मुहाना पुलिस की मिलीभगत से तोड़ा गया स्टे आदेश:पथिक सेना का आरोप, खेती की जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश; एमबीसी आरक्षण में भी हुई गड़बड़ी
मुहाना थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए पथिक सेना ने दावा किया है कि अदालत के स्टे आदेश के बावजूद पुलिस की मिलीभगत से बुलडोजर चलवाकर चारदीवारी तुड़वाई गई और खेती की जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश की गई। संगठन ने इसे खुलेआम कानून की अवहेलना बताते हुए प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं और मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत में संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस के संरक्षण में भूमाफियाओं ने गुर्जर समाज के काश्तकारों की पैतृक जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश की। संगठन के नेताओं ने बताया कि न्यायालय में प्रकरण लंबित होने और स्टे आदेश के बावजूद बुलडोजर चलवाकर चारदीवारी तोड़ी गई। पीड़ित परिवारों ने कंट्रोल रूम में शिकायत की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मदद करने के बजाय फरियादियों को करीब तीन घंटे तक बंधक बनाकर रखा और बाद में शांतिभंग के आरोप में थाने में बंद कर दिया। इतना ही नहीं, जमानत मिलने के बावजूद अगले दिन भी उन्हें घंटों तक थाने में रोका गया और कथित रूप से धमकाया गया। पथिक सेना के जयपुर संभाग अध्यक्ष हंसराज फौजी ने बताया कि इस पूरे मामले की शिकायत डीसीपी साउथ से की गई, लेकिन जांच बदलने और फाइल मंगवाने के आदेश के बावजूद थाना स्तर से फाइल नहीं भेजी गई। जमीन को भूमाफिया पुलिस की मिलीभगत से पहुंचाना चाहते नुकसान जयपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष गणेश चेची ने आरोप लगाया कि मुख्य सड़क से सटी कीमती खेती की जमीन को भूमाफिया पुलिस की मिलीभगत से नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, ताकि पीछे की जमीन ऊंचे दामों पर बेची जा सके। मामले में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम से भी मुलाकात संगठन के शहर अध्यक्ष देवांश दौराता ने बताया कि इस प्रकरण को लेकर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम से भी मुलाकात की गई, लेकिन वहां से भी कोई ठोस पहल नहीं हुई। आरटीआई के जरिए गिरफ्तारी और रोजनामचा रिपोर्ट मांगी गई तो जवाब मिला कि गिरफ्तारी तो हुई, लेकिन उसकी आमद-रवानगी थाने के रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं है, जो गंभीर सवाल खड़े करता है। पथिक सेना का MBC आरक्षण को लेकर सरकार पर तीखा हमला पथिक सेना ने एमबीसी आरक्षण को लेकर भी सरकार और भर्ती एजेंसियों पर तीखा हमला बोला है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि 40 प्रतिशत न्यूनतम अंक की शर्त के जरिए आरक्षण को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। मेरिट में आने के बावजूद सामान्य कोटे से लाभ न देना, एमबीसी प्रमाण पत्र न बनना, देवनारायण बोर्ड को अधिकार न मिलना और विमुक्त-घुमंतू सूची में गुर्जर समाज को शामिल न करना समाज के साथ भेदभावपूर्ण रवैया है। युवा सिकंदरा में पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे संगठन के मीडिया प्रभारी विक्रमदेव गुर्जर ने बताया कि एमबीसी समाज के युवा सिकंदरा में पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द मांगें नहीं मानीं, तो पथिक सेना तहसील स्तर तक आंदोलन तेज करेगी।