धौलपुर में तापमान गिरा, फसलों पर पाले का खतरा:किसान अपनाएं बचाव के ये खास उपाय
धौलपुर में तापमान में गिरावट के कारण पाला पड़ने की आशंका बढ़ गई है। आसमान साफ होने और हवा न चलने की स्थिति में रात 12 बजे के बाद पाला पड़ने की संभावना रहती है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों को बचाने के लिए तत्काल उपाय करने की सलाह दी गई है। संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार जिला परिषद प्रभुदयाल शर्मा ने बताया कि पाले की आशंका होने पर खेत में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। गीली मिट्टी सूखी मिट्टी की तुलना में सूरज की गर्मी को अधिक समय तक रोक कर रखती है। इससे खेत का तापमान बाहरी वातावरण से 2-3 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है, जो फसल को पाले से बचाता है। रात के समय खेत की मेड़ों पर कचरा, सूखी घास या भूसा जलाकर धुआं करना भी एक प्रभावी उपाय है। यह धुआं खेत के ऊपर एक सुरक्षा कवच बना लेता है, जो जमीन की गर्मी को अंतरिक्ष में जाने से रोकता है। धुआं अक्सर उत्तर-पश्चिम दिशा में करना चाहिए ताकि यह पूरे खेत में फैल सके। शर्मा ने बताया कि व्यापारिक गंधक के अम्ल (सल्फ्यूरिक एसिड) का 0.1 प्रतिशत घोल, यानी एक हजार लीटर पानी में एक लीटर अम्ल मिलाकर खेत में छिड़काव करना चाहिए। यह छिड़काव फसल का आंतरिक तापमान 10-15 दिनों तक बनाए रखने में मदद करता है। यदि व्यापारिक गंधक का अम्ल उपलब्ध न हो, तो घुलनशील सल्फर 80 प्रतिशत डब्ल्यूपी को 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। जिन किसानों ने बुवाई के समय सल्फर या जिप्सम का प्रयोग किया है, उन्हें पाले से बचाव के विशेष उपायों की आवश्यकता नहीं होगी। उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली ठंडी हवाओं से छोटे पौधों या नर्सरी को बचाने के लिए इस दिशा में घास-फूस की टाटी या पर्दा बांध देना चाहिए। छोटे पौधों को प्लास्टिक मल्च या पुआल से भी ढका जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि फसल पर पाले का असर हो गया हो, तो धूप निकलने पर एनपीके 19:19:19 खाद का एक किलोग्राम घोल 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करने से फसल को नुकसान से उबरने में मदद मिलेगी। फूल और दाने बनने की अवस्था में सरसों, टमाटर, बैंगन, मिर्च, अरहर और आलू की फसलें पाले से सबसे अधिक प्रभावित होती हैं, इसलिए इन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
धौलपुर में तापमान में गिरावट के कारण पाला पड़ने की आशंका बढ़ गई है। आसमान साफ होने और हवा न चलने की स्थिति में रात 12 बजे के बाद पाला पड़ने की संभावना रहती है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों को बचाने के लिए तत्काल उपाय करने की सलाह दी गई है।