देर रात थिरकते रहे सैलानी, होटल-रिसोर्ट में सजी महफिलें, मनाया नए साल का जश्न
भास्कर न्यूज| जैसलमेर डीजे पर थिरकते सैलानी, राजस्थानी लोक नृत्य की धूम और विभिन्न व्यंजनों का लुत्फ उठाते लोग.... कुछ ऐसा ही नजारा बुधवार की रात को जैसलमेर में चारों तरफ देखने को मिला। 12 बजने से पहले एक बार सन्नाटा पसरा और कुछ ही देर में हैपी न्यू ईयर का धमाकेदार स्वागत शुरू हो गया। इससे पहले 2025 को विदाई दी गई। एक दूसरे को नए साल की बधाइयां दी गई और नए साल की धूम शुरू हो गई। साल के अंतिम दिन 31 दिसंबर को वर्ष 2025 को विदाई देने के लिए जैसलमेर में हजारों सैलानी पहंुचे। स्वर्णनगरी का नजारा किसी विदेशी नगरी से कम नहीं था। देर रात तक डीजे व लाइव म्यूजिक पर थिरकते हुए लोगों ने 2025 को विदाई दी और नए साल का स्वागत किया। सम व खुहड़ी के धोरों पर चकाचौंध लाइटिंग के बीच अलग ही शहर बसे नजर आए। कहीं से लोक संगीत की तो कहीं से बॉलीवुड संगत का शोर सुनाई दे रहा था। शहर की स्टार कैटेगरी होटलों सहित अन्य छोटे बड़े होटलों में थिरकते सैलानियों ने नए साल का जश्न मनाया। वहीं सम व खुहड़ी के धोरों पर तो अलग ही शहर बस गया। हजारों सैलानियों का हुजूम धोरों पर देखा गया और रिसोर्ट्स में हुए भव्य आयोजनों का सभी ने जमकर लुत्फ उठाया। चारों तरफ चकाचौंध लाइटिंग, डीजे म्यूजिक पर थिरकते लोग, लोक संगीत की स्वर लहरिया और आतिशबाजी के अनूठे नजारे देखने लायक थे। बुधवार की रात में शहर के होटल सूर्यागढ़, मेरियट, होटल डेजर्ट ट्यूलिप, हेरिटेज इन, रंगमहल, गोरबंध पैलेस, महादेव पैलेस, ब्राइस फोर्ट सहित विभिन्न होटलों व धोरों पर स्थित रिसोर्ट राजस्थान डेजर्ट सफारी, डेजर्ट स्प्रिंग, केके रिसोर्ट, डेजर्ट वैली, टाओज रिसोर्ट, फोर्ट अरण्या, महादेव रिसोर्ट के साथ-साथ अनेक स्थानों पर शानदार समारोह आयोजित हुए। स्वर्णनगरी की फिज़ां बदली बदली नजर आई। बुधवार को शाम होते होते न्यू ईयर का वेलकम करने सैलानी अपने अपने बुकिंग वाले स्थानों पर पहुंच गए। सर्द हवा के झोंके, रोशनी की झिलमिलाहट, जगमगाहट रोशनी, होटलों के गार्डन और डांस फ्लोर पर नृत्य करती देसी विदेशी बालाएं, सुर में सुर मिलाते युवा, नाच गान का मंजर, फिल्मी गीतों और राजस्थानी लोक गीतों की धुनों की धमक, बढ़ती धड़कनें, उत्साह, रोमांच और जश्न का ज्वार। पल पल की खुशी बटोरते युगल, मौजूदा साल को अलविदा कहने और 2026 का स्वागत करने को आतुर मन, सम व खुहड़ी के धोरों पर हिलोरे लेता हर मन, राजस्थानी लोक कलाकारों का पधारो म्हारे देश व केसरिया बालम का गुंजायमान हर किसी को थिरकने को मजबूर कर रहा था।