शराब नहीं दूध से की नए साल की शुरुआत:नशे से दूर रहने और भारतीय संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया
सांगानेर के कपूरवाला क्षेत्र में नए साल का स्वागत अलग अंदाज में किया गया। यहां गौ माता के सेवकों ने समाज को सकारात्मक संदेश देते हुए शराब की जगह दूध और जलेबी से नए साल का जश्न मनाया। गौ सेवकों ने गौ माता की सेवा को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्रवासियों के बीच दूध और जलेबी का वितरण किया। इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रहने और भारतीय संस्कृति व संस्कारों से जुड़ने का संदेश देना था। कार्यक्रम के दौरान गौ माता की पूजा-अर्चना भी की गई और सभी ने गौ सेवा के संकल्प लिए। गौ सेवकों का कहना था कि नया साल केवल मनोरंजन तक सीमित न होकर समाज के लिए कुछ अच्छा करने का अवसर होना चाहिए। शराब जैसे नशे से समाज को नुकसान होता है, जबकि दूध जैसे सात्विक पदार्थ स्वास्थ्य और संस्कार दोनों को मजबूत करते हैं। स्थानीय लोग भी हिस्सा बने इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और इस पहल की सराहना की। कई युवाओं ने इसे एक नई सोच और समाज को सही दिशा देने वाला कदम बताया। आयोजन शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। कपूरवाला सांगानेर की यह पहल न केवल नए साल के जश्न को एक नई पहचान देती है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा भी देती है। गौ सेवा और नशामुक्त समाज की दिशा में यह कदम आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
सांगानेर के कपूरवाला क्षेत्र में नए साल का स्वागत अलग अंदाज में किया गया। यहां गौ माता के सेवकों ने समाज को सकारात्मक संदेश देते हुए शराब की जगह दूध और जलेबी से नए साल का जश्न मनाया।
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गौ सेवकों ने गौ माता की सेवा को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्रवासियों के बीच दूध और जलेबी का वितरण किया। इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रहने और भारतीय संस्कृति व संस्कारों से जुड़ने का संदेश देना था। कार्यक्रम के दौरान गौ माता की पूजा-अर्चना भी की गई और सभी ने गौ सेवा के संकल्प लिए।
गौ सेवकों का कहना था कि नया साल केवल मनोरंजन तक सीमित न होकर समाज के लिए कुछ अच्छा करने का अवसर होना चाहिए। शराब जैसे नशे से समाज को नुकसान होता है, जबकि दूध जैसे सात्विक पदार्थ स्वास्थ्य और संस्कार दोनों को मजबूत करते हैं।
स्थानीय लोग भी हिस्सा बने
इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और इस पहल की सराहना की। कई युवाओं ने इसे एक नई सोच और समाज को सही दिशा देने वाला कदम बताया। आयोजन शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।
कपूरवाला सांगानेर की यह पहल न केवल नए साल के जश्न को एक नई पहचान देती है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा भी देती है। गौ सेवा और नशामुक्त समाज की दिशा में यह कदम आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।