नए साल पर 'फूंक मारनी पड़ गई':महंत प्रतापपुरी का 'धर्म वाला राष्ट्रवाद'; इन्फ्लूएंसरों का 'जैसलमेर दौरा'
नमस्कार जयपुर में नए साल का जश्न तो खूब मना लेकिन रात में कार से निकलने वालों को फूंक मारनी पड़ गई। इंदौर की सड़कों पर कमेंट कर घिरे इन्फ्लूएंसर ने रील के लिए ऐसी जगह चुनी जहां रेत ही रेत। बाड़मेर में महंत प्रतापपुरी ने धर्म पूछकर लोगों के हाथ खड़े कराए और बांसवाड़ा में 'गंगा' ने नहर में कूदकर जान बचाई। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में... 1. कार से निकलो, फूंक मारकर दिखाओ... तू डाल-डाल मैं पात-पात। जयपुर में वही कहावत हुई। आधी रात तक नए साल का जश्न मना। यूं तो दूध वाले उत्साही भी मैदान में थे। लेकिन मदिरा पीकर सड़क पर हुल्लड़ करने वालों पर पुलिस की खास निगाह थी। पुलिस ने पहले ही आगाह कर दिया था कि नशे में वाहन चलाते मिल गए तो खैर नहीं। पुलिस ने जैसा कहा, वैसा किया भी। ब्रेथ एनालाइजर लेकर पुलिस टीमें हर चौक-चौराहे पर तैनात नजर आईं। पुलिसवालों ने भाग-भागकर गाड़ियां रोकीं। ड्राइवर पर बाहर निकाला। मशीन में फूंक मारने को कहा। गिनती गिनी। मारो..मारो..मारो..कहकर फूंक मारने वाले का हौसला बढ़ाया। मशीन में ड्रिंक करने वाले पकड़े गए तो चालान की कार्रवाई हुई। गाड़ियां जब्त की गई। जश्न का ऐसा भी क्या खुमार कि खुद का होश न रहे। अरे भाई होश में रहो और सुरक्षित रहो। तब ही जश्न का मतलब है। बाकी जिन्होंने इष्टदेव के सामने सिर झुकाकर नए साल का स्वागत किया, उन्हें जय रामजी की। 2. इंदौर की सड़कों के बाद सीधे राजस्थान के रेगिस्तान में.. राजस्थान का रेगिस्तान पर्यटकों को खूब खींच रहा है। जैसलमेर-बीकानेर और नागौर में बंपर टूरिस्ट आए। ऐसे में रेत के धोरों में टेंट सिटी लगाने वालों का हौसला भी बुलंद। स्टंट दिखाने वाले स्टंट दिखा रहे हैं। रेत को धोरों में कॉम्पिटिशन ऐसा कि आयोजकों के बीच हाथापाई तक की नौबत आ रही है। अब तो जहां रेत वहीं टूरिज्म का खेत। फलौदी में भी कुछ टीलों पर लोगों ने टेंट सिटी बना दी और पर्यटकों से धोरों का आनंद लेने का आह्वान कर दिया। मध्यप्रदेश से सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर धर्मेंद्र बिलोटिया भी जैसलमेर पहुंचे। खूब रील बनाई। रील खूब वायरल भी हो रही है। ये वही हैं जिन्होंने इंदौर की सड़कों पर कमेंट किया था। आलोचना करने वाले हाथ धोकर पीछे पड़ गए थे। अब बिलोटिया जी ने रील बनाने के लिए ऐसी जगह चुनी। जहां सड़क का नामोनिशान नहीं। रेत ही रेत है। न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। 3. विधायक महंतजी ने की 'घर-वापसी' की बात संत कबीर ने कहा था- जात न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान। मोल करो तलवार का, पड़ी रहन दो म्यान.. संत कबीर धता बताते हुए साधु महाराज ने ही लोगों से धर्म-जात पूछ ली। ये महाराज हैं विधायक महंत प्रतापपुरी। बाड़मेर की धन्यवाद सभा में महंतजी को सरपंच साहब से पूछना चाहिए था कि क्षेत्र में विकास के क्या काम कराए? कितने काम बचे? मेरे लायक कुछ हो तो बताओ। लेकिन महंतजी ने पूछा- कितने साल से मुसलमान हो? फिर सुझाव दिया, बोले- पुनर्विचार की भी सुविधा है। घर-वापसी करने वालों का सम्मान भी होता है। सरपंच क्या करते? हंस पड़े। महंत जी ने जाति को भी नहीं बख्शा। कहा- फलां जाति के कितने लोग हैं, हाथ खड़े कर लो। अपने अपने समाज का नाम बताओ। महंत जी ने इन बातों को राष्ट्रवाद से जोड़ा तो तालियां बज गईं। वैसे महाराज जी, संत-महंत को इंसान की बात करनी चाहिए, इंसानियत की बात करनी चाहिए। पिछले जन्म में कौन क्या था, किसे पता? 4. चलते-चलते.. राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को कपिल मुनि ने श्राप दे दिया था। मुक्ति के लिए गंगा की जरूरत थी। गंगा स्वर्ग में थी। गंगा को धरती पर लाने के लिए भागीरथ ने तप किया। शिवजी ने गंगा को जटाओं में धारण किया। यह पौराणिक कथा है। इसी कथा के साथ यह भी प्रचलित है कि गंगा का काम तिराना है। मुक्त करना है। गंगा से जुड़ी इसी श्रद्धा और भावना के कारण लोग आज भी बेटियों का नाम गंगा रखते हैं। ऐसी ही एक गंगा बांसवाड़ा की कालिका टीम में लेडी कॉन्स्टेबल हैं। सूचना मिली कि एक महिला गांव की नहर में कूदकर जान देने वाली है। बचाने के लिए गंगा आगे बढ़ी। महिला के बिल्कुल पास पहुंचकर उसे समझाया। लेकिन वह जान देने पर आमादा थी। उसने गंगा पर पानी के छींटे उड़ाए। गंगा नहीं डिगी। काफी समझाने के बाद भी महिला नहर में कूद पड़ी। पीछे-पीछे गंगा ने भी छलांग लगा दी। पानी की धार में जीवन डुबाने और तिराने की खूब मशक्कत हुई। गंगा ने पकड़ ढीली नहीं की और महिला को खींचकर किनारे पर ले ही आई। कॉन्स्टेबल गंगा ने अपना काम तो पूरा किया ही, नाम को भी सार्थक कर दिखाया। ऐसे जज्बे को सैल्यूट है। वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी...



