बीई और बीटेक: इंजीनियरिंग के इन दोनों कोर्स में क्या कोई फ़र्क़ होता है?
कई यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग कोर्स को बीई कहती हैं और कई संस्थान बीटेक. मगर इन दो अलग-अलग कोर्स के पीछे क्या लॉजिक होता है?
बीई और बीटेक: इंजीनियरिंग के इन दोनों कोर्स में क्या कोई फ़र्क़ होता है?

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इमेज कैप्शन, साल 2023-24 के एकेडमिक सेशन के दौरान 30 लाख 79 हज़ार से ज़्यादा स्टूडेंट्स ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला लिया (सांकेतिक तस्वीर)
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- Author, प्रियंका झा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- 5 जनवरी 2026
दीप्तिमान पूर्बे हैदराबाद में एक बड़ी कंपनी में इंजीनियरिंग मैनेजर हैं. वहीं, पंकज बिष्ट पुणे यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद नासिक में एक बड़ी टेक कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर हैं.
दोनों का काम कमोबेश एक सा है. दोनों कहलाते भी इंजीनियर हैं. दोनों की ब्रांच भी इलेक्ट्रिकल ही थी. मगर दोनों यहां तक पहुंचे अलग-अलग कोर्स के ज़रिए. एक ने बीटेक (B.Tech) चुना और दूसरे ने बीई (B.E).
ऐसे भी किसी ने साइंस फ़ील्ड से पढ़ाई की हो या नहीं, आगे चलकर इंजीनियरिंग की हो या नहीं मगर इससे जुड़े दो कोर्स के नाम ज़रूर सुने होंगे, बीई (B.E) और बीटेक (B.Tech).
मगर ये दो अलग-अलग कोर्स के पीछे क्या लॉजिक होता है? क्या सचमुच ये दोनों डिग्रियां एक सी हैं या पढ़ाई के तरीके, कोर्स के एप्रोच या इसके मक़सद में कोई फ़र्क होता है?
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करियर कनेक्ट सिरीज़ की इस कड़ी में यही कन्फ़्यूज़न दूर करने की कोशिश करेंगे दोनों कोर्सेज़ को पढ़ने और पढ़ाने वालों के ज़रिए.
क्या होता है अंतर?

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इमेज कैप्शन, जानकार कहते हैं कि आमतौर पर बीई और बीटेक कोर्स इस बात पर निर्भर है कि कौन सी यूनिवर्सिटी ये डिग्री दे रही है (सांकेतिक तस्वीर)
बीई यानी बैचलर्स ऑफ़ इंजीनियरिंग और बीटेक यानी बैचलर्स ऑफ़ टेक्नोलॉजी. ये तो सबको मालूम है.
लेकिन बीटेक से ये बस इस मायने में अलग है कि इसमें प्रैक्टिकल की बजाय थियोरिटिकल नॉलेज पर ज़्यादा फ़ोकस होता है.
आईआईटी कानपुर के प्रोफ़ेसर शलभ स्टैस्टिक्स और डेटा साइंस में जाना-माना नाम हैं. वह कहते हैं कि बीई और बीटेक को ऐसे ही समझ लीजिए कि बीई पहले इस्तेमाल होने वाली टर्मिनोलॉजी थी जिसे अब भी कुछ संस्थान इस्तेमाल कर रहे हैं. मगर पढ़ाई में कोई फ़र्क नहीं रह गया है और न ही इसमें दाख़िला लेने वालों के लिए पात्रता की शर्तें ही अलग हैं.
दीप्तिमान पूर्बे इन दिनों ऊबर कंपनी में इंजीनियरिंग मैनेजर हैं. इसके साथ वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी यानी IIIT ग्वालियर में गेस्ट फ़ैकल्टी के तौर पर पढ़ाने भी जाते हैं.
उन्होंने बताया, "पहले ऐसा था कि बीई को नॉलेज ओरिएंटेड कोर्स समझा जाता था. जिसमें फ़ोकस थियोरेटिकल प्रिंसिपल्स पर होता था. यानी चीज़ें क्यों काम करती हैं. जबकि बीटेक को ज़्यादा प्रैक्टिकल और स्किल-ओरिएंटेड माना जाता है, जिसमें ये सिखाया जाता है कि चीज़ें कैसे काम करती हैं."
पंकज बिष्ट जियो में असिस्टेंट मैनेजर हैं. उन्होंने साल 2014 में बीई किया था.
वह भी यही कहते हैं कि भारत में बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग और बैचलर ऑफ़ टेक्नोलॉजी, दोनों ही बराबर माने जाते हैं.
उनका कहना है, "बीई का करिकुलम थोड़ा ट्रेडिशनल है और ये कोर्स अक्सर पुरानी यूनिवर्सिटी में चलता है. इसमें फंडामेंटल्स यानी बुनियादी चीज़ों पर थोड़ा ज़्यादा फ़ोकस रहता है. जबकि बीटेक का सिलेबस अपडेटेड है. इसमें लैब, प्रोजेक्ट्स और इंटर्नशिप पर फ़ोकस ज़्यादा है. आईआईटी, एनआईटी और प्राइवेट कॉलेजों में बीटेक ही करवाया जाता है."

फिर क्यों हैं अलग-अलग नाम?
भारत में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाने वाले सभी टेक्निकल संस्थानों की निगरानी ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन यानी AICTE करती है.
एआईसीटीई के मुताबिक़, भारत में साल 2023-24 के बीच कुछ 8 हज़ार 264 संस्थान ऐसे थे जो डिप्लोमा, अंडरग्रैजुएट और पोस्ट ग्रैजुएट लेवल पर इंजीनियरिंग कोर्सेज़ चला रहे हैं. मगर 2024-25 में इस सूची में 211 इंस्टीट्यूट और जुड़े.
साल 2023-24 के एकेडमिक सेशन के दौरान 30 लाख 79 हज़ार से ज़्यादा स्टूडेंट्स ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला लिया. साल 2025 की IIRF रैंकिंग (इंडियन इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ़्रेमवर्क) के मुताबिक़, भारत में टॉप इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी बॉम्बे है.
लेकिन प्राइवेट यूनिवर्सिटी के तहत चलने वाले टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों में सबसे ऊपर बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (BITS PILANI) रहा. जो उन संस्थानों में भी है जहां बीई की डिग्री दी जाती है.
इसके अलावा कोलकाता की जाधवपुर यूनिवर्सिटी, चेन्नई की अन्ना यूनिवर्सिटी, हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु का आरवी कॉलेज, पुणे यूनिवर्सिटी, मुंबई यूनिवर्सिटी भी उन संस्थानों में है जो इंजीनियरिंग करने वालों को बीई की डिग्री देते हैं.
जानकार कहते हैं कि आमतौर पर बीई और बीटेक कोर्स इस बात पर निर्भर है कि कौन सी यूनिवर्सिटी ये डिग्री दे रही है. क्योंकि कई पुरानी यूनिवर्सिटी इस कोर्स को बीई कहती हैं और टेक्निकल संस्थान बीटेक.
मगर सिर्फ़ नाम के आधार पर पढ़ाई की क्वॉलिटी में कोई ख़ास फ़र्फ़ नहीं होता.
दोनों ही चार साल के कोर्स हैं और दोनों में एडमिशन के लिए एलिजिबिलिटी यानी पात्रता भी एक सी ही होनी चाहिए.
यानी बारहवीं में फिज़िक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स होनी चाहिए और उसके बाद इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली एंट्रेंस परीक्षा यानी जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड को क्लीयर करना होता है.
दीप्तिमान पूर्बे कहते हैं कि दोनों कोर्स के कोर सब्जेक्ट भी एक से होते हैं. यानी वे सब्जेक्ट जो इंजीनियरिंग की एक ब्रांच को दूसरी ब्रांच से अलग बनाते हैं.
जैसे:
- पहले साल में जो सब्जेक्ट होते हैं वे हैं: मैथमैटिक्स, इंजीनियरिंग फिज़िक्स, इंजीनियरिंग केमिस्ट्री, इंजीनियरिंग मेकैनिक्स और बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स. ये वे विषय हैं जो सभी ब्रांच के स्टूडेंट्स को पढ़ने होते हैं.
- फिर दूसरे से चौथे साल तक कुछ प्रमुख ब्रांचों के विषय होते हैं:
- कम्प्यूटर साइंस: डेटा स्ट्रक्चर्स, एल्गोरिद्म, ऑपरेटिंग सिस्टम, डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम यानी DBMS.
- मेकैनिकल: थर्मोडायनैमिक्स, फ्लूइड मेकैनिक्स, किनेमैटिक्स ऑफ़ मशीन.
- इलेक्ट्रिकल: सर्किट थ्योरी, कंट्रोल सिस्टम, पावर सिस्टम.
कौन सा कोर्स किसके लिए सही?

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इमेज कैप्शन, इंजीनियरिंग कोर्स में दाख़िला लेने से पहले स्टूडेंट्स को कुछ बिंदुओं पर ग़ौर करना ज़रूरी है (सांकेतिक तस्वीर)
दीप्तिमान पूर्बे के मुताबिक़ असल दुनिया में बीई और बीटेक के बीच जो फ़र्क़ था वह मिट चुका है. अब दोनों ही कोर्स के बाद मिलने वाली करियर अपॉर्च्युनिटीज़ में कोई अंतर नहीं है.
ऐसा नहीं है कि कोई कोर्स दूसरे से उन्नीस या बीस है. बल्कि मास्टर्स या एमबीए के लिए अप्लाई करते समय भी दोनों ही कोर्स के नाम साथ में लिखे होते हैं. इसलिए दोनों कोर्स एक जैसी वैल्यू रखते हैं.
लेकिन वो ऐसे कुछ बिंदु गिनाते हैं जिनपर दाख़िला लेने से पहले स्टूडेंट्स को ग़ौर करना ज़रूरी है.
वह कहते हैं:
- किसी भी स्टूडेंट को डिग्री के नाम पर कोर्स नहीं चुनना चाहिए. बल्कि चुनाव का आधार ये होना चाहिए कि ये किस यूनिवर्सिटी में मिल रहा है और ब्रांच क्या मिलेगी.
- हमेशा ये ध्यान रखें कि संस्थान का इन्फ़्रास्ट्रक्चर कैसा है, वहां की फ़ैकल्टी किस तरह की है, प्लेसमेंट कैसी है, रिसर्च एक्सपीरिएंस कैसा है और जो कोर्स आप चुन रहे हैं, वहां कैसा माहौल है.
- अगर किसी के पास ये विकल्प है कि उन्हें B.E. और B.Tech दोनों में एक जैसी ब्रांच मिल रही है, तो फिर उन्हें एक जैसा कोर्स समझकर, बाकी के सभी फ़ैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें.
क्या फ़्यूचर ग्रोथ में है अंतर?

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इमेज कैप्शन, जानकारों का कहना है कि कंपनियां बीई और बीटेक वालों को समान मौक़े देती हैं (सांकेतिक तस्वीर)
जानकारों की मानें तो वैकेंसी चाहे सॉफ़्टवेयर इंजीनियर के लिए हो, सिविल इंजीनियर के लिए हो या फिर किसी डेटा एनालिस्ट या दूसरे ब्रांच के इंजीनियर की ही क्यों न हो. जॉब डिस्क्रिप्शन में हमेशा रिक्वॉयरमेंट में B.E/B.Tech ही लिखा होता है.
न ही दोनों के सैलरी पैकेज में कोई फ़र्क है. बल्कि सैलरी पूरी तरह से इसपर निर्भर है कि किसी का इंटरव्यू कैसा गया है, किसी की प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स कैसी हैं या नौकरी किस पद के लिए है. इन सब पर डिग्री का असर 'ज़ीरो' है.
पंकज बिष्ट का कहना है, "आज की तारीख़ में ट्रेंड बीई या बीटेक से तय नहीं होता बल्कि इससे होता है कि आपकी ब्रांच क्या है. आज अगर मार्केट में आईटी सेक्टर यानी इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी बूम पर है तो फिर एडमिशन लेते समय यही दिमाग़ में रहना चाहिए कि ये ब्रांच मिल जाए. अगर मैकेनिकल का बूम है तो फिर उसका सोचना चाहिए. मार्केट के हिसाब से ब्रांच ज़रूरी है."
वह बताते हैं कि आमतौर पर किसी भी कंपनी का कोई ऐसा क्राइटेरिया नहीं है कि किसी पोस्ट पर बीई या बीटेक वाले को ही रखना है.
उन्होंने कहा, "अभी तक मैंने चार कंपनियां बदली हैं. आप बीई हों या बीटेक. अगर आपके पास वो स्किल्स हैं जिनकी ज़रूरत है, तो फिर कंपनी आपको लेगी. ऐसा नहीं होता कि जिस पोज़िशन के लिए बीटेक वाले अप्लाई कर सकते हैं, उसके लिए बीई वाले न कर पाएं."
वहीं दीप्तिमान फ़्यूचर ग्रोथ के लिहाज़ से कुछ अन्य बातों पर ध्यान दिलाते हैं. जैसे:
- आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के दौर में इंडस्ट्री डिग्री की बजाय स्किल्स पर ज़्यादा ध्यान दे रही है.
- अभी तक के ट्रेंड ये इशारा करते हैं कि अब कंपनियां मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, न्यूरल नेटवर्क्स जैसी स्पेशलाइज़्ड स्किल्स की ओर रुख़ कर रही हैं.
- इसलिए किसी के पास बीई की डिग्री हो या बीटेक की, करियर ग्रोथ पूरी तरह से कैंडिडेट के पोर्टफ़ोलियो, कोडिंग स्किल्स और मैथमैटिकल अंडरस्टैंडिंग पर निर्भर है.
आख़िर में वह कहते हैं कि बीई और बीटेक के बीच फ़र्क की चर्चा पूरी तरह से एकेडमिक है. हक़ीक़त ये है कि ये एक मंज़िल तक ले जाने वाले दो रास्ते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित