मशहूर न्यूरोसर्जन डॉ पाखमोडे की मौत बताती है कि ईसीजी सही होना ही सबकुछ नहीं
ईसीजी दिल की बीमारी की शुरुआती जांच का एक ज़रूरी हिस्सा है. यह एक्टिविटी दिल की बेसिक एनाटॉमी और इलेक्ट्रिकल कंडक्शन सिस्टम की समीक्षा करती है.
मशहूर न्यूरोसर्जन डॉ पाखमोडे की मौत बताती है कि ईसीजी सही होना ही सबकुछ नहीं

इमेज स्रोत, Imran Qureshi
इमेज कैप्शन, डॉक्टर चंद्रशेखर पाखमोडे नागपुर के मशहूर न्यूरोसर्जन थे (फ़ाइल फ़ोटो)
-
- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
- 8 जनवरी 2026
नागपुर के न्यूरोसर्जन डॉक्टर चंद्रशेखर पाखमोडे का बीते हफ़्ते अस्पताल ले जाने से पहले निधन हो गया.
महज 53 साल की उम्र में उनके अचानक निधन पर शोक जताने वालों में बड़ी संख्या में मरीज़ और मेडिकल क्षेत्र के लोग शामिल हैं.
उनके निधन पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी शोक व्यक्त किया.
डॉक्टर पाखमोडे ने तीन दिन पहले ही ईसीजी या इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम टेस्ट कराया था, जो नॉर्मल था.
हालाँकि हार्ट रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ईसीजी का सही होना हार्ट से जुड़ी बीमारियों का एकमात्र पैमाना नहीं है.
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
ईसीजी एक सामान्य टेस्ट है, जो हार्ट की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी की रिकॉर्डिंग होती है. इसकी मदद से डॉक्टर हार्ट रिद्म और इलेक्ट्रिक सिग्नल की जांच कर सकते हैं.
ईसीजी में इलेक्ट्रोड नाम के एक सेंसर को सीने और हाथ के आस-पास लगाया जाता है, जिसकी मदद से दिल की धड़कन से उत्पन्न होने वाले इलेक्ट्रिक सिग्नल का पता चल पाता है.
'ईसीजी एकमात्र ज़रिया नहीं'

इमेज स्रोत, Imran Qureshi
इमेज कैप्शन, डॉक्टर महेश फुलवानी के मुताबिक़ हृदय एक ऐसा अंग है जो गतिशील है, इसके अंदर कई गतिविधियां होती रहती हैं और ईसीजी उनका आकलन करने का एक तरीक़ा है
नागपुर के न्यूरॉन अस्पताल में डॉक्टर अनिल जवाहरानी ने डॉक्टर पाखमोडे का इलाज किया था.
डॉक्टर जवाहरानी हार्ट रोग विशेषज्ञ हैं और डॉक्टर पाखमोडे इनसे परामर्श लेते थे. डॉक्टर फुलवानी ने अपने दोस्त डॉक्टर पाखमोडे के साथ बुधवार सुबह निधन से पहले डिनर किया था.
उन्होंने बीबीसी हिन्दी को बताया, "ईसीजी हार्ट रोग का पता लगाने का एकमात्र ज़रिया नहीं है. 10 फ़ीसदी भी नहीं."
ईसीजी दिल की बीमारी की शुरुआती जांच का एक ज़रूरी हिस्सा है. यह एक्टिविटी दिल की बेसिक एनाटॉमी और इलेक्ट्रिकल कंडक्शन सिस्टम की समीक्षा करती है.

इमेज स्रोत, Imran Qureshi
इमेज कैप्शन, डॉक्टर अनिल जवाहरानी ने बताया डॉक्टर पाखमोडे काफी मेहनती व्यक्ति थे
किसी डॉक्टर को अगर किसी मरीज़ में दिल की बीमारी की आशंका नज़र आती है, तो वह ईसीजी टेस्ट का सुझाव देते हैं. ईसीजी टेस्ट एक नॉर्मल रेंज को दर्शाता है कि आपके हृदय में कोई समस्या है या नहीं.
श्री कृष्णा हृदयालय नागपुर के हार्ट रोग विशेषज्ञ और डायरेक्टर डॉक्टर महेश फुलवानी ने बीबीसी हिन्दी को बताया, "नॉर्मल ईसीजी से इस बात की गारंटी नहीं मिलती कि व्यक्ति कई घंटे, महीने या साल तक ज़िंदा रहेगा. हृदय एक ऐसा अंग है जो गतिशील है."
"इसके अंदर कई गतिविधियां होती रहती हैं और ईसीजी उनका आकलन करने का एक तरीक़ा है."
डॉक्टर पाखमोडे के साथ ऐसा क्यों हुआ?

इमेज स्रोत, Imran Qureshi
इमेज कैप्शन, डॉक्टर पाखमोडे शारीरिक तौर पर भी सक्रिय रहते थे और नियमित तौर पर एक्सरसाइज़ करते थे (फ़ाइल फ़ोटो)
डॉक्टर पाखमोडे के साथ ऐसा कैसे हुआ और क्यों हुआ? ये ऐसे सवाल हैं, जो सबसे ज़्यादा किए जा रहे हैं. इन सवालों के जवाब काफ़ी हद तक उनके निजी हार्ट रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जवाहरानी ने दिए हैं.
डॉक्टर जवाहरानी ने बताया, "वह बहुत मेहनती व्यक्ति थे. सुबह पाँच बजे उठते थे. जिम जाकर साइकिल चलाते थे और ट्रेडमिल करते थे. क़रीब 6 बजे वह अस्पताल में अपने राउंड शुरू करते थे."
सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक वो ऑपरेशन थिएटर में रहते थे. लंच करने के बाद वह शाम पाँच बजे ओपीडी में पहुंच जाते थे."
उन्होंने कहा, "ओपीडी में वह रात 11 बजे तक 150 या उससे ज़्यादा मरीज़ों को देखते थे. रात 11 बजे से 12 बजे के बीच खाना खाते थे और फिर सो जाते थे. बीते दो दशकों से ज़्यादा की प्रोफेशनल लाइफ़ में यही उनकी लाइफस्टाइल थी."
"वे अपने मरीज़ों के लिए भगवान के समान थे. यही बात किसी भी इंसान पर हमेशा बेहतर करने का दबाव बनाने के लिए काफ़ी है. ऐसा दबाव तनाव के कारण बनता है."
डॉक्टर फुलवानी ने डॉक्टर पाखमोडे के व्यक्तित्व का एक अलग पहलू बताया.
उन्होंने कहा, "रोज़मर्रा का तनाव समय के साथ बढ़ता जाता है. वो इतने प्यारे इंसान थे कि अपने किसी भी सहकर्मी को मना नहीं करते थे जो किसी मरीज़ को उनके पास जांच के लिए भेजते थे. वो सारा काम अपने ऊपर ले लेते थे. वो कम सोते थे और ज्यादा काम करते थे."
"असल में वह ज़्यादा काम के बोझ तले दबे हुए थे. वो काम के प्रति समर्पित थे. डॉक्टर पाखमोडे का निधन नहीं होना चाहिए था. उन्होंने मुझे कभी नहीं बताया कि ईसीजी करवाया था या तीन दिन पहले उन्हें सीने में दर्द हुआ था."
हार्ट रोग का मूल्यांकन कैसे किया जाता है?

इमेज स्रोत, Getty Images
इमेज कैप्शन, डॉक्टरों के मुताबिक़ ईसीजी से दिल की सेहत से जुड़ी एक सामान्य जानकारी मिल जाती है, लेकिन हर जानकारी नहीं मिलती (सांकेतिक तस्वीर)
डॉक्टर पाखमोडे ने अपनी ईसीजी रिपोर्ट पर डॉक्टर जवाहरानी से कोई चर्चा नहीं की. हालांकि, उन्होंने एक मरीज़ की तबीयत के बारे में उनसे बात की थी.
डॉक्टर जवाहरानी अफ़सोस जताते हुए कहते हैं, "काश उन्होंने अपनी रिपोर्ट के बारे में बात की होती. ये गड़बड़ हो गई."
डॉक्टर पाखमोडे की पत्नी एक प्रैक्टिसिंग एनेस्थेटिस्ट हैं. उनका सुबह करीब 5.15 बजे फोन आया कि पाखमोडे को सीने में दर्द हुआ है और वो बिस्तर पर गिर गए. घर और अस्पताल में उन्हें होश में लाने की कोशिशें काम नहीं कर पाईं.
डॉक्टर जवाहरानी ने कहा, "ईसीजी से पता चल जाता है कि दिल का दौरा जैसी कोई गंभीर समस्या तो नहीं है. 65 से 70 फ़ीसदी मरीज़ों में ईसीजी से इसके लक्षण दिख जाते हैं. लेकिन अगर दिल का दौरा मामूली हो तो शायद ईसीजी में इसका पता नहीं चलता."
"ऐसे में लगभग एक घंटे बाद दोबारा ईसीजी कराने का विकल्प होता है. लेकिन ईसीजी के साथ-साथ ब्लड टेस्ट और इमेजिंग भी करानी होगी."
दोनों डॉक्टरों ने इस बात की पुष्टि की कि दिल का दौरा पड़ने वाले कम से कम 65 फ़ीसदी लोगों को चेतावनी के संकेत मिलते हैं.
डॉक्टर फुलवानी ने कहा, "ये लक्षण हैं बेचैनी, पेट में गैस, डकार आना, पीठ और गले में दर्द, चलने में थकान, पैरों में अस्थिरता, सांस फूलना. ये लक्षण दिल का दौरा पड़ने से सात दिन पहले दिखाई दे सकते हैं."

इमेज स्रोत, Getty Images
डॉक्टर मरीज़ की उम्र, जेंडर, फैमिली हिस्ट्री, ब्लड प्रेशर या शरीर के हिस्सों में दर्द जैसे फैक्टर की जांच भी करते हैं.
डॉक्टर फुलवानी ने बताया, "अगर सीने में, कंधे में या पीठ में, दर्द दो दिनों से बना हुआ है, तो ट्रोपोनिन जैसे कार्डियक एंजाइम की जांच की जाती है. अगर मरीज़ को कुछ दिन पहले से दर्द हो रहा है, तो ट्रेड मिल टेस्ट (टीएमटी) किया जाता है."
"आख़िरी जांच सीटी एंजियोग्राफी या सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी होती है. ये सभी जांच यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती हैं कि कोई बीमारी न हो."
डॉक्टर फुलवानी कहते हैं, "सीधी बात यह है कि अपनी हेल्थ के आंकड़े जानें."
उनका मतलब है कि मरीज़ के शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा, ब्लड शुगर का लेवल और पेट की मोटाई (अंदर की चर्बी) का पता लगाएं.
पेट की चर्बी को कम करने के लिए हार्ट रोग विशेषज्ञ डायट और एक्सरसाइज़ की सलाह देते हैं.
डॉक्टर फुलवानी ने कहा, "कम वसा, कम कार्बोहाइड्रेट, ज़रूरी प्रोटीन और हर दिन 50 मिनट एक्सरसाइज. एक दिन छोड़कर जिम जाना, स्विमिंग करना, मांसपेशियों को मज़बूत करने वाले व्यायाम करना और तनाव कम करना. हार्ट रोग से बचने के लिए ये ज़रूरी शर्तें हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.