करौली में कलेक्ट्रेट के सामने मौन धरना:मनरेगा नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन, कांग्रेसियों ने उपवास रखकर जताया विरोध
केंद्र सरकार की मनरेगा नीतियों के विरोध में कांग्रेस ने रविवार को करौली में "मनरेगा बचाओ संग्राम" के तहत मौन धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कलेक्ट्रेट के सामने आयोजित किया गया, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उपवास रखकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। इस धरना प्रदर्शन में करौली-धौलपुर सांसद भजनलाल जाटव, करौली के पूर्व विधायक लाखन सिंह मीणा, टोडाभीम विधायक एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष घनश्याम महर, पीसीसी सचिव भूपेंद्र भारद्वाज और महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष शरदो गुर्जर सहित जिले के कई जनप्रतिनिधि व कांग्रेस पदाधिकारी शामिल हुए। इस दौरान सांसद भजनलाल जाटव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार मनरेगा को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार महात्मा गांधी के नाम को योजना से हटाने का प्रयास कर रही है, जो अस्वीकार्य है क्योंकि महात्मा गांधी ने देश को आजादी दिलाने के साथ भारत को नई पहचान दी थी। आंदोलन तेज करने की चेतावनी जाटव ने आगे कहा कि मनरेगा में राज्यों का अंश बढ़ाने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जबकि राज्यों की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा के मूल प्रावधानों को बहाल करने, योजना का नाम यथावत रखने और मजदूरी बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिदिन करने की मांग की। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो जिलेभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
केंद्र सरकार की मनरेगा नीतियों के विरोध में कांग्रेस ने रविवार को करौली में "मनरेगा बचाओ संग्राम" के तहत मौन धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कलेक्ट्रेट के सामने आयोजित किया गया, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उपवास रखकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।
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इस धरना प्रदर्शन में करौली-धौलपुर सांसद भजनलाल जाटव, करौली के पूर्व विधायक लाखन सिंह मीणा, टोडाभीम विधायक एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष घनश्याम महर, पीसीसी सचिव भूपेंद्र भारद्वाज और महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष शरदो गुर्जर सहित जिले के कई जनप्रतिनिधि व कांग्रेस पदाधिकारी शामिल हुए।
इस दौरान सांसद भजनलाल जाटव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार मनरेगा को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार महात्मा गांधी के नाम को योजना से हटाने का प्रयास कर रही है, जो अस्वीकार्य है क्योंकि महात्मा गांधी ने देश को आजादी दिलाने के साथ भारत को नई पहचान दी थी।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी जाटव ने आगे कहा कि मनरेगा में राज्यों का अंश बढ़ाने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जबकि राज्यों की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा के मूल प्रावधानों को बहाल करने, योजना का नाम यथावत रखने और मजदूरी बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिदिन करने की मांग की। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो जिलेभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।