टाइगर आने वाले हैं...
भास्कर न्यूज |पाली अरावली की कुंभलगढ़ पहाड़ियों में करीब पांच दशक बाद बाघ की दस्तक का रास्ता साफ हो गया है। राजस्थान सरकार ने प्रदेश के छठे टाइगर रिजर्व कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (कोर एरिया) के प्रस्ताव को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को भेज दिया है। अंतिम मंजूरी मिलते ही यहां बाघ छोड़े जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। प्रस्तावित टाइगर रिजर्व का सबसे बड़ा 52% हिस्सा पाली जिले में आता है। हालांकि रणकपुर, परशुराम महादेव, मुछाला महावीर को कोर एरिया से बाहर रखा गया है। कमेटी ने पाली, राजसमंद और ब्यावर में कोर एरिया के साथ अतिरिक्त जमीन को चिह्नित किया है। इसमें पाली जिले में 41988.225, राजसमंद में 4881.331 और ब्यावर में 9051.52 हेक्टेयर है। जवाई पहले ही पैंथर सफारी के लिए इंटरनेशनल मैप पर है। अब टाइगर भी आते हैं तो पर्यटन 2 से 3 गुना तक बढ़ेगा।
भास्कर न्यूज |पाली अरावली की कुंभलगढ़ पहाड़ियों में करीब पांच दशक बाद बाघ की दस्तक का रास्ता साफ हो गया है। राजस्थान सरकार ने प्रदेश के छठे टाइगर रिजर्व कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (कोर एरिया) के प्रस्ताव को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण
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प्रस्तावित टाइगर रिजर्व का सबसे बड़ा 52% हिस्सा पाली जिले में आता है। हालांकि रणकपुर, परशुराम महादेव, मुछाला महावीर को कोर एरिया से बाहर रखा गया है। कमेटी ने पाली, राजसमंद और ब्यावर में कोर एरिया के साथ अतिरिक्त जमीन को चिह्नित किया है। इसमें पाली जिले में 41988.225, राजसमंद में 4881.331 और ब्यावर में 9051.52 हेक्टेयर है। जवाई पहले ही पैंथर सफारी के लिए इंटरनेशनल मैप पर है। अब टाइगर भी आते हैं तो पर्यटन 2 से 3 गुना तक बढ़ेगा।