बरसात और कड़ाके की सर्दी में महिलाओं-बच्चों का धरना:ग्रामीण बोला- पेट्रोल डालकर आत्महत्या कर लूंगा; रास्ते पर धार्मिक चबूतरा बनाने का विरोध
अलवर स्थित मिनी सचिवालय के गेट पर गुरुवार सुबह 11 बजे से रैणी क्षेत्र के लूनिया का बास भूड़ा गांव के लोग धरने पर बैठे हैं। ग्रामीण कड़ाके की ठंड और हल्की बूंदाबांदी के बावजूद पूरी रात सचिवालय गेट पर डटे रहे। रात में तापमान करीब 7 डिग्री दर्ज किया गया। धरने में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल रहे। कुछ लोगों ने तिरपाल और कंबल ओढ़े, तो कुछ अलाव तापते नजर आए। देखे तस्वीरें...... धरने पर बैठे गांव के धर्मसिंह ने चेतावनी देते हुए कहा - यदि मांगों को नहीं सुना गया तो वे सचिवालय गेट पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करेंगे। इसकी जिम्मेदारी पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर की होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुवार से धरने पर बैठे होने के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई सुध नहीं ली है। आम रास्ते पर चबूतरा बनाने के खिलाफ धरने पर बैठे धर्मसिंह ने बताया- गांव के एक आम रास्ते पर कुछ लोगों ने दबंगई से चबूतरा बना दिया और उस पर भैरू की मूर्ति स्थापित कर दी। आरोप है कि यह निर्माण पटवारी की मौजूदगी में रात के समय करवाया गया। इस मामले में तहसीलदार कैलाशचंद मेहरा ने 3 दिसंबर 2025 को चबूतरा निर्माण के बाद 7 आरोपियों के खिलाफ मामला भी दर्ज करवाया था। तहसीलदार, एसडीएम और पटवारी पर मिलीभगत का आरोप लगाया ग्रामीणों का कहना है कि उक्त रास्ते के लिए पहले ही राजस्व विभाग में शुल्क जमा करवाया जा चुका है। इससे यह रास्ता आमजन के लिए स्वीकृत है। इसके बावजूद अब तहसीलदार, एसडीएम और पटवारी मिलकर उस रास्ते पर स्टे लगवाने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष और संबंधित अधिकारी एक ही जाति के होने का फायदा उठाकर आम रास्ते को बंद रखा जा रहा है। गांव की स्थिति बेहद खराब ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता बंद होने से गांव की स्थिति बेहद खराब हो गई है। पानी के टैंकर गांव तक नहीं आ पा रहे हैं और पशुओं को पानी पिलाने के लिए एक किलोमीटर दूर ले जाना पड़ रहा है। इसी कारण सभी ग्रामीणों ने कामकाज बंद कर रखा है। गांववालों के फर्जी हस्ताक्षर करवाए ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा कुछ फर्जी हस्ताक्षर करवा लिए गए हैं, जिनमें यह दिखाया जा रहा है कि रास्ता बंद होने पर गांव वालों को कोई आपत्ति नहीं है। वहीं शुक्रवार सुबह भी ग्रामीण सचिवालय गेट पर धरने पर डटे रहे और प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।