बूंटीनाथ आश्रम से बूंटिया की पहचान, महाशिवरात्रि पर होते हैं विशेष आयोजन; चार मीनार कुआं पर्यटन का मुख्य केंद्र
हरीश सैनी| चूरू जिला मुख्यालय के पास स्थित बूंटिया ग्राम पंचायत की पहचान यहां स्थित करीब 850 साल पुराने बूंटीनाथ आश्रम से है। गांव के बीच में आश्रम है। इसी के नाम पर गांव का नाम बूंटिया पड़ा है। आश्रम महंत निरंजननाथ महाराज ने बताया कि नाथ संप्रदाय के संत बूंटीनाथ महाराज ने यहां के धोरों में धूणा रमाया था। जोधपुर नरेश के न्यौते पर संत बूंटीनाथ यहां आए थे तथा जाळ के पेड़ के नीचे धूणा जमाकर यही रम गए। मिट्टी के शिवलिंग की स्थापना कर बाबा भोलेनाथ की आराधना शुरू की। इसके बाद मठ में शिवालय बनवाकर शिवलिंग की स्थापना की गई। करीब दो बीघा में फैला मठ आसपास के गांवों के साथ चूरू के लोगों की भी आस्था का मुख्य केंद्र है। मठ का निर्माण जोधपुर रियासत की ओर से करवाया गया। वर्तमान में मठ का पुर्ननिर्माण करवाया जा रहा है। सावन मेंे बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन होते हैं। बाबा किशननाथ व अणमयनाथ भी यहां के महंत रहे हैं। 2005 में बाबा बालकनाथ ने समाधि ली, तब से यहां के महंत निरंजननाथ हैं। भगवानदास बागला की ओर से गांव में बनवाया गया चार मीनार कुआं यहां पर्यटन का मुख्य केंद्र है। प्रशासक बंशीधर मेघवाल ने बताया कि 1995 में बूंटिया को ग्राम पंचायत का दर्जा मिला, जिसमें बूंटिया के अलावा गांव डाबला शामिल है। यहां के पहले सरपंच गोपसिंह रहे। बूंटिया में सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल व गर्ल्स उच्च प्राथमिक स्कूल है। डाबला में उच्च माध्यमिक स्कूल है। आश्रम में स्थापित शिवलिंग। {मेघवाल ने बताया कि मनरेगा के तहत 65 लाख की लागत से दो मॉडल तालाब बनवाए हैं। गंदे व बरसाती भराव की समस्या के समाधान के लिए 38 लाख की लागत से नाले बनवाए हैं। स्कूल की चारदीवारी निर्माण के लिए 35 लाख रुपए का बजट स्वीकृत है। सामुदायिक शौचालय भी बनवाए हैं। गंदे पानी की निकासी के लिए पंचायत क्षेत्र में नालियों का निर्माण करवाया गया है। नियमित रूप से सफाई कार्य भी करवाया जाता है। जनसंख्या : 8000 साक्षरता दर : 90% जिला मुख्यालय से दूरी : 10 किमी कनेक्टिविटी : सड़क मार्ग पहचान : बूंटीनाथ आश्रम प्रमुख उत्पादन : बाजरा, मोठ आय का प्रमुख स्रोत : कृषि