रूस और चीन क़ब्ज़ा ना कर लें, इसलिए अमेरिका को चाहिए ग्रीनलैंड: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वो ग्रीनलैंड को आसानी से या दूसरे तरीक़ों से हासिल करेंगे, डेनमार्क ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
रूस और चीन क़ब्ज़ा ना कर लें, इसलिए अमेरिका को चाहिए ग्रीनलैंड: ट्रंप

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इमेज कैप्शन, वेनेज़ुएला पर सैन्य कार्रवाई के बाद ग्रीनलैंड को लेकर आशंकाएं बढ़ गई है.
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- Author, सारा स्मिथ
- पदनाम, नॉर्थ अमेरिका एडिटर
- 10 जनवरी 2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस और चीन को ग्रीनलैंड पर क़ब्ज़ा करने से रोकने के लिए अमेरिका को उसे अपना बनाना होगा.
शुक्रवार को बीबीसी के एक सवाल पर ट्रंप ने कहा, "देशों के पास मालिकाना हक़ होना चाहिए और आप मालिकाना हक़ की रक्षा करते हैं, लीज की नहीं. और हमें ग्रीनलैंड की रक्षा करनी होगी."
उन्होंने जोड़ा कि अमेरिका यह काम 'आसान तरीके से' या 'कठिन तरीके से' करेगा.
व्हाइट हाउस ने हाल ही में कहा था कि अमेरिकी प्रशासन नेटो के सदस्य देश डेनमार्क के इस अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र को खरीदने के विकल्प पर विचार कर रहा है, लेकिन बल प्रयोग से उसे अपने में मिलाने के विकल्प को भी ख़ारिज़ नहीं किया गया है.
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डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने कहा है कि यह इलाका बिक्री के लिए नहीं है.
डेनमार्क ने यह भी कहा है कि किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई ट्रांस-अटलांटिक रक्षा गठबंधन के अंत की वजह बनेगी.
दुनिया का सबसे कम आबादी वाला इलाका होने के बावजूद, उत्तर अमेरिका और आर्कटिक के बीच होने की वजह से मिसाइल हमलों की स्थिति में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम्स के लिए ग्रीनलैंड की स्थिति अहम मानी जाती है.
साथ ही इस क्षेत्र में जहाजों की निगरानी के लिए भी यह जगह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है.
अमेरिका की दिलचस्पी

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इमेज कैप्शन, ट्रंप के ख़रीदने की पेशकश को ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों ने ख़ारिज़ कर दिया है.
ट्रंप बार-बार कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है.
उन्होंने बिना किसी सबूत के दावा किया कि यह इलाका "हर तरफ रूसी और चीनी जहाजों से भरा हुआ है."
अमेरिका के पास पहले से ही ग्रीनलैंड के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित पिटुफ़िक बेस पर 100 से ज़्यादा सैन्य कर्मी स्थायी रूप से तैनात हैं.
यह सैन्य अड्डा द्वितीय विश्व युद्ध के समय से ही अमेरिका के हाथ में है.
डेनमार्क के साथ मौजूदा समझौतों के तहत, अमेरिका को ग्रीनलैंड में जितने चाहे उतने सैनिक लाने का अधिकार है.
लेकिन वॉशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि लीज़ समझौता पर्याप्त नहीं है.
उन्होंने कहा, "देश नौ साल के सौदे या 100 साल के सौदे नहीं कर सकते. उन्हें ओनरशिप (मालिकाना हक़) चाहिए."
ट्रंप ने कहा, "मुझे चीन के लोग पसंद हैं. मुझे रूस के लोग पसंद हैं. लेकिन मैं उन्हें ग्रीनलैंड में पड़ोसी के रूप में नहीं चाहता. ऐसा नहीं होने वाला."
उन्होंने यह भी जोड़ा, "और नेटो को भी यह समझना होगा."
नेटो के सदस्य देशों का विरोध

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इमेज कैप्शन, जलवायु परिवर्तन की वजह से बर्फ़ पिघल रही है और संभावित खनिजों तक पहुंच की संभावनाएं बढ़ गई हैं.
हालांकि डेनमार्क के नेटो सहयोगी देशों ने और कनाडा ने इस हफ़्ते ग्रीनलैंड के समर्थन में बयान जारी किए हैं.
इन बयानों में दोहराया गया है कि "डेनमार्क और ग्रीनलैंड के आपसी संबंधों से जुड़े फैसले लेने का अधिकार सिर्फ़ इन्हीं के पास है."
इन देशों ने कहा है कि वे भी अमेरिका की तरह आर्कटिक सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं, लेकिन यह सुरक्षा अमेरिका समेत सभी सहयोगियों को मिलकर सुनिश्चित करनी होगी.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, जिनमें संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं की पवित्रता शामिल है, को बनाए रखने की बात भी कही.
शनिवार को वेनेजुएला में सैन्य बल का इस्तेमाल कर उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को 'पकड़ने' की ट्रंप की कार्रवाई के बाद ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर चिंताएं फिर सामने आईं.
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2019 में इस द्वीप को खरीदने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन तब भी कहा गया था कि यह बिक्री के लिए नहीं है.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो अगले हफ्ते डेनमार्क के साथ बातचीत करने वाले हैं.
ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की दिशा में ट्रंप की सरकार की ओर से उठाए गए क़दमों ने डेनमार्क और यूरोपीय संघ दोनों को नाराज़ किया है.
पिछले महीने 22 दिसंबर को ट्रंप ने डेनिश क्षेत्र के लिए एक दूत की नियुक्ति की थी.
ट्रंप ने कहा था कि ग्रीनलैंड 'अमेरिका की सुरक्षा के लिए ज़रूरी' है और इसे अपने 'कब्ज़े में लेना ही होगा.'
ग्रीनलैंड के संसाधन

इमेज कैप्शन, ग्रीनलैंड का 80 फ़ीसदी हिस्सा बर्फ़ से ढंका है.
21 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल वाले ग्रीनलैंड द्वीप की आबादी सिर्फ़ 57 हज़ार है. कई तरह की स्वायत्तता वाले ग्रीनलैंड की अर्थव्यवस्था डेनमार्क की सब्सिडी पर निर्भर है और ये किंगडम ऑफ़ डेनमार्क का हिस्सा है.
हाल के वर्षों में ग्रीनलैंड के प्राकृतिक संसाधनों में दिलचस्पी बढ़ी है. इनमें रेयर अर्थ मिनरल्स, यूरेनियम और आयरन शामिल हैं.
जलवायु परिवर्तन की वजह से बर्फ पिघलने के साथ इन संसाधनों तक पहुंच आसान होती जा रही है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां तेल और गैस के बड़े भंडार भी हो सकते हैं.
इस द्वीप के 80 फ़ीसदी हिस्से पर स्थाई रूप से मोटी बर्फ़ जमी रहती है.
उच्च तकनीकी सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले अहम खनिज भी ग्रीनलैंड में बड़ी मात्रा में मौजूद हैं.
पिछले साल जनवरी में मिशिगन यूनिवर्सिटी के प्रोफे़सर और जियोलॉजिस्ट एडम सिमोन ने बीबीसी न्यूज़ ब्राज़ील को बताया था कि ग्रीनलैंड में पूरी दुनिया का एक चौथाई या क़रीब 15 लाख टन रेयर अर्थ मिनरल्स हो सकता है.
रेयर अर्थ के मामले में अभी चीन पूरी दुनिया पर हावी है और ग्रीनलैंड में खनन कंपनियों में भी उसका निवेश है. चीन वर्षों से ग्रीनलैंड में अपनी मौज़ूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.
चीनी कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने ग्रीनलैंड में कम से कम दो हवाई अड्डे बनाने की कोशिश की है.
लेकिन माना जाता है कि अमेरिकी का दवाब में ऐसा नहीं हो पाया.
चीन को अमेरिका अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानता है और उसके साथ होड़ में ग्रीनलैंड एक नया मोर्चा बन गया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.