राजसमंद कलेक्टर के घर पहुंचे जैन मुनि, प्रवचन दिया:बोले- हमारे आचरण से किसी को ठेस न पहुंचे; प्रशासनिक अधिकारी भी आए
राजसमंद में आज जैन मुनि संबोध कुमार कलेक्टर अरूण कुमार हसीजा के राजकीय आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने आध्यात्मिक प्रवचन दिया। मुनि के आगमन पर कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा के परिवार सहित प्रशासनिक अधिकारियों व स्थानीय नागरिकों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर कलेक्टर ने स्वयं को इस पुण्य अवसर का निमित्त बताते हुए मुनिश्री के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रवचन के दौरान मुनि संबोध कुमार ने हाल ही में जिले में घटित घटनाक्रमों के दौरान शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने में कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा की भूमिका की सराहना की। मुनिश्री ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में कलेक्टर डगमगाए नहीं, संयम और स्थिरता के साथ कार्य किया व विनम्रता से सभी को साथ लेकर चले। शांति व्यवस्था बनाए रखने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। मुनिश्री ने अपने प्रवचन में सेवा, सद्भाव, संस्कार, अहिंसा और तनावमुक्त जीवन का व्यापक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन का मूल उद्देश्य यह है कि हमारे आचरण से किसी भी व्यक्ति या समाज को ठेस न पहुंचे। जीवन की सच्ची सफलता संवेदनशीलता, संयम और सह-अस्तित्व से मापी जाती है। प्रवचन के अंत में उपस्थितजनों ने मुनिश्री के विचारों को प्रेरणादायक बताया।
जैन मुनि संबोध कुमार ने कलेक्टर निवास पर दिया प्रवचन। कलेक्टर के राजकीय आवास पर पहुंचने पर कलेक्टर ने किया स्वागत।
राजसमंद में आज जैन मुनि संबोध कुमार कलेक्टर अरूण कुमार हसीजा के राजकीय आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने आध्यात्मिक प्रवचन दिया। मुनि के आगमन पर कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा के परिवार सहित प्रशासनिक अधिकारियों व स्थानीय नागरिकों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर
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प्रवचन के दौरान मुनि संबोध कुमार ने हाल ही में जिले में घटित घटनाक्रमों के दौरान शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने में कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा की भूमिका की सराहना की। मुनिश्री ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में कलेक्टर डगमगाए नहीं, संयम और स्थिरता के साथ कार्य किया व विनम्रता से सभी को साथ लेकर चले। शांति व्यवस्था बनाए रखने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
मुनिश्री ने अपने प्रवचन में सेवा, सद्भाव, संस्कार, अहिंसा और तनावमुक्त जीवन का व्यापक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन का मूल उद्देश्य यह है कि हमारे आचरण से किसी भी व्यक्ति या समाज को ठेस न पहुंचे। जीवन की सच्ची सफलता संवेदनशीलता, संयम और सह-अस्तित्व से मापी जाती है। प्रवचन के अंत में उपस्थितजनों ने मुनिश्री के विचारों को प्रेरणादायक बताया।