सीमेंट से भरा ट्रेलर, टैंकर से टकराया:पाखरियावास घाटे में बड़ा हादसा टला, प्रशासन की अनदेखी से आक्रोश
ब्यावर जिले के मसूदा रोड स्थित पाखरियावास घाटे में गुरुवार को एक बार फिर सड़क हादसा सामने आया। सीमेंट से भरा एक ट्रेलर और एक टैंकर आमने-सामने टकरा गए। जानकारी के अनुसार, सीमेंट से भरा ट्रेलर मसूदा की ओर जा रहा था, जबकि सामने से एक टैंकर आ रहा था। घाटे के घुमावदार मोड़ पर एक वाहन का स्टेयरिंग नहीं कट पाने के कारण दोनों भारी वाहन टकरा गए। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और क्रेन की सहायता से ट्रेलर को सड़क किनारे खड़ा कर यातायात को सुचारू कराया। गौरतलब है कि पाखरियावास घाटा पहले से ही 'एक्सीडेंटल ज़ोन' के रूप में जाना जाता है। इसी स्थान पर करीब दो महीने पहले हुए एक सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके कुछ समय बाद एक अन्य दुर्घटना में एक महिला की भी जान चली गई थी। लगातार हो रही दुर्घटनाओं से ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने कई बार इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। हालांकि, अब तक प्रशासन द्वारा इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे यह घाटा राहगीरों और वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बना हुआ है।
ब्यावर जिले के मसूदा रोड स्थित पाखरियावास घाटे में गुरुवार को एक बार फिर सड़क हादसा सामने आया। सीमेंट से भरा एक ट्रेलर और एक टैंकर आमने-सामने टकरा गए।
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जानकारी के अनुसार, सीमेंट से भरा ट्रेलर मसूदा की ओर जा रहा था, जबकि सामने से एक टैंकर आ रहा था। घाटे के घुमावदार मोड़ पर एक वाहन का स्टेयरिंग नहीं कट पाने के कारण दोनों भारी वाहन टकरा गए।
गनीमत रही कि इस दुर्घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और क्रेन की सहायता से ट्रेलर को सड़क किनारे खड़ा कर यातायात को सुचारू कराया।

पाखरियावास घाटा पहले से ही 'एक्सीडेंटल ज़ोन' के रूप में जाना जाता है।
गौरतलब है कि पाखरियावास घाटा पहले से ही 'एक्सीडेंटल ज़ोन' के रूप में जाना जाता है। इसी स्थान पर करीब दो महीने पहले हुए एक सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई थी।
इसके कुछ समय बाद एक अन्य दुर्घटना में एक महिला की भी जान चली गई थी। लगातार हो रही दुर्घटनाओं से ग्रामीणों में आक्रोश है।
ग्रामीणों ने कई बार इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। हालांकि, अब तक प्रशासन द्वारा इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे यह घाटा राहगीरों और वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बना हुआ है।