पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच 'मंदिर राजनीति' का चुनाव पर क्या असर होगा?
SOURCE:BBC Hindi
'मंदिर' राजनीति के बीच बाबरी मस्जिद का मुद्दा भी बंगाल की राजनीति में उभरा है. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि जहां एक ओर टीएमसी हिंदू मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं अल्पसंख्यक वोट बैंक को भी संदेश दिया जा रहा है.
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच 'मंदिर राजनीति' का चुनाव पर क्या असर होगा?
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इमेज कैप्शन, पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं
Author, इल्मा हसन
पदनाम, बीबीसी संवाददाता
एक घंटा पहले
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर राजनीति एक बार फिर तेज़ होती दिख रही है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार के मंदिर और सांस्कृतिक परिसरों से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स की घोषणाओं ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच सियासी टकराव को और गहरा कर दिया है.
30 दिसंबर को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में 'दुर्गा आंगन' नामक सांस्कृतिक परिसर की आधारशिला रखी. यह परियोजना दुर्गा पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मिली मान्यता के सम्मान से जोड़ी जा रही है.
राज्य सरकार के मुताबिक, 17 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बनने वाले इस परिसर में दुर्गा मंदिर के साथ शिव, गणेश, कार्तिक, सरस्वती और लक्ष्मी के मंदिर भी होंगे. इस परियोजना पर लगभग 262 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
ममता बनर्जी ने इस मौके पर कहा, "दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, यह बंगाल की संस्कृति और विरासत का हिस्सा है. इसे संरक्षित करना हमारी ज़िम्मेदारी है."
बीजेपी ने इस परियोजना को चुनावी तुष्टिकरण करार दिया है. बीजेपी नेताओं का आरोप है कि टीएमसी चुनाव से पहले हिंदू भावनाओं को साधने की कोशिश कर रही है.
पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, "ममता बनर्जी की 'दुर्गा आंगन' परियोजना उनकी राजनीति की तरह तुष्टिकरण में डूबी हुई है. यह बंगाली हिंदुओं की आस्था का मज़ाक है और भक्ति को वोट बैंक के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है."
बीजेपी के आरोपों पर ममता बनर्जी का जवाब
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इमेज कैप्शन, ममता बनर्जी का कहना है कि वो सिर्फ एक धर्म नहीं बल्कि सभी धर्मों के कार्यक्रमों में हिस्सा लेती हैं
हालांकि ममता बनर्जी ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने कहा, "जब कोई धार्मिक सहायता के लिए आता है, चाहे हिंदू हो, मुस्लिम, जैन, ईसाई या पारसी, तो कुछ लोग कहते हैं कि मैं तुष्टिकरण करती हूं. मैं तुष्टिकरण नहीं करती. मैं सच्चे मायनों में धर्मनिरपेक्ष हूं."
"आप मुझे एक भी धर्म नहीं दिखा सकते जिसके कार्यक्रम में मैं नहीं जाती. गुरुद्वारे में जाती हूं तो सिर ढकती हूं, तब कोई आपत्ति नहीं करता. फिर ईद के कार्यक्रम में जाने पर आपत्ति क्यों होती है?"
'दुर्गा आंगन' ममता बनर्जी की हालिया धार्मिक और सांस्कृतिक पहलों की श्रृंखला का हिस्सा है. इससे पहले दीघा में जगन्नाथ मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई. सरकार के मुताबिक जनवरी के दूसरे सप्ताह में उत्तर बंगाल में महाकाल मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी.
कोलकाता स्थित राजनीतिक विशेषज्ञ मैदुल इस्लाम का कहना है, "मुझे लगता है कि ममता अब बीजेपी को उसी के मैदान पर ललकार रही हैं, वे खुद ब्राह्मण हैं. ममता वोटिंग व्यवहार और पैटर्न को बहुत अच्छे से समझती हैं और विभिन्न समूहों को संभालती हैं."
"पिछले दस सालों से बीजेपी लगातार उनके खिलाफ प्रचार कर रही है कि वे हिंदू-विरोधी नेता हैं. जब बीजेपी पश्चिम बंगाल में प्रमुख विपक्षी ताकत बन गई, तब से पूरी तस्वीर बदल गई. 2011-2016 के बीच ऐसा नहीं था. जब राज्य में वामपंथी राजनीति कमजोर हो गई, तब यह बयानबाजी होना तय था."
बाबरी मस्जिद की छाया और हुमायूं कबीर
मंदिर राजनीति के बीच बाबरी मस्जिद का मुद्दा भी बंगाल की राजनीति में उभरा है. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि जहां एक ओर टीएमसी हिंदू मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं अल्पसंख्यक वोट बैंक को भी संदेश दिया जा रहा है.
टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद ज़िले में एक मस्जिद की आधारशिला रखी थी. इसके बाद वहां बड़ी संख्या में लोग दान और निर्माण सामग्री लेकर पहुंचे. पार्टी ने इस घटना के बाद कबीर को निलंबित कर दिया.
चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में दौरे करते समय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "'मंदिर और मस्जिद' की राजनीति कौन कर रहा है? एक पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक हैं और दूसरी तृणमूल कांग्रेस खुद. बंगाल की जनता को फैसला करना होगा कि चुनाव नजदीक आने पर इस तरह की चीजें करना कितना उचित है."
वहीं ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों को लगातार खारिज करती रही हैं.
वहीं 22 दिसंबर को हुमायूं कबीर ने नई पार्टी बनाने की घोषणा की. उन्होंने कहा, "मुस्लिम समुदाय अब अपना प्रतिनिधित्व चाहता है."
उन्होंने यह भी दावा किया, "मुस्लिम वोटों को हल्के में नहीं लिया जा सकता. अगर उनकी आवाज़ दबाई गई, तो राजनीतिक नतीजे सामने आएंगे."
मैदुल इस्लाम हालांकि मानते हैं कि ममता का हिंदुत्व बीजेपी के हिंदुत्व से अलग है.
मैदुल इस्लाम ने कहा, "2019 के लोकसभा चुनाव से हिंदू मतदाता बीजेपी को वोट दे रहे हैं. एससी, एसटी और ओबीसी जैसे कुछ समुदायों में यह 60% से अधिक हो गया है. चूंकि मुस्लिमों के पास कहीं और जाने का विकल्प नहीं है और उनका वोट कहीं और नहीं जाएगा, इसलिए ममता ने यह गणना की है कि वे वोट तो देंगे ही, इसलिए हमें हिंदू वोटों पर ध्यान करना होगा. उनकी हिंदुत्व बीजेपी की हिंदुत्व से बहुत अलग है. यह बंगाली देवी-देवताओं जैसे जगन्नाथ, महाकाली और दुर्गा के इर्द-गिर्द केंद्रित है."
वोट बैंक और पहचान की राजनीति
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इमेज कैप्शन, पश्चिम बंगाल के चुनाव में पहचान की राजनीति अहम मुद्दा होती है
बीजेपी का आरोप है कि टीएमसी लंबे समय से अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति करती रही है और अब चुनावी दबाव में हिंदू सांस्कृतिक प्रतीकों को अपना रही है.
रबीन्द्र भारती यूनिवर्सिटी के राजनीति के प्रोफेसर बिस्वनाथ चक्रबर्ती ने कहा, "पश्चिम बंगाल ने धीरे-धीरे हिंदी बेल्ट की राजनीति प्राप्त कर ली है. यह मुद्दा-आधारित राजनीति से पहचान-आधारित राजनीति की ओर बढ़ गया है, जहां धर्म और जाति प्रमुख हैं."
"टीएमसी मुस्लिमों को यह सुनिश्चित कराने की कोशिश कर रही हैं कि वे उनके लिए वोट करें, जबकि बीजेपी हिंदू वोटों को जुटा रही है. वो आरोप लगा रही है कि ममता मुस्लिमों का तुष्टिकरण कर रही हैं और हिंदुओं के साथ पक्षपात कर रही हैं. ममता हिंदू-विरोधी की अपनी छवि को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं, इसलिए वे सभी मंदिर संबंधी पहल कर रही हैं. यह 2026 चुनाव का मुख्य मुद्दा होगा."
पश्चिम बंगाल बीजेपी सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने कहा, "ये दोनों परियोजनाएँ खुद ममता बनर्जी की हैं. बाबरी मस्जिद भी, 'दुर्गा आंगन' भी. आखिर में राम का नाम लेने से उन्हें फायदा नहीं होगा. 15 साल से उन्होंने हिंदू आबादी पर अत्याचार किया है. बंगाल की जनता ने कुछ भी नहीं भुलाया है. 2026 के चुनावों में जनता उन्हें विदा करेगी."
बीजेपी के इन आरोपों के जवाब में टीएमसी ने कई राज्यों में बंगला भाषी प्रवासियों पर हो रहे हमलों और मज़दूरों की गिरफ़्तारियों का मुद्दा उठाया है.
राज्यसभा सांसद और तृणमूल कांग्रेस नेता समीरुल इस्लाम ने कहा, "बीजेपी कहती है कि वह बंगाल को शांतिपूर्ण और समृद्ध रखेगी. जो लोग सिर्फ बंगाली होने की वजह से लोगों को पीटते हैं, जो बंगाली बोलने पर किसी को मारने तक चले जाते हैं, वही अब बंगाल के विकास की बात कर रहे हैं! बीजेपी शासित राज्यों में हर रोज़ बंगाली बोलने मात्र से लोगों को पुलिस उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. बीजेपी नेता खुलेआम बंगालियों का अपमान करते हैं."
हिंदू वोटर्स का बीजेपी की ओर झुकाव?
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इमेज कैप्शन, बीजेपी पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी है
पश्चिम बंगाल में पहचान की राजनीति चुनावी गणित में अहम भूमिका निभाती है. 2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने हिंदुत्व के मुद्दों पर अच्छा प्रदर्शन किया था.
2014 में कांग्रेस और 2019 में वाम दलों के गिरते प्रदर्शन के बाद, बीजेपी पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी.
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य में 42 में से 18 सीटें जीतीं. यह रुझान 2021 के विधानसभा चुनाव और पिछले साल हुए संसदीय चुनावों तक जारी रहा.
बिस्वनाथ चक्रबर्ती ने कहा, "2021 में 87% मुस्लिमों ने टीएमसी को वोट दिया, जबकि 54% हिंदुओं ने बीजेपी को. और यह ट्रेंड 2024 के राष्ट्रीय चुनावों में भी जारी रहा. यह स्थापित हो चुका है कि ममता को अधिकांश मुस्लिम वोट मिल रहे हैं और बहुसंख्य हिंदू वोट बीजेपी को जा रहे हैं."
"हालांकि, बीजेपी को हिंदुओं के 50% से अधिक वोट मिलना टीएमसी सरकार हटाने के लिए पर्याप्त नहीं है. इसलिए बीजेपी हिंदुत्व राजनीति के माध्यम से हिंदू वोट हासिल करने की कोशिश कर रही है, जैसे बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले, अवैध प्रवासन, रोहिंग्या जैसे मुद्दों को उठाकर."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.