अवैध वसूली करने पर कैफे ऑनर और तीन पुलिसकर्मी गिरफ्तार:दोस्त से रुपए ऐंठने के लिए बनाया था प्लान, धमकाकर गाड़ी में घुमाते रहे थे
जयपुर में अवैध वसूली के मामले में कैफे ऑनर और तीन पुलिसकर्मियों को गुरुवार रात गिरफ्तार किया गया है। कैफे ऑनर ने अपने दोस्त से पैसे लेने के लिए पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर प्लान बनाया था। प्लानिंग के तहत पुलिसवालों ने दोस्त को डरा-धमकाकर उससे रुपए मंगवाए थे। मामले में रुपए लेकर फरार आरोपी की तलाश कर रही है। डीसीपी (साउथ) राजर्षि राज ने बताया- अवैध वसूली मामले में आरोपी पवन कुमार गुर्जर (36) निवासी नदबई भरतपुर हाल रजत पथ मानसरोवर, बाबूलाल मीणा (40) निवासी श्यामपुरा चंदवाजी, कैलाश चन्द (37) निवासी श्रीमाधोपुर सीकर और अनिल कुमार रागेरा (38) निवासी बानूसर अलवर को अरेस्ट किया गया है। आरोपी पवन कुमार गुर्जर रजत पथ पर कैफे चलाता है। आरोपी बाबूलाल मीणा व अनिल कुमार रागेर मानसरोवर थाने में कॉन्स्टेबल और आरोपी कैलाश चन्द नारायण विहार थान का कॉन्स्टेबल है। अवैध वसूली में भूमिका मिलने पर चारों आरोपियों को गुरुवार रात गिरफ्तार किया गया था। रुपए लेकर भागे इनके साथी की तलाश में पुलिस टीम दबिश दे रही है। प्री-प्लान तरीके से पुलिसकर्मियों ने धमकाया मानसरोवर थाने में 31 दिसम्बर को परिवादी गोपाल सिंह गुर्जर ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में बताया था कि वह अपने दोस्त योगेश पटेल के साथ उसकी थार गाड़ी में भारत माता सर्किल वाली रोड पर घूम रहा था। वहां पुलिसकर्मियों ने गाड़ी रुकवाया और धमकाया कि तुम उल्टा-सीधा काम करते हो। जॉब से सस्पेंड करवा देंगे। वो रुपयों की डिमांड करने लगे। पुलिसकर्मियों ने योगेश को उसके हॉस्टल भेजकर छोटे भाई से पैसे मंगवाए। पुलिस वाले उसे अपनी गाड़ी में लेकर बैठे रहे। योगेश रुपए लेकर स्वर्ण गार्डन के सामने आया। तब दो पुलिसकर्मी उसे कहीं दूर लेकर चले गए। 20 मिनट बाद दोनों पुलिसवाले आकर बोले- हमें तेरे दोस्त ने कुछ नहीं दिया है। इसके बाद स्वर्ण पथ की तरफ घुमाकर वापस मेट्रो स्टेशन के पास लेकर खड़े हो गए। कुछ देर बाद कहा कि तेरे दोस्त योगेश से बात हो गई, हमें पैसे मिल गए। उसके बाद ऑटो रिक्शा में बैठाकर उसे छोड़ दिया। पैसों के लेन-देन का विवाद पुलिस जांच में सामने आया कि परिवादी गोपाल सिंह और उसके दोस्त योगेश पटेल के बीच पैसे के लेन-देन को लेकर झगड़ा चल रहा है। योगेश को पता था कि गोपाल के पास पैसे आए हुए है, जो पीजी हॉस्टल में रखे है। तब योगेश ने कैफे चलाने वाले अपने चचेरे भाई पवन कुमार गुर्जर के परिचित पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर प्लान बनाया। प्लानिंग के तहत योगेश खुद अपनी थार गाड़ी में बैठाकर परिवाद को घुमाने ले गया। नाटकीय तरीके से पीजी से पैसे लेकर फरार हो गया।