छोटी-छोटी बातों को लेकर परिवार टूट रहे:बिखरते रिश्तों पर जैन मुनि देंगे प्रवचन; बोले- सहनशीलता खत्म हो रही
सवाई माधोपुर में रविवार को टूटते रिश्ते बिखरते परिवार पर एक चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसे लेकर आज मंडी रोड़ आवासन मंडल स्थित श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा भवन पर जैन श्वेतांबर मुनि अर्हत कुमार स्वामी ने प्रेसवार्ता आयोजित कर यह कार्यक्रम की जानकारी दी। ईगो के चलते टूट रहे परिवार जैन मुनि ने कहा कि वर्तमान में हमारे भारत देश में ना सिर्फ समाज बल्कि परिवारों में भी विघटन हो रहा है। आज ईगो के चलते छोटी छोटी बातों को लेकर परिवार टूट रहे हैं। उन्होंने बताया कि परिवार टूटने का सबसे बड़ा कारण हमारी संस्कृति पर पश्चिमी संस्कृति का हावी होना है। हम हमारे बच्चो को आज वो संस्कार नही दे पा रहे हैं जो हमारे बड़े बुजुर्ग हमें देकर गए हैं। छोटी-छोटी बातों पर आत्महत्या कर रहे जैन मुनि ने कहा कि आज हम आधुनिकता की दौड़ में इस कदर व्यस्त हो गए कि अपने परिवार को ना समय दे पा रहे हैं और ना अपने बच्चो को संस्कार दे पा रहे हैं। जिसके कारण आज समाज के हर वर्ग में परिवारों में विघटन हो रहा है और रिश्ते टूट रहे हैं। आज समाज मे देखने को मिल रहा है कि छोटी-छोटी बात पर लोग आत्महत्या कर रहे हैं। सहनशीलता खत्म हो रही जैन मुनि ने कहा कि लोगों मे सहनशीलता खत्म होती जा रही है। मामूली पारिवारिक विवाद पर पति पत्नी के बीच तलाक हो रहे हैं। परिवार के लोगो मे तालमेल का अभाव नजर आ रहा और ओर हमारे रिश्ते बिखर रहे हैं। जिसके चलते यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम आलनपुर स्थित एक मैरिज गार्डन रविवार सुबह 9.00 बजे से 11.30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। जिसमें करीब एक हजार से ज्यादा लोग आएंगे।
सवाई माधोपुर में रविवार को टूटते रिश्ते बिखरते परिवार पर एक चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
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इसे लेकर आज मंडी रोड़ आवासन मंडल स्थित श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा भवन पर जैन श्वेतांबर मुनि अर्हत कुमार स्वामी ने प्रेसवार्ता आयोजित कर यह कार्यक्रम की जानकारी दी।
ईगो के चलते टूट रहे परिवार
जैन मुनि ने कहा कि वर्तमान में हमारे भारत देश में ना सिर्फ समाज बल्कि परिवारों में भी विघटन हो रहा है। आज ईगो के चलते छोटी छोटी बातों को लेकर परिवार टूट रहे हैं। उन्होंने बताया कि परिवार टूटने का सबसे बड़ा कारण हमारी संस्कृति पर पश्चिमी संस्कृति का हावी होना है। हम हमारे बच्चो को आज वो संस्कार नही दे पा रहे हैं जो हमारे बड़े बुजुर्ग हमें देकर गए हैं।