'बांग्लादेश की घटना पर सरकार उचित कदम उठाए':देवनानी बोले-लोकतंत्र और संविधान को खतरा बताने वाले बांग्लादेश पर चुप, भारत मूकदर्शक नहीं रह सकता
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने आज कोटा में वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) में 'बांग्लादेश में मानवाधिकार एवं लोकतंत्र' विषय पर व्याख्यान दिया। मीडिया से बातचीत में वासुदेव देवनानी ने कहा कि बांग्लादेश के निर्माण में भारत की अहम भूमिका रही है, लेकिन आज वहां की हालत बेहद खराब हैं।इन परिस्थितियों में भारत को चुप नहीं रहना चाहिए। इसके लिए भारत सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए। साथ ही मानवाधिकार संगठनों को भी आवाज उठानी चाहिए। लेकिन हैरानी की बात है कि ये संगठन और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश अमेरिका भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कई लोग ऐसे हैं जो थोड़ी सी, छोटी मोटी घटना होते बहुत बड़े स्टेटमेंट जारी करते हैं। पर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के मुद्दे पर चुप हैं। हम सभी, भारत सरकार के साथ मिलकर के बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों की रक्षा करें और सरकार इस मामले में उचित कदम उठाएं। भारत बहुत समय तक मूकदर्शक बनकर नही रह सकता। बांग्लादेश के निर्माण में भारत की अहम भूमिका,हमें चुप नहीं रहना चाहिए देवनानी ने इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि आजादी के समय पश्चिम और पूर्वी पाकिस्तान बने थे, जहां पश्चिमी पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिस्तान का शोषण किया। भाषा और अन्याय के खिलाफ आंदोलन चला, जिससे बांग्लादेश का जन्म हुआ ताकि लोकतांत्रिक तरीके से न्याय मिल सके। लेकिन पिछले एक साल से वहां कुछ अतिवादी तत्वों ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कुचल दिया है। अल्पसंख्यक हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं—उनके घर जलाए जा रहे हैं, उन्हें जलाया जा रहा है। भारत पड़ोसी देश है और बांग्लादेश के जन्म में सहायक रहा, इसलिए हमें चुप नहीं रहना चाहिए। छोटी-छोटी घटनाओं पर स्टेटमेंट जारी करने वाले बांग्लादेश पर चुप उन्होंने आगे कहा कि भारत में कई लोग छोटी-मोटी घटनाओं पर बड़े-बड़े बयान देते हैं, लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर सन्नाटा पसरा है। हम सभी को मिलकर बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों की रक्षा करनी चाहिए और सरकार को इस दिशा में कदम उठाने चाहिए। देवनानी ने उन संगठनों पर अफसोस जताया जो छोटी बातों पर लोकतंत्र और संविधान को खतरे में बताते हैं, लेकिन असली खतरे पर खामोश रहते हैं। मुझे देश के ऐसे संगठनों पर तरस आता है जो छोटी-छोटी बातों, घटनाओं पर हल्ला मचाएंगे, लोकतंत्र को खतरा है, संविधान को खतरा है। लेकिन जहां लोकतंत्र को खतरा है उसके लिए नहीं बोलेंगे। केवल वोटों की राजनीति और समुदाय के तुष्टिकरण नाते यदि हम चुप रहेंगे। तो आप लोकतंत्र के पक्षधर नहीं कहलाओगे।