइडर्स के लिए खोला खास बाइकिंग रेस्तरां:जयपुर की विजया बोलीं- बाइक मेरी जान है, सोलो ट्रेवल्स से भारत के नक्शे पर बनाया प्लस
सोलो बाइक राइडर के रूप में देशभर में पहचान बना चुकी जयपुर की ‘बुलेट रानी’ विजया शर्मा ने अपनी राइडिंग से न केवल भारत के नक्शे पर प्लस (+) का निशान बनाया, बल्कि अब अपने अनुभवों को जमीन पर उतारते हुए जयपुर में एक अनोखा बाइकिंग-थीम रेस्तरां भी शुरू किया है। यह रेस्तरांं खासतौर पर देश-दुनिया से आने वाले बाइक राइडर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जहां उन्हें घर जैसा खाना और ठहरने की उपयुक्त सुविधा मिल सकेगी। सोलो राइडर्स को खान-पान और ठहरने की बड़ी परेशानी विजया शर्मा ने अपने हजारों किलोमीटर के बाइकिंग अनुभव साझा करते हुए बताया कि सोलो राइडर्स को सबसे बड़ी परेशानी खान-पान और सुरक्षित ठहराव को लेकर होती है। लंबी दूरी की राइड के दौरान न तो समय पर अच्छा खाना मिल पाता है और न ही भरोसेमंद जगह। यही अनुभव उनके मन में एक ऐसे स्थान का विचार लेकर आया, जहां राइडर्स को सुकून और सुविधा दोनों मिल सकें। ‘जयपुर की बुलेट रानी’ नाम से रेस्तरांं इसी सोच को साकार करते हुए विजया ने जयपुर के चंदवाजी क्षेत्र, प्रताप यूनिवर्सिटी के नजदीक हाईवे पर अपना बाइकिंग रेस्तरांं शुरू किया है, जिसका नाम भी उन्होंने अपनी पहचान ‘जयपुर की बुलेट रानी’ पर ही रखा। रेस्तरांं की खासियत यह है कि यहां उनकी पुरानी बाइक्स को डिस्प्ले किया गया है और दीवारों पर उनकी यात्राओं, उपलब्धियों और राइडिंग जर्नी को तस्वीरों और किस्सों के जरिए दर्शाया गया है, जो हर राइडर को प्रेरित करता है। बेटी के सहयोग से पूरा हुआ सपना विजया ने बताया कि रेस्तरांं खोलना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उनकी बेटी विजेता जो एक आईटी कंपनी में कार्यरत हैं, ने पूरा सहयोग किया। मैंने बेटी को राइडर्स की समस्याओं के बारे में बताया और अपनी इच्छा जताई कि जयपुर के हाईवे पर ऐसा ठिकाना हो, जहां बाइकर्स को घर जैसा अहसास मिले। बेटी ने हर कदम पर मेरा साथ दिया और हमने मिलकर यह सपना पूरा किया। रेस्तरांं शुरू होने के बाद उन्हें बेहद सुकून महसूस हो रहा है, क्योंकि अब जयपुर से गुजरने वाले बाइकर्स को एक भरोसेमंद ठहराव मिलेगा। दुनिया की सबसे ऊंची सड़क से भारत का फोर कॉर्नर विजया शर्मा की उपलब्धियां किसी मोटिवेशनल कहानी से कम नहीं हैं। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची सड़क उमलिंग ला दर्रा पर अकेले बाइक राइड की। भारत के चारों कोनों को जोड़ते हुए लगभग 18,500 किलोमीटर की यात्रा कर देश के नक्शे पर प्लस (+) का निशान बनाया। वे लेह के खारडूंगला से कन्याकुमारी और अरुणाचल प्रदेश के किबिथू से गुजरात के कोटेश्वर तक बाइक से सफर कर चुकी हैं। इसके अलावा वे दो इंटरनेशनल बाइक राइड्स भी पूरी कर चुकी हैं। बाइक से रिटायरमेंट नहीं लिया विजया साफ शब्दों में कहती हैं कि रेस्तरांं खोलने का मतलब बाइकिंग से दूरी नहीं है। बाइक मेरा पैशन है, मेरी जान इसमें बसती है। 2025 में मैंने कश्मीर की सोलो राइड की थी। रेस्तरांं खोलकर मैंने बाइक से रिटायरमेंट नहीं लिया है। उनका मानना है कि अच्छा खाना न मिले तो राइड पर उसका सीधा असर पड़ता है, इसी सोच से यह पहल शुरू की गई है। फोर कॉर्नर कंपलीट करने के बाद हुए एक्सीडेंट विजया ने बताया कि अब तक की जर्नी आसान नहीं रही है। साढ़े 18 हजार किलोमीटर की राइड खत्म करने के बाद मैं अपने बेटे की शादी से लौट रही थी, तब मेरा हाईवे पर एक्सीडेंट हो गया। मेरा हाथ टूट गया था। मैं कहीं राइड भी नहीं कर पाई थी, सिर्फ पंजाब में एक इवेंट में शामिल होने गई थी। इसके बाद मुझे एक गांठ हो गई, उसका ऑपरेशन करवाया। इसके बाद एक ओर छोटा एक्सीडेंट हो गया। एक साल में मेरे साथ तीन घटनाएं घट चुकी थी, सभी कहते थे कि अब यह राइड नहीं कर पाएगी। लेकिन मैंने अपनी जिद से खुद को फिट किया और जल्द ही बाइक चलाने लग गई।