प्रगतिशील किसान:बंजर जमीन पर जैविक कार्बन बढ़ाने के लिए की ढेंचे की बुवाई
जालोर जिले के अनखोल गांव निवासी युवा किसान धनराज भंवरलाल राजपुरोहित ने अपने खेत में पैदावार बढ़ाने, जमीन का जैविक कार्बन बढ़ाने व खाद के लिए ढेंचा बोया। जैविक कार्बन से जमीन में नमी बनी रहती है। अब वह जीरा-सरसों सहित दूसरी फसलें ले पा रहे हैं। उत्पादन अच्छा हो रहा है और कीटनाशक दवाइयों का खर्चा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष दो हेक्टेयर में सहजन की खेती भी करूंगा। भूमि क्षारीय के साथ-साथ बंजर होने लगी थी। इसका समाधान ढूंढने पर हरी खाद ढेंचा बोने का निर्णय लिया। मगर बीज नहीं था तो सुमेरपुर मंडी से मंगवाया। पहली बारिश होते ही 1 बीघा में बोया। 2 महीने में इसकी फसल तैयार हो गई। फिर इसे रोटोवेटर से मिट्टी में मिला दिया। इससे यह सड़कर खाद बन गया। इसी जमीन पर रबी में जीरा की बुवाई की। जीरे में कोई रोग भी नहीं लगा और उत्पादन भी ज्यादा मिला। आमतौर पर हमारे क्षेत्र में 1 बीघा में 4-5 बोरी जीरा होता है लेकिन हमारे खेत में 9 बोरी हुआ। दूसरे साल 4 बीघा में ढेंचा बोया। उसमें अभी सरसों बोया हुआ है। आसपास के गांवों के किसानों को भी बताया है कि ढेंचा से खाद बनाकर कम लागत में अच्छी फसल ली जा सकती है। किसान इसे अपनाएंगे तो यूरिया डालने की जरूरत नहीं रहेगी। हरी खाद के साथ गोमूत्र का छिड़काव भी कर रहे हैं। आसपास के 50 गांवों में पहली बार इसका प्रयोग किया है। यहां एक ही पानी देने पर बढ़िया उग गया।
जालोर जिले के अनखोल गांव निवासी युवा किसान धनराज भंवरलाल राजपुरोहित ने अपने खेत में पैदावार बढ़ाने, जमीन का जैविक कार्बन बढ़ाने व खाद के लिए ढेंचा बोया। जैविक कार्बन से जमीन में नमी बनी रहती है। अब वह जीरा-सरसों सहित दूसरी फसलें ले पा रहे हैं।
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भूमि क्षारीय के साथ-साथ बंजर होने लगी थी। इसका समाधान ढूंढने पर हरी खाद ढेंचा बोने का निर्णय लिया। मगर बीज नहीं था तो सुमेरपुर मंडी से मंगवाया। पहली बारिश होते ही 1 बीघा में बोया। 2 महीने में इसकी फसल तैयार हो गई। फिर इसे रोटोवेटर से मिट्टी में मिला दिया। इससे यह सड़कर खाद बन गया। इसी जमीन पर रबी में जीरा की बुवाई की। जीरे में कोई रोग भी नहीं लगा और उत्पादन भी ज्यादा मिला।
आमतौर पर हमारे क्षेत्र में 1 बीघा में 4-5 बोरी जीरा होता है लेकिन हमारे खेत में 9 बोरी हुआ। दूसरे साल 4 बीघा में ढेंचा बोया। उसमें अभी सरसों बोया हुआ है। आसपास के गांवों के किसानों को भी बताया है कि ढेंचा से खाद बनाकर कम लागत में अच्छी फसल ली जा सकती है। किसान इसे अपनाएंगे तो यूरिया डालने की जरूरत नहीं रहेगी। हरी खाद के साथ गोमूत्र का छिड़काव भी कर रहे हैं। आसपास के 50 गांवों में पहली बार इसका प्रयोग किया है। यहां एक ही पानी देने पर बढ़िया उग गया।