नए साल का स्वागत:नागौर में कोहरे का सितम, डीडवाना में बादलों का डेरा
साल 2026 के पहले दिन नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले में मौसम के अलग-अलग रूप देखने को मिले। जहां नागौर जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण इलाके घने कोहरे की सफेद चादर में लिपटे रहे, वहीं डीडवाना में बादलों की आवाजाही बनी रही। मौसम के इस बदलाव से जनजीवन की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। कोहरे की आगोश में नागौर, विजिबिलिटी हुई कम नागौर शहर में आज सुबह की शुरुआत घने कोहरे के साथ हुई। विशेषकर शहरी क्षेत्र के बख्तासागर और प्रतापसागर तालाब के आस-पास कोहरे का असर इतना अधिक था कि कुछ ही दूरी पर देखना मुश्किल हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो ईनाणा, मुंडवा मेड़ता के जारोड़ा और कुचेरा में भी जबरदस्त धुंध छाई रही। इस कारण हाईवे पर चलने वाले वाहनों की हेडलाइट्स दिन में भी जलती नजर आईं और रफ्तार पर ब्रेक लग गया। डीडवाना में बादलों ने डाला डेरा एक ओर जहां नागौर धुंध से ढका रहा, वहीं पड़ोसी जिला मुख्यालय डीडवाना में आसमान में घने बादल छाए रहे। बादलों की वजह से सूरज के दर्शन देरी से हुए। मौसम विभाग के अनुसार, दोनों ही जिलों में न्यूनतम तापमान 11°C दर्ज किया गया। हालांकि, अधिकतम तापमान में अंतर देखा गया; डीडवाना में पारा 22°C तक रहने का अनुमान है, जबकि नागौर में यह 25°C तक जा सकता है। ठंड से बचने को अलाव का सहारा, जनजीवन प्रभावित कड़ाके की ठंड और कोहरे के कारण आमजन की दिनचर्या देरी से शुरू हो रही है। लोग ठंड से बचने के लिए जगह-जगह अलाव जलाकर तापते हुए नजर आए। सर्दी के असर से बाजारों में भी सुबह की रौनक कम दिखी और लोग घरों में ही दुबके रहे। खेती के लिए 'अमृत' है यह मौसम मौसम में छाई नमी और ओस की बूंदें रबी की फसलों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जा रही हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह नमी फसलों के लिए अमृत के समान है। हालांकि, क्षेत्र के किसान अभी भी 'मावठ' (शीतकालीन वर्षा) की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि फसलों को और अधिक पोषण मिल सके।
साल 2026 के पहले दिन नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले में मौसम के अलग-अलग रूप देखने को मिले। जहां नागौर जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण इलाके घने कोहरे की सफेद चादर में लिपटे रहे, वहीं डीडवाना में बादलों की आवाजाही बनी रही। मौसम के इस बदलाव से जनजीवन की रफ्ता



