वेनेज़ुएला को लेकर ट्रंप के प्लान से क्या बढ़ेंगी अमेरिका की मुश्किलें या राह होगी आसान?
SOURCE:BBC Hindi
ट्रंप ने कहा कि उनकी एक टीम वेनेज़ुएला के लोगों के साथ मिलकर काम करेगी और देश का नियंत्रण संभालेगी. यह फ़ैसला ट्रंप की नीति में अचानक आए बदलाव को दिखाता है, जिसमें विरोधाभास और बड़ी चुनौतियां शामिल हैं.
वेनेज़ुएला को लेकर ट्रंप के प्लान से क्या बढ़ेंगी अमेरिका की मुश्किलें या राह होगी आसान?
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इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में वेनेज़ुएला में हुए अमेरिकी ऑपरेशन की जानकारी दी
Author, एंथनी ज़र्चर
पदनाम, उत्तरी अमेरिका संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
4 जनवरी 2026
वेनेज़ुएला में डर और सदमे का माहौल बनाने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब राष्ट्र-निर्माण के काम में उतरते दिख रहे हैं.
शनिवार सुबह अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में एक असाधारण प्रेस कॉन्फ़्रेंस में राष्ट्रपति ट्रंप ने एलान किया कि अमेरिकी बलों ने काराकास में रातों-रात की गई कार्रवाई में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को सफलतापूर्वक पकड़ लिया है.
इसके बाद ट्रंप ने कहा कि उनकी एक टीम वेनेज़ुएला के लोगों के साथ मिलकर काम करेगी और संकटग्रस्त देश का नियंत्रण संभालेगी. इस टीम में विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी शामिल होंगे.
उन्होंने कहा, "हम देश को तब तक चलाएंगे, जब तक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण तरीके से सत्ता का हस्तांतरण नहीं हो जाता."
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हालांकि, "देश चलाने" का असल मतलब क्या होगा, यह साफ़ नहीं है. लेकिन यह फ़ैसला ट्रंप की नीति में अचानक आए बदलाव को दिखाता है, जिसमें विरोधाभास और बड़ी चुनौतियां शामिल हैं.
ट्रंप का वेनेज़ुएला प्लान
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इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति ट्रंप और सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ़ वेनेज़ुएला में हुए अमेरिकी ऑपरेशन को वॉशिंगटन से देख रहे थे
एक ऐसे राष्ट्रपति जिन्होंने "हमेशा चलने वाले युद्धों" के ख़िलाफ़ कैंपेन किया, जिन्होंने सत्ता परिवर्तन के लिए अमेरिका की पिछली कोशिशों की कड़ी आलोचना की और "अमेरिका फ़र्स्ट" विदेश नीति लागू करने का वादा किया, अब वही अपने राष्ट्रपति पद को एक ऐसे दक्षिण अमेरिकी देश के सफल पुनर्निर्माण को लेकर दांव पर लगा रहे हैं, जिसकी अर्थव्यवस्था खस्ताहाल है और जिसकी राजनीतिक स्थिरता दशकों की तानाशाही से कमज़ोर है.
फिर भी ट्रंप लगातार आशावादी बने रहे.
उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन का "जीतने का रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग़" है और यह मामला भी अलग नहीं होगा. उन्होंने वेनेज़ुएला के जर्जर औद्योगिक ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को शामिल करने, अमेरिकी पुनर्निर्माण प्रयासों के लिए धन उपलब्ध कराने और वेनेज़ुएला के लोगों को लाभ पहुंचाने का वादा किया.
उन्होंने इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती से इनकार नहीं किया. उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हम ज़मीन पर सैनिक भेजने से नहीं डरते… कल रात भी ज़मीन पर हमारे सैनिक थे."
इराक़ पर अमेरिकी हमले के कड़े आलोचक रहे ट्रंप को अब इराक़ युद्ध के अमेरिकी रणनीतिकारों में से एक, पूर्व विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल के शब्दों पर ध्यान देना होगा, "अगर आप इसे बिगाड़ते हैं, तो इसकी ज़िम्मेदारी आपकी होगी."
अमेरिका ने वेनेज़ुएला के भविष्य को नया रूप दिया है, चाहे यह बेहतर के लिए या बदतर के लिए.
ट्रंप का वेनेज़ुएला को लेकर अलग रुख़
ट्रंप लगभग एक साल पहले पद संभालते समय ख़ुद को शांति स्थापित करने वाला नेता बताते थे, लेकिन बीते एक साल में उन्होंने दिखाया है कि वह दुनियाभर में सैन्य ताक़त इस्तेमाल करने को तैयार हैं.
पिछले हफ़्ते उन्होंने सीरिया और नाइजीरिया में हवाई हमलों का आदेश दिया. 2025 में उन्होंने ईरान में परमाणु ठिकानों, कैरिबियाई क्षेत्रों में संदिग्ध मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े जहाज़ों, यमन में विद्रोही बलों, सोमालिया में सशस्त्र समूहों और इराक़ में इस्लामी चरमपंथियों को निशाना बनाया.
इन पिछली कार्रवाइयों में ज़्यादातर मिसाइलों और विमानों का इस्तेमाल हुआ और अमेरिकी बलों को सीधे ख़तरे से दूर रखा गया. इसके मुक़ाबले वेनेज़ुएला पर ट्रंप की कार्रवाई और उस देश के भविष्य को लेकर उनकी प्रतिबद्धताएं काफ़ी अलग हैं.
उन्होंने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि उनका लक्ष्य "वेनेज़ुएला को फिर से महान बनाना" है.
ट्रंप के "मेक अमेरिका ग्रेट अगेन" या मागा नारे का यह रूप उनके कुछ समर्थकों के लिए स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है.
कांग्रेस सदस्य मार्जोरी टेलर ग्रीन ने एक्स पर ट्रंप की कार्रवाई की तुरंत आलोचना की. ग्रीन कभी ट्रंप की वफ़ादार रही थीं. बाद में वह ट्रंप पर अलग राजनीतिक रुख़ अपनाने का आरोप लगाते हुए उनसे अलग हो गई थीं.
उन्होंने लिखा, "हमारी अपनी सरकार की कभी न ख़त्म होने वाली सैन्य आक्रामकता और विदेशी युद्धों के समर्थन को लेकर अमेरिकियों की नाराज़गी जायज़ है, क्योंकि हमें इसकी क़ीमत चुकानी पड़ती है और रिपब्लिकन व डेमोक्रेट, दोनों दल वॉशिंगटन की सैन्य मशीनरी को हमेशा चलते रहने के लिए फंड देते हैं. मागा के कई लोगों ने सोचा था कि उन्होंने इसे ख़त्म करने के लिए वोट दिया है. लेकिन हम ग़लत थे."
ट्रंप के एक और प्रमुख आलोचक, केंटकी से रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने मादुरो की गिरफ़्तारी के लिए दिए गए क़ानूनी तर्क, यानी हथियारों और कोकीन की तस्करी के आरोपों की तुलना ट्रंप की उस दलील से की जिसमें उन्होंने कहा था कि यह अभियान ज़ब्त किए गए अमेरिकी तेल को वापस लेने और फ़ेंटानिल उत्पादन रोकने के लिए था.
हालांकि ज़्यादातर रिपब्लिकन सांसद राष्ट्रपति के समर्थन में खड़े दिखे. हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने एक "आपराधिक शासन" के ख़िलाफ़ की गई सैन्य कार्रवाई को "निर्णायक और न्यायसंगत" बताया.
'मुनरो डॉक्ट्रिन' की जगह 'डोनरो डॉक्ट्रिन'
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इमेज कैप्शन, वेनेज़ुएला में चलाए गए अभियान को लेकर ट्रंप की आलोचना हो रही है
प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला में की गई कार्रवाई उनकी "अमेरिका फ़र्स्ट" प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाती है, क्योंकि इससे अमेरिका की क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित होती है और तेल की स्थिर आपूर्ति मिलती है.
उन्होंने उन्नीसवीं सदी की शुरुआत की मुनरो डॉक्ट्रिन को फिर से सामने रखा और उसे नया नाम दिया "डोनरो डॉक्ट्रिन". मुनरो सिद्धांत 19वीं सदी की शुरुआत की एक अमेरिकी विदेश नीति थी. इसका मानना था कि पश्चिमी गोलार्ध यानी अमेरिका महाद्वीप को यूरोपीय शक्तियों के प्रभाव से मुक्त रहना चाहिए.
ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला में की गई कार्रवाई दिखाती है कि "पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी प्रभुत्व पर अब कभी सवाल नहीं उठेंगे."
उन्होंने कहा कि नई अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का मक़सद "व्यापार, क्षेत्र और संसाधनों की सुरक्षा करना है, जो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के मूल में हैं". उन्होंने पश्चिमी गोलार्ध को अमेरिका का "घरेलू क्षेत्र" बताया.
हालांकि, मादुरो को पकड़ने के ट्रंप के फ़ैसले से वैश्विक राजनीति और दुनिया की अन्य प्रमुख सैन्य शक्तियों के साथ अमेरिका के रिश्तों को लेकर बड़े सवाल खड़े होंगे.
ट्रंप के फ़ैसले की आलोचना
चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इस घटना पर हैरानी जताई और इसे एक संप्रभु देश पर लापरवाह हमला बताकर इसकी निंदा की.
बाइडन प्रशासन के दौरान अमेरिका ने यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद इसी तरह की निंदा की थी. अब ट्रंप प्रशासन इन दोनों देशों के बीच शांति समझौता कराने की कोशिश कर रहा है, जो कई बार रूस के पक्ष में ज़्यादा झुका हुआ दिखा है.
सेंट्रिस्ट रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन ने ट्रंप की कार्रवाई से जाने वाले संदेश को लेकर चिंता जताई है. बेकन इस साल के अंत में राजनीति से रिटायर हो रहे हैं.
उन्होंने कहा, "मेरी सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब रूस इसका इस्तेमाल यूक्रेन के ख़िलाफ़ अपनी ग़ैरक़ानूनी और बर्बर सैन्य कार्रवाइयों को सही ठहराने के लिए करेगा, या चीन ताइवान पर हमले को जायज़ ठहराने के लिए इसका इस्तेमाल करेगा."
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इमेज कैप्शन, निकोलस मादुरो की तस्वीर को डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर शेयर किया है
ट्रंप के डेमोक्रेटिक आलोचकों का रुख़ इससे ज़्यादा स्पष्ट था.
हवाई से सीनेटर ब्रायन शैट्ज़ विदेश संबंध समिति के सदस्य हैं. उन्होंने कहा, "अमेरिका को किसी भी वजह से दूसरे देशों को नहीं चलाना चाहिए. हमें अब तक यह सबक़ सीख लेना चाहिए था कि कभी ख़त्म न होने वाले युद्धों और सत्ता परिवर्तन के अभियानों में पड़ने के नतीजे अमेरिकियों के लिए विनाशकारी होते हैं."
नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद अगर डेमोक्रेट्स सदन में बहुमत हासिल करते हैं तो कांग्रेस सदस्य हकीम जेफ़्रीज़ हाउस स्पीकर बन सकते हैं. उन्होंने कहा कि मादुरो एक अपराधी और तानाशाह हैं, जिनका मानवाधिकार उल्लंघनों का लंबा रिकॉर्ड है. लेकिन जेफ़्रीज़ ने हमले से पहले कांग्रेस के नेताओं से सलाह न लेने के ट्रंप के फ़ैसले की निंदा की.
उन्होंने कहा, "डोनाल्ड ट्रंप की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है कि वह क़ानून का पालन करें और अमेरिका में लोकतांत्रिक मानदंडों की रक्षा करें. अमेरिका फ़र्स्ट का यही मतलब है."
ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि उन्होंने कांग्रेस को जानकारी नहीं दी, क्योंकि उन्हें चिंता थी कि हमले से पहले ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी "लीक" हो सकती है.
यह सैन्य अभियान सफल रहा, जिसमें किसी भी अमेरिकी की मौत नहीं हुई और अमेरिकी साजो-सामान को सीमित नुक़सान हुआ.
ट्रंप ने अपने जाने-पहचाने अंदाज़ में इस कार्रवाई को "शानदार हमला" और "अमेरिकी इतिहास में सैन्य शक्ति और क्षमता के सबसे आश्चर्यजनक, प्रभावी और शक्तिशाली प्रदर्शनों में से एक" बताया.
अब वह अपने राष्ट्रपति पद को इस बात पर दांव पर लगा रहे हैं कि यह सफलता जारी रहेगी, क्योंकि अमेरिका का कहना है कि वह वेनेज़ुएला को चलाने और उसका पुनर्निर्माण करने की ज़िम्मेदारी संभालेगा. हालांकि, इसका असल मतलब क्या है, यह साफ़ नहीं है.
ट्रंप और उनकी टीम को एक ऐसे देश को मज़बूत करना होगा जो दशकों से उथल-पुथल में है. साथ ही एक ऐसे क्षेत्र को स्थिर करना होगा जो निश्चित तौर पर इस बात को लेकर सतर्क रहेगा कि ट्रंप की विदेश नीति उनके लिए आगे क्या लेकर आने वाली है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशितो