नागौर में ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी:ग्राम पंचायत बनाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, बोले-सरकारी ऑफिस में तालाबंदी करेंगे
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नागौर में ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी:ग्राम पंचायत बनाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, बोले-सरकारी ऑफिस में तालाबंदी करेंगे
SOURCE:Dainik Bhaskar Tech
नागौर जिले के ग्राम मांझवास को नई ग्राम पंचायत बनाने की मांग को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों ने अब उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी वाजिब मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो वे न केवल आगामी सरपंच और विधानसभा चुनावों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे, बल्कि गांव के तमाम सरकारी संस्थानों पर तालाबंदी कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। आबादी और भौगोलिक दूरी बनी मुख्य समस्या ग्रामीणों का कहना है कि मांझवास की आबादी 2011 की जनगणना के वक्त ही 1700 थी, जो वर्तमान में बढ़कर 3000 के पार पहुंच चुकी है। इसके बावजूद, गांव को स्वतंत्र पंचायत बनाने के बजाय झाड़िसरा जैसी दूरस्थ पंचायतों में शामिल किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को सरकारी कार्यों के लिए लंबी और कठिन दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों ने तर्क दिया है कि इतनी बड़ी आबादी और क्षेत्रफल होने के बाद भी नई पंचायत न बनाना उनके साथ अन्याय है। धार्मिक और पर्यटन महत्व की उपेक्षा का आरोप ज्ञापन में मांझवास के विशिष्ट ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को प्रमुखता से उठाया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां फुला बाई का भव्य दर्शन स्थल और महादेव का स्थान स्थित है, जो राजस्थान के पर्यटन मानचित्र पर भी अंकित है। हिंदुओं के इस प्रमुख तीर्थ स्थल पर साल भर देश के विभिन्न कोनों से साधु-संतों का आवागमन रहता है और तीन बड़े मेलों का आयोजन होता है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐतिहासिक स्थल होने के नाते जनआस्था को देखते हुए इसे स्वतंत्र पंचायत का दर्जा मिलना अनिवार्य है। सरकारी सर्वे पर सवाल और आंदोलन की चेतावनी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व में किया गया पंचायत सीमांकन का सर्वे त्रुटिपूर्ण था, जिसकी दोबारा निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि प्रशासन उनकी सुनवाई नहीं करता है, तो उन्हें कोई सरकारी सुविधा नहीं चाहिए। वे गांव के तीनों सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और पटवार खाने को बंद कर देंगे।
नागौर जिले के ग्राम मांझवास को नई ग्राम पंचायत बनाने की मांग को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों ने अब उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। जिला कलेक्टर को सौंपे गए एक विस्तृत ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी वाजिब मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो वे न केवल आगामी सरपंच और विधानसभा चुनावों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे, बल्कि गांव के तमाम सरकारी संस्थानों पर तालाबंदी कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। आबादी और भौगोलिक दूरी बनी मुख्य समस्या ग्रामीणों का कहना है कि मांझवास की आबादी 2011 की जनगणना के वक्त ही 1700 थी, जो वर्तमान में बढ़कर 3000 के पार पहुंच चुकी है। इसके बावजूद, गांव को स्वतंत्र पंचायत बनाने के बजाय झाड़िसरा जैसी दूरस्थ पंचायतों में शामिल किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को सरकारी कार्यों के लिए लंबी और कठिन दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों ने तर्क दिया है कि इतनी बड़ी आबादी और क्षेत्रफल होने के बाद भी नई पंचायत न बनाना उनके साथ अन्याय है। धार्मिक और पर्यटन महत्व की उपेक्षा का आरोप ज्ञापन में मांझवास के विशिष्ट ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को प्रमुखता से उठाया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां फुला बाई का भव्य दर्शन स्थल और महादेव का स्थान स्थित है, जो राजस्थान के पर्यटन मानचित्र पर भी अंकित है। हिंदुओं के इस प्रमुख तीर्थ स्थल पर साल भर देश के विभिन्न कोनों से साधु-संतों का आवागमन रहता है और तीन बड़े मेलों का आयोजन होता है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐतिहासिक स्थल होने के नाते जनआस्था को देखते हुए इसे स्वतंत्र पंचायत का दर्जा मिलना अनिवार्य है। सरकारी सर्वे पर सवाल और आंदोलन की चेतावनी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व में किया गया पंचायत सीमांकन का सर्वे त्रुटिपूर्ण था, जिसकी दोबारा निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि प्रशासन उनकी सुनवाई नहीं करता है, तो उन्हें कोई सरकारी सुविधा नहीं चाहिए। वे गांव के तीनों सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और पटवार खाने को बंद कर देंगे।