रामगढ़-महलपुर बांध से बदलेगा पार्वती बेसिन का भूगोल
माधव गौतम | बारां जिले में अब रामजल सेतु लिंक परियोजना(पूर्व में ईआरसीपी) के तहत रामगढ़ और महलपुर में बांध बनाने का काम शुरू हो गया है। इसके बनने के बाद पार्वती नदी बेसिन का भूगोल बदल जाएगा। साथ ही बारां जिला भी जल से समृद्ध हो सकेगा। महलपुर में पार्वती नदी पर बनने वाला बांध चंबल पर बने कोटा बैराज और जवाहर सागर की तर्ज पर बनेगा। वर्तमान में इसको लेकर काम शुरू हो गया है। परियोजना अधिकारियों के अनुसार रामगढ़ और महलपुर दोनों संरचनाएं पार्वती नदी तंत्र में ऐसे स्थानों पर प्रस्तावित हैं, जहां पानी का बहाव, कैचमेंट एरिया और टोपोग्राफी तीनों का संगम होता है। यही वजह है कि रामजल सेतू लिंक परियोजना में इन बांधों को खास महत्व दिया है। इसके बनने के बाद बारां जिले से मानसून के दौरान इन नदीयों में व्यर्थ बहकर जाने वाले पानी का स्टोरेज किया जाएगा। साथ ही यहां से पानी नवनेरा पहुंचाने को लेकर पंप हाउस भी बनाया जाएगा। इसको लेकर भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा कर लिया है। कैचमेंट और डूब क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। ^रामगढ़ और महलपुर में रामजल सेतु परियोजना के तहत महलपुर और रामगढ़ में बैराज का काम होना है। महलपुर में काम शुरू कर दिया गया है। यह पार्वती नदी पर बनाया जाएगा। वहीं रामगढ़ में पार्वती नदी की सहायक नदी कूल पर बैराज बनेगा। - दीपेंद्र सिंह, एक्सईन बारां अब सिर्फ कैचमेंट नहीं, कंट्रोल जोन होगा अब तक बारां को अक्सर कैचमेंट एरिया या पानी देने वाला जिला माना जाता रहा है, लेकिन अब इन बांधों के साथ बारां की पहचान बदल जाएगी। अब यह जल नियंत्रण और जल नियोजन का केंद्र बनने की ओर है। इसके बनने के बाद जिले में अतिरिक्त रूप से सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता हो सकेगी। साथ ही जिले के भूजल स्तर में भी बढ़ोतरी होगी। यह होगा फायदा {नदी के मौसमी उफान को नियंत्रित किया जाएगा। {बाढ़ और कटाव के जोखिम को वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधित किया जाएगा। {डाउनस्ट्रीम परियोजनाओं के लिए जल प्रवाह की निरंतरता सुनिश्चित होगी। {जरूरत पड़ने पर यहां से पानी को नवनेरा होते हुए बीसलपुर बांध तक पहुंचाया जा सकेगा। महलपुर बैराज: 17 गेट रहेंगे, 331 मी. लंबा व 41 मीटर ऊंचा रहेगा, 23 गांवों की भूमि डूब क्षेत्र में महलपुर में पार्वती नदी पर बैराज का निर्माण होगा। दोनों बांधों के बीच करीब 7 किमी की दूरी है। आकार, लागत और क्षमता तीनों में रामजल सेतु लिंक परियोजना में प्रमुख बांध है। यह बांध कुल 3550 मीटर लंबा होगा, जिसमें 331 मीटर पक्का निर्माण और 3219 मीटर मिट्टी की दीवार होगी। 41 मीटर ऊंचा रहेगा। इसकी लागत 2355 करोड़ रुपए आएगी। यह परियोजना पार्वती बेसिन में दीर्घकालिक है। इसकी भराव क्षमता 258 एमसीएम रहेगी। इसमें कुल 3853 हैक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी, जिसमें 1239 हैक्टेयर निजी भूमि और 908 हैक्टेयर वन भूमि शामिल है। इस बांध से 11 ग्राम पंचायतों के 23 गांवों की भूमि डूब क्षेत्र में आएगी। यह बांध नंदगावडी गांव के निकट बनेगा। रामगढ़ बैराज की कंट्रोल पॉइंट में रहेगी भूमिका, कूल नदी पर बनेगा, 6 गेट होंगे रामगढ़ बांध पार्वती नदी की सहायक कूल नदी पर बनेगा। यह बांध 116 मीटर लंबा होगा। इसमें 1475 मीटर कच्ची दीवार होगी। जबकि 37 मीटर ऊंचा रहेगा। इसकी कुल भराव क्षमता 45 एमसीएम रहेगी। इसकी लागत 670 करोड रुपए रहेगी। इसमें 742 हैक्टेयर जमीन आएगी, जिसमें 24 हैक्टेयर निजी और 442 हैक्टेयर वन भूमि रहेगी। रामगढ़ बैराज का उद्देश्य पार्वती की सहायक नदी से आने वाले जल को अनियंत्रित बहाव से संरचित प्रवाह में बदलना है, ताकि आगे की परियोजनाओं के लिए संतुलित जल प्रबंधन संभव हो सके।