खान विभाग:अवैध खनन रोकने गई टीम पर पथराव, गाड़ी के शीशे तोड़े, तीन ट्रैक्टर छुड़ा ले गए माफिया
ब्रज क्षेत्र के पवित्र पर्वत अब प्रशासन के नियंत्रण में नहीं, बल्कि अवैध खनन माफिया की गिरफ्त में नजर आ रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि खनन रोकने पहुंची पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम पर हमला कर दिया। पथराव और हिंसा के बीच सरकारी अमला जान बचाकर भागने को मजबूर हुआ, जबकि माफिया का मनोबल पुलिस-प्रशासन से कहीं ज्यादा मजबूत दिखाई दिया। शुक्रवार देर शाम अवैध खनन की सूचना पर पुलिस और वन विभाग की टीम गढ़ाजान पहाड़ क्षेत्र में पहुंची। यहां खननकर्ता पहले से अलर्ट थे। टीम को देखते ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को छिपा दिया। जैसे ही पुलिस ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर आगे बढ़ना चाहा, तभी करीब 40-50 महिला-पुरुषों ने संगठित होकर हमला बोल दिया। खनन माफिया और उनके समर्थकों ने पुलिस व वन विभाग की टीम पर जमकर पथराव किया। वन विभाग की गाड़ी के आगे-पीछे के शीशे टूट गए, जबकि पुलिस वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया। इस दौरान क्षेत्रीय वन अधिकारी सहित कई कार्मिक चोटिल हो गए। हालात इतने भयावह हो गए कि टीम को जान बचाने के लिए पीछे हटना पड़ा। पुलिस और वन विभाग टीम ने एक ट्रैक्टर -ट्रॉली जब्त की अवैध खनन रोकने के लिए पहले प्रशासन की ओर से बड़े-बड़े गड्ढे खुदवाए गए थे, ताकि रास्ते बंद हो सकें। लेकिन खनन माफिया ने उन्हें पाटकर दोबारा पहाड़ों को छलनी कर दिया। इससे साफ है कि प्रशासनिक आदेशों का उन्हें कोई डर नहीं है। अवैध खनन रोकने के लिए प्रशासन लगातार मीटिंग कर रहा है लेकिन उसका असर धरातल पर नहीं दिख रहा। भारी विरोध और हमले के बावजूद टीम एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को खनन सामग्री सहित जब्त करने में सफल रही, लेकिन जिस तरह से सरकारी अमले को पीछे हटना पड़ा, उसने पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। "अवैध खनन पर कार्रवाई करने गए थे। करीब 50 महिला-पुरुषों ने हमला कर दिया। वन विभाग और पुलिस की गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। पथराव में स्वयं सहित कई कार्मिक घायल हुए हैं। मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।" — सतवीर सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी, कामां
ब्रज क्षेत्र के पवित्र पर्वत अब प्रशासन के नियंत्रण में नहीं, बल्कि अवैध खनन माफिया की गिरफ्त में नजर आ रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि खनन रोकने पहुंची पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम पर हमला कर दिया। पथराव और हिंसा के बीच सरकारी अमला जान बचा