रामभद्राचार्य बोले- अमेरिका की दादागिरी खत्म होगी, भारत बनेगा अजेय:कहा- हिंदू जहां रह रहा है, वर्चस्व के साथ रहेगा, पीओके भी हमें मिलेगा
जयपुर में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा- अमेरिका जो आज हम पर दादागिरी कर रहा है, वह आगे कुछ भी नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा- मैं मानता हूं कि 21वीं शताब्दी में हिंदुत्व का वर्चस्व बहुत बुलंदी पर जाएगा। भारत विकसित राष्ट्र बनेगा। उन्होंने कहा- अमेरिका की दादागिरी भी समाप्त हो जाएगी। हमार भारत अजेय होगा। जहां हिंदू रह रहा है, अपने वर्चस्व के साथ रहेगा। उन्होंने कहा- जल्दी ही पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) भारत को मिलेगा और यह सब हनुमान जी की कृपा से होगा। सीकर रोड स्थित नींदड़ आवासीय योजना में 1008 कुंडीय हनुमान महायज्ञ की गुरुवार से शुरुआत हुई। इस दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने यह कहा। जयपुर में बड़े स्तर पर हो रहा आयोजन श्री राम कथा और 1008 कुंडीय हनुमान महायज्ञ का आयोजन 16 जनवरी तक किया जाएगा। जयपुर में बड़े स्तर पर चल रहे आयोजन में देश-विदेश से संत-महात्मा, यजमान और श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार महायज्ञ के दौरान लाखों किलो हवन सामग्री की आहुतियां दी जाएंगी। 1412वीं कथा कर रहा हूं, हर यजमान इस यज्ञ का हिस्सा कथा में रामभद्राचार्य ने बताया- यह उनकी 1412वीं कथा है। इस महायज्ञ में ऐसे लोग भी यजमान बने हैं, जिनके बारे में पहले कल्पना नहीं की जा सकती थी। उन्होंने कहा- इस यज्ञ में अति सामान्य लोग भी यजमान बने हैं और यहां सभी यजमान हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि लोगों के मन में भारत माता, भगवान श्री राम, हनुमान जी और कथा के प्रति प्रेम है, जिसे उन्होंने एक सकारात्मक संकेत बताया। किष्किंधा कांड से कथा की शुरुआत कथा में रामभद्राचार्य ने श्री रामचरितमानस के किष्किंधा कांड से श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता की कथा सुनाई। उन्होंने बताया- कथा के दौरान किष्किंधा कांड के चौथे दोहे की पांचवीं पंक्ति पर नौ दिन तक चर्चा की जाएगी। उन्होंने बताया- इस दौरान भगवान श्रीराम की सभी लीलाओं का उल्लेख आएगा, लेकिन चर्चा उसी चौपाई के केंद्र में रहेगी। महायज्ञ में 1451 वैदिक विद्वान पंडित हवन करा रहे आयोजन समिति के अनुसार कथा में एक करोड़ 51 लाख हनुमान नाम जप के माध्यम से विश्व शांति, मानव कल्याण और राष्ट्र उत्थान की कामना की जाएगी। 350×450 मीटर क्षेत्र में विशाल यज्ञशाला का निर्माण किया गया है, जिसमें 1008 यज्ञकुंड बनकर तैयार हैं। इस महायज्ञ में 1451 वैदिक विद्वान पंडित मंत्रोच्चार के साथ हवन करा रहे हैं। प्रतिदिन 50 हजार लोगों के लिए भोजन प्रसादी आयोजन समिति से जुड़े अनिल संत ने बताया- महायज्ञ में शामिल श्रद्धालुओं, यजमानों और संत-महात्माओं के लिए प्रतिदिन करीब 50 हजार लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था है। भोजन लकड़ी के चूल्हों पर सात्विक तरीके से तैयार किया जाएगा। वहीं 111 हलवाई आयोजन के दौरान साधु-संतों के आश्रम और कथा स्थल की भोजन व्यवस्था संभाल रहे हैं।