रतनगढ़ में स्ट्रीट लाइट पोल में आया करंट:जिला अस्पताल के पास बड़ा हादसा टला, नए पोल की गुणवत्ता पर सवाल
रतनगढ़ स्टेशन रोड स्थित जालान जिला अस्पताल के पास एक स्ट्रीट लाइट पोल में रातभर करंट दौड़ता रहा। रात का समय होने के कारण कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि देर रात मावठ के दौरान पोल में करंट आने की समस्या शुरू हुई थी। बिजली निगम को तुरंत इसकी सूचना दी गई। सूचना मिलने के लगभग तीन घंटे बाद पोल का कनेक्शन काटा गया। सुबह जब टीम जांच के लिए पहुंची, तो पोल पर क्रॉस का निशान लगाकर छोड़ दिया गया। नगर पालिका द्वारा हाल ही में 25 लाख रुपए की लागत से शहर में 24 नए स्ट्रीट लाइट पोल लगवाए गए हैं। पहली ही बारिश में इन नए पोल में करंट उतरने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रशासन की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बारिश के कारण फुटपाथ पर पानी भरा हुआ है, जिससे करंट फैलने का खतरा और भी बढ़ गया है। व्यापारियों और राहगीरों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि तीन-चार साल पहले इसी इलाके में विभाग की लापरवाही के कारण करंट लगने से दो लोगों की जान जा चुकी है। यह अस्पताल मार्ग है, जहां 24 घंटे मरीज और उनके परिजन आते-जाते रहते हैं। यदि इस तकनीकी खामी को तुरंत ठीक नहीं किया गया, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
रतनगढ़ स्टेशन रोड स्थित जालान जिला अस्पताल के पास एक स्ट्रीट लाइट पोल में रातभर करंट दौड़ता रहा। रात का समय होने के कारण कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था
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स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि देर रात मावठ के दौरान पोल में करंट आने की समस्या शुरू हुई थी। बिजली निगम को तुरंत इसकी सूचना दी गई। सूचना मिलने के लगभग तीन घंटे बाद पोल का कनेक्शन काटा गया। सुबह जब टीम जांच के लिए पहुंची, तो पोल पर क्रॉस का निशान लगाकर छोड़ दिया गया।
नगर पालिका द्वारा हाल ही में 25 लाख रुपए की लागत से शहर में 24 नए स्ट्रीट लाइट पोल लगवाए गए हैं। पहली ही बारिश में इन नए पोल में करंट उतरने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रशासन की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बारिश के कारण फुटपाथ पर पानी भरा हुआ है, जिससे करंट फैलने का खतरा और भी बढ़ गया है।
व्यापारियों और राहगीरों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि तीन-चार साल पहले इसी इलाके में विभाग की लापरवाही के कारण करंट लगने से दो लोगों की जान जा चुकी है। यह अस्पताल मार्ग है, जहां 24 घंटे मरीज और उनके परिजन आते-जाते रहते हैं। यदि इस तकनीकी खामी को तुरंत ठीक नहीं किया गया, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।