आठवीं बाद संस्कृत छोड़नी पड़ रही, क्योंकि शहर में एक ही विद्यालय है
सरकार ने ब्यावर को जिला तो बना दिया, लेकिन जिला मुख्यालय पर संस्कृत शिक्षा आज भी उपेक्षा का शिकार है। जिले में कुल 6 वरिष्ठ उपाध्याय स्कूल होने के बावजूद शहर में एक भी उच्च माध्यमिक स्तर का संस्कृत विद्यालय नहीं है। इससे आठवीं कक्षा के बाद छात्र संस्कृत छोड़ने को मजबूर हैं। शहर वासियों के द्वारा लंबे समय से ब्यावर में संस्कृत स्कूल की मांग की जा रही है लेकिन जिला मुख्यालय पर एक मात्र संस्कृत स्कूल है वह भी उच्च प्राथमिक ही है। ऐसे में छात्रों के सामने समस्या है कि वह आगे की शिक्षा कहां से प्राप्त करें। 9वीं कक्षा में संस्कृत पढ़ने के लिए छात्रों को शहर से बाहर जाना पड़ रहा है। संस्कृत प्रेमियों ने प्रशासन को कई बार कुंदन नगर स्कूल को क्रमोन्नत करने की मांग की है लेकिन विभाग इसे अनसुना कर रहा है। कुंदन नगर स्कूल को क्रमोन्नत नहीं किए जाने का खामियाजा यहां पढ़ने वाले 120 विद्यार्थियों को उठाना पड़ सकता है। शहर में विकल्प शून्य, ग्रामीण क्षेत्रों की दूरी बनी बाधा : वर्तमान में ब्यावर के पास जवाजा ब्लॉक की बोरवा पंचायत के भोजा ठाकुर का बाडिया में एक वरिष्ठ उपाध्याय स्कूल संचालित है। इसे अप्रैल 2025 में ही क्रमोन्नत किया गया था। हालांकि यह स्कूल ग्रामीण क्षेत्र में होने के कारण शहर के विद्यार्थी वहां तक नहीं पहुंच पाते। परिवहन और दूरी की समस्या के कारण मेधावी छात्र मजबूरी में संस्कृत विषय त्याग कर अन्य विषयों की ओर रुख कर रहे हैं। बोरवा ग्राम पंचायत स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय को 2021 में प्रवेशिका और फिर अप्रैल 2025 में वरिष्ठ उपाध्याय के रूप में क्रमोन्नत किया गया, लेकिन ब्यावर शहर के हृदय स्थल में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय कुंदन नगर लंबे समय से अपनी क्रमोन्नति की राह देख रहा है। ब्यावर मुख्यालय पर वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल खुलता है तो छात्रों को राहत मिलेगी। 8वीं कक्षा के बाद छात्रों को अन्यत्र अध्ययन के लिए नहीं जाना पड़ेगा। - बद्री प्रसाद शर्मा, वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत
सरकार ने ब्यावर को जिला तो बना दिया, लेकिन जिला मुख्यालय पर संस्कृत शिक्षा आज भी उपेक्षा का शिकार है। जिले में कुल 6 वरिष्ठ उपाध्याय स्कूल होने के बावजूद शहर में एक भी उच्च माध्यमिक स्तर का संस्कृत विद्यालय नहीं है। इससे आठवीं कक्षा के बाद छात्र संस्