वेनेज़ुएला पर भारत बोला- गहरी चिंता की बात, वहीं मुस्लिम देशों के भी आए बयान
वेनेज़ुएला में अमेरिका की कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने का ईरान समेत कई देशों ने खुलकर विरोध किया है. भारत ने इस मामले में सतर्कता के साथ प्रतिक्रिया दी है.
वेनेज़ुएला पर भारत बोला- गहरी चिंता की बात, वहीं मुस्लिम देशों के भी आए बयान

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इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति मादुरो के समर्थन में वेनेज़ुएला में एक गुट ने उनके समर्थन में रैली भी निकाली
4 जनवरी 2026
अपडेटेड 9 घंटे पहले
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ख़ुद यह बताया कि अमेरिका ने वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास पर हवाई हमला किया और निकोलस मादुरो को पकड़ लिया.
वेनेज़ुएला के ख़िलाफ़ अमेरिका के क़दम को दुनिया के कई देशों ने एकतरफ़ा और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के ख़िलाफ़ बताया. इस मामले में भारत ने काफ़ी सतर्कता के साथ प्रतिक्रिया दी है.
भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, "वेनेज़ुएला में हालिया घटनाक्रम गहरी चिंता का विषय है. हम वहां की बदलती स्थिति पर क़रीबी नज़र रखे हुए हैं."
हालाँकि ईरान ने इस मामले में सीधे अमेरिका पर निशाना साधा और हिज़्बुल्लाह ने भी अमेरिकी कार्रवाई का विरोध किया.
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भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "भारत वेनेज़ुएला के लोगों की सुरक्षा और उनकी भलाई के लिए अपने समर्थन को फिर से दोहराता है. हम सभी संबंधित पक्षों से अपील करते हैं कि मुद्दों का समाधान बातचीत के ज़रिए और शांतिपूर्ण तरीक़े से किया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे."
इससे पहले भारत ने शनिवार रात अपने नागरिकों को वेनेज़ुएला की यात्रा को लेकर एक एडवाइज़री जारी की थी. भारत सरकार ने लोगों से कहा था कि वे वेनेज़ुएला की सभी गै़र-ज़रूरी यात्राओं से बचें.

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इमेज कैप्शन, भारत में भी वेनेज़ुएला में अमेरिकी ऑपरेशन के ख़िलाफ़ वामपंथी दलों ने प्रदर्शन किया है
भारत की प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले में चिंता जताई है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "कांग्रेस पार्टी पिछले 24 घंटों में वेनेजुएला में अमेरिका की कार्रवाई पर गहरी चिंता जताती है. अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तय सिद्धांतों का एकतरफ़ा उल्लंघन नहीं किया जा सकता."
कुछ ऐसी ही बात दुनियाभर के कई देशों ने की है और अमेरिकी कार्रवाई का विरोध किया है.
ईरान ने क्या कहा

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इमेज कैप्शन, ईरान ने वेनेज़ुएला में अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "ईरान का विदेश मंत्रालय वेनेज़ुएला पर अमेरिकी सैन्य हमले और देश की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खुले उल्लंघन की कड़ी निंदा करता है."
"वेनेज़ुएला पर अमेरिकी सैन्य हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूलभूत सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के बुनियादी नियमों, ख़ास तौर पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का स्पष्ट उल्लंघन है, जो बल के प्रयोग या धमकी को रोकता है और इसी पूरी तरह से 'आक्रामकता' माना जाता है."
इसमें आगे लिखा, "संयुक्त राष्ट्र के सदस्य एक आज़ाद देश वेनेज़ुएला जो संयुक्त राष्ट्र का सदस्य भी है, उसके ख़िलाफ़ अमेरिकी सैन्य आक्रामकता क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है. इसके नतीजे पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को प्रभावित करते हैं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर-आधारित व्यवस्था को ज़्यादा कमजोर और नष्ट करेंगे.
"ईरान का विदेश मंत्रालय सभी राज्यों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद की क़ानूनी और नैतिक ज़िम्मेदारी पर ज़ोर देता है कि वे वेनेज़ुएला के ख़िलाफ़ अमेरिका की गैरकानूनी आक्रामकता को तुरंत रोकें."
मलेशिया ने बताया 'ख़तरनाक'

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इमेज कैप्शन, मलेशिया ने वेनेज़ुएला में अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के ख़िलाफ़ बताया
मलेशिया के विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर एक सवाल के जवाब में काफ़ी सख़्त भाषा का इस्तेमाल किया है.
उसने कहा है कि वह "दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में किसी भी तरह के विदेशी दख़ल, साथ ही ताक़त के इस्तेमाल या धमकी का विरोध करता है."
उन्होंने लिखा, "मैंने वेनेज़ुएला में हो रहे घटनाक्रमों को बहुत गंभीरता से देखा है.. राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को बिना किसी देरी के रिहा किया जाना चाहिए. कारण चाहे जो भी हों, बाहरी कार्रवाई से किसी मौजूदा सरकार के प्रमुख को ज़बरदस्ती हटाना एक ख़तरनाक मिसाल पेश करता है. यह उस क़ानूनी ढांचे को कमज़ोर करता है जो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का आधार है."
उन्होंने लिखा, "वेनेज़ुएला के लोगों को अपना राजनीतिक भविष्य ख़ुद तय करने का अधिकार है. मलेशिया अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संप्रभुता के सम्मान को देशों के बीच शांतिपूर्ण संबंधों के लिए सबसे ज़रूरी मानता है."

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इमेज कैप्शन, क़तर के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है
क़तर के विदेश मंत्रालय ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी है. एक बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा, "क़तर राज्य बोलिवेरियन रिपब्लिक ऑफ़ वेनेज़ुएला में मौजूदा घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करता है, और इस संदर्भ में संयम बरतने, तनाव कम करने और सभी लंबित मुद्दों को हल करने के लिए बातचीत का सही तरीक़ा अपनाने की अपील करता है."
"विदेश मंत्रालय संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के स्थापित सिद्धांतों का पालन करने के लिए क़तर राज्य की स्थिति की पुष्टि करता है, जिसमें चार्टर के तहत अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से हल करने की ज़िम्मेदारियाँ शामिल हैं."
"मंत्रालय आगे किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रयास में योगदान देने के लिए क़तर राज्य की पूरी तत्परता को दोहराता है जिसका मक़सद तत्काल शांतिपूर्ण समाधान हासिल करना है, और सभी संबंधित पक्षों के साथ संचार के चैनल खुले रखने की अपनी प्रतिबद्धता पर ज़ोर देता है."
हिज़्बुल्लाह ने अमेरिकी आरोपों को बताया झूठ

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इमेज कैप्शन, हिज़्बुल्लाह ने अमेरिकी प्रशासन पर दबदबे और अहंकार का आरोप लगाया है (फ़ाइल फ़ोटो)
तुर्की के विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा है, "हम वेनेज़ुएला में हाल के घटनाक्रमों पर क़रीब से नज़र रख रहे हैं. तुर्की वेनेजुएला की स्थिरता और वहां के लोगों की शांति और भलाई को महत्व देता है. हम सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हैं ताकि मौजूदा हालात के नतीजे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के विपरीत न हो."
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि तुर्की अंतराष्ट्रीय क़ानून के दायरे में वेनेज़ुएला में संकट को हल करने के लिए कोई भी रचनात्मक योगदान देने के लिए तैयार है.
वेनेज़ुएला के ताज़ा घटनाक्रम पर ख़बर लिखे जाने तक लेबनान सरकार ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन लेबनान में मौजूद संगठन हिज़्बुल्लाह ने अमेरिकी ऑपरेशन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.
हिज़्बुल्लाह से जुड़ी अल मनार टीवी वेबसाइट पर अपने एक बयान में उसने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई वेनेज़ुएला की राष्ट्रीय संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का "खुला और अभूतपूर्व उल्लंघन" है.
हिज़्बुल्लाह ने अमेरिकी आरोपों को "झूठा" बताया.
दरअसल राष्ट्रपति ट्रंप आरोप लगाते रहे हैं कि अमेरिका में वेनेज़ुएला के लाखों लोग घुसे चले आ रहे हैं. उनका आरोप है कि अमेरिका में अवैध आप्रवासियों की बाढ़ के लिए मादुरो ज़िम्मेदार हैं.
उन्होंने वेनेज़ुएला के दो गैंग - ट्रेन दे अरागुआ और कार्टेल दे लोस सोलेस को 'विदेशी आतंकवादी संगठनों' की लिस्ट में डाल दिया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि दूसरे समूह का नेतृत्व ख़ुद मादुरो करते हैं.
इस बीच हिज़्बुल्लाह ने कहा है कि ताज़ा घटना ने अमेरिकी प्रशासन के "दबदबे, अहंकार और लूट" वाले रवैये की पुष्टि की है. उसने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को कमज़ोर करने और "जंगल के कानून" को बढ़ावा देने का आरोप लगाया.
हिज़्बुल्लाह ने कहा कि वह वेनेज़ुएला के लोगों, राष्ट्रपति पद और सरकार के साथ "पूरी एकजुटता" से खड़ा है.
जापान ने क्या कहा

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इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप ने ख़ुद वेनेज़ुएला में अमेरिकी कार्रवाई की जानकारी दी (फ़ाइल फ़ोटो)
भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने कहा, "चीन एक संप्रभु देश के ख़िलाफ़ अमेरिका के खुलेआम बल प्रयोग और उसके राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है और इससे बहुत हैरान है."
"अमेरिका के ऐसे दबंगई वाले काम अंतरराष्ट्रीय क़ानून और वेनेजुएला की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन करते हैं, और लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं."
जापान के विदेश मंत्रालय ने वेनेज़ुएला में अमेरिकी हमलों और दखल पर अपनी प्रतिक्रिया में जी 7 देश के तौर पर अपनी स्थिति दोहराई है.
विदेश मंत्रालय ने "वेनेज़ुएला में लोकतंत्र की बहाली और स्थिति को स्थिर करने की दिशा में" समर्थन देने की पेशकश की है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.