संत आदित्य सागर ने ब्यावर नसिया में किए दर्शन:प्राचीन शास्त्र देख हुए अभिभूत, जयकारों से गूंठ उठा मंदिर
दिगंबर जैन संत आदित्य सागर मुनि ने ब्यावर प्रवास के दौरान अजमेरी गेट स्थित सेठ चंपालाल रामस्वरूप की नसिया में भगवान के दर्शन किए। उनके आगमन पर मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा, जिससे धर्ममय वातावरण निर्मित हुआ। संत ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी प्रदान किया। नसिया में दर्शन से पूर्व, संत आदित्य सागर महाराज ने एक धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं को मानसिक शांति, संयमित जीवन और संतुलित सोच के लिए प्रेरणादायी मंत्र दिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शांत मन और सदाचार ही जीवन को सार्थक बनाते हैं। संत मंडल ने नसिया परिसर में सुरक्षित रखे वर्षों पुराने दुर्लभ शास्त्रों और अभिलेखों का सूक्ष्म अवलोकन किया। इन ऐतिहासिक धरोहरों को देखकर संत आदित्य सागर महाराज और उनके सहयोगी संत अत्यंत अभिभूत हुए। उन्होंने संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से इन शास्त्रों के इतिहास और महत्व की विस्तृत जानकारी भी प्राप्त की। इस अवसर पर संघ के वरिष्ठ श्रावक प्रकाश गादिया, नाकोड़ा तीर्थ से जुड़े प्रकाश जैन, गायक अशोक कोठारी, समाजसेवी अजय डोसी और डॉ. हर्षवर्धन भगत सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। संघ के प्रकाश गादिया ने बताया कि संत प्रवर आदित्य सागर महाराज ने नगर में अल्प प्रवास पूर्ण करने के बाद अपने सहयोगी संत अप्रमित सागर मुनि और संत सहजानंद मुनि के साथ पैदल ही बिजयनगर की ओर विहार किया। संत मंडल गुरुवार को बिजयनगर पहुंचेगा, जिसके बाद वे भीलवाड़ा के लिए प्रस्थान करेंगे। संत मंडल के ब्यावर प्रवास के दौरान नगर में धर्म, ध्यान और अध्यात्म का विशेष वातावरण बना रहा।
दिगंबर जैन संत आदित्य सागर मुनि ने ब्यावर प्रवास के दौरान अजमेरी गेट स्थित सेठ चंपालाल रामस्वरूप की नसिया में भगवान के दर्शन किए। उनके आगमन पर मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा, जिससे धर्ममय वातावरण निर्मित हुआ। संत ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी प्रदान
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नसिया में दर्शन से पूर्व, संत आदित्य सागर महाराज ने एक धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं को मानसिक शांति, संयमित जीवन और संतुलित सोच के लिए प्रेरणादायी मंत्र दिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शांत मन और सदाचार ही जीवन को सार्थक बनाते हैं।
संत मंडल ने नसिया परिसर में सुरक्षित रखे वर्षों पुराने दुर्लभ शास्त्रों और अभिलेखों का सूक्ष्म अवलोकन किया। इन ऐतिहासिक धरोहरों को देखकर संत आदित्य सागर महाराज और उनके सहयोगी संत अत्यंत अभिभूत हुए। उन्होंने संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से इन शास्त्रों के इतिहास और महत्व की विस्तृत जानकारी भी प्राप्त की। इस अवसर पर संघ के वरिष्ठ श्रावक प्रकाश गादिया, नाकोड़ा तीर्थ से जुड़े प्रकाश जैन, गायक अशोक कोठारी, समाजसेवी अजय डोसी और डॉ. हर्षवर्धन भगत सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।