नववर्ष पर गोगामेड़ी पहुंचे लाखों श्रद्धालु:पंच गौरव कार्यक्रम के तहत मेला महाआरती के साथ संपन्न
हनुमानगढ़ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गोगाजी गोगामेड़ी में नववर्ष मेला महाआरती के साथ संपन्न हो गया। पंच गौरव अभियान के तहत आयोजित इस मेले में नववर्ष के अवसर पर करीब पांच लाख श्रद्धालुओं ने गोगाजी के दर्शन किए। देवस्थान विभाग ने दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की थीं। मेले के दौरान 'एक जिला-एक पर्यटन स्थल' थीम के अंतर्गत 30 दिसंबर को भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में सूरतगढ़ का मशक वादन दल, बीकानेर का रोबीला ग्रुप, शेखावाटी की चंग-ढप कला, सरदारशहर का डेरू ग्रुप, चूरू का ढोल-थाली दल, स्थानीय कलाकारों का बीन-बांसुरी-भपंग वादन और बीकानेर का कच्छी घोड़ी लोक नृत्य आकर्षण का केंद्र रहे। सजे-धजे ऊंटों का काफिला गोरख टीला से मंदिर तक पहुंचा। इसके अतिरिक्त, 29 दिसंबर से 2 जनवरी तक पांच दिवसीय महाआरती का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन, देवस्थान विभाग और पर्यटन विभाग के सहयोग से दो दिन सांस्कृतिक संध्या भी आयोजित हुई। इन सांस्कृतिक संध्याओं में बाड़मेर का सूफी बैंड, बीकानेर का भवाई नृत्य, जोधपुर का कालबेलिया नृत्य, किशनगढ़ का चरी नृत्य, सरदारशहर का डेरू ग्रुप और श्रीगंगानगर का भांगड़ा दल शामिल रहा।
हनुमानगढ़ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गोगामेड़ी धाम के नए साल पर लाखों भक्तों ने किए दर्शन।
हनुमानगढ़ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गोगाजी गोगामेड़ी में नववर्ष मेला महाआरती के साथ संपन्न हो गया। पंच गौरव अभियान के तहत आयोजित इस मेले में नववर्ष के अवसर पर करीब पांच लाख श्रद्धालुओं ने गोगाजी के दर्शन किए। देवस्थान विभाग ने दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं
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मेले के दौरान 'एक जिला-एक पर्यटन स्थल' थीम के अंतर्गत 30 दिसंबर को भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में सूरतगढ़ का मशक वादन दल, बीकानेर का रोबीला ग्रुप, शेखावाटी की चंग-ढप कला, सरदारशहर का डेरू ग्रुप, चूरू का ढोल-थाली दल, स्थानीय कलाकारों का बीन-बांसुरी-भपंग वादन और बीकानेर का कच्छी घोड़ी लोक नृत्य आकर्षण का केंद्र रहे। सजे-धजे ऊंटों का काफिला गोरख टीला से मंदिर तक पहुंचा।

नए साल के मौके पर गुब्बारों से सजा गोगामेड़ी धाम।
इसके अतिरिक्त, 29 दिसंबर से 2 जनवरी तक पांच दिवसीय महाआरती का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन, देवस्थान विभाग और पर्यटन विभाग के सहयोग से दो दिन सांस्कृतिक संध्या भी आयोजित हुई। इन सांस्कृतिक संध्याओं में बाड़मेर का सूफी बैंड, बीकानेर का भवाई नृत्य, जोधपुर का कालबेलिया नृत्य, किशनगढ़ का चरी नृत्य, सरदारशहर का डेरू ग्रुप और श्रीगंगानगर का भांगड़ा दल शामिल रहा।