हाजिरी के बाद घर और निजी क्लिनिक पर सेवा दे रहे डॉक्टर
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद आरबीएम व जनाना अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन आम मरीजों को उनकी सेवाएं पूरी तरह नहीं मिल पा रहीं। इसकी मुख्य वजह यह है कि अधिकांश सीनियर डॉक्टर उपस्थिति दर्ज कर मरीज देखने अपने घर या निजी क्लिनिक्स पर चले जाते हैं। अस्पताल की ओपीडी में अक्सर मरीजों को केवल जूनियर व सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर ही देखते नजर आते हैं, जबकि सीनियर डॉक्टर नजर ही नहीं आते हैं। अस्पताल में डॉक्टरों के हाजिरी लगाकर गायब होने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नगेंद्र सिंह भदौरिया के निर्देश पर जनाना अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में शिशु रोग विभाग के 12 डॉक्टर उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर होने के बावजूद ड्यूटी स्थल पर मौजूद नहीं मिले। इस पर सभी 12 डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। असल स्थिति यह है कि सुबह उपस्थिति के समय सभी डॉक्टर ड्यूटी पर पहुंचते हैं, लेकिन कुछ हािजिरी लगाकर सीधे घर या क्लिनिक चले जाते हैं, तो कुछ एक-दो घंटे वार्ड राउंड लेकर गायब हो जाते हैं। सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक ओपीडी का निर्धारित समय है, लेकिन दो-ढाई बजे के बाद अधिकांश ओपीडी चैंबर खाली मिलते हैं। कई बार केवल एक-दो जूनियर या सीनियर रेजीडेंट ही मरीजों को संभालते नजर आते हैं। शनिवार को भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान अस्थि रोग विभाग में केवल एक जूनियर रेजीडेंट डॉ. अजय ही ओपीडी में बैठे मिले, जबकि बाकी सभी चैंबर खाली थे। वार्डों के राउंड सुबह ही पूरे हो चुके थे और अकेले डॉ. अजय ही मरीजों को परामर्श देते नजर आए। आरबीएम व जनाना अस्पताल में डॉक्टरों के उपस्थिति दर्ज करके ड्यूटी पर नहीं मिलने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। जिसके चलते मैंने जनाना अस्पताल के निरीक्षण के लिए अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीरेंद्र सिंह डागुर को भेजा तो शिशु रोग विभाग में 12 डॉक्टर उपस्थिति दर्ज करके कार्य स्थल पर मौजूद नहीं मिले। ऐसे 12 डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस दिया है। लगातार आरबीएम व जनाना अस्पताल में निरीक्षण किए जाएंगे। वहीं घर और निजी क्लिनिक पर सेवा देने वालों की भी सूची तैयार कराई जाएगी। -डॉ. नगेंद्र सिंह भदौरिया, चिकित्सा अधीक्षक, आरबीएम अस्पताल