जाम शहर की सबसे बड़ी समस्या:देबारी, सुखाड़िया सर्किल-पुलां और भुवाणा मार्ग पर फ्लाई ओवर बनेंगे; तभी मिलेगी राहत
उदयपुर की पहचान पर्यटन नगरी के रूप में है, लेकिन आज यह शहर तेजी से बढ़ते ट्रैफिक दबाव से जूझ रहा है। सीमित सड़क चौड़ाई, बढ़ती आबादी, औद्योगिक विस्तार और वाहनों की बढ़ती संख्या ने शहर की यातायात व्यवस्था को जाम के स्थायी संकट में बदल दिया है। सूरजपोल से देबारी, सुखाड़िया सर्कल से पुलां, भुवाणा और प्रतापनगर-देबारी जैसे प्रमुख कॉरिडोर अब केवल सड़कें नहीं रहे, बल्कि रोजमर्रा की परेशानी, समय की बर्बादी और दुर्घटनाओं के हॉटस्पॉट बन चुके हैं। इन मार्गों से रोज लाखों वाहन गुजरते हैं, जिनमें भारी वाहन, औद्योगिक परिवहन, एयरपोर्ट व रेलवे ट्रैफिक के साथ-साथ स्थानीय आवागमन भी शामिल है। संपर्क सड़कों, चौराहों और सिग्नलों पर बार-बार रुकना न केवल ट्रैफिक की रफ्तार थाम देता है, बल्कि आपात सेवाओं, पर्यटन गतिविधियों और आर्थिक संचालन को भी प्रभावित करता है। शहर में कुछ स्थानों पर बने छोटे फ्लाईओवर राहत तो देते हैं, लेकिन वे आंशिक समाधान भर साबित हो रहे हैं। स्थायी और दूरदर्शी समाधान के तौर पर अब जरूरत है। एक समग्र फ्लाईओवर नेटवर्क की, जो मुख्य ट्रैफिक को सिग्नल-फ्री मार्ग दे सकें। सूरजपोल-देबारी, सुखाड़िया सर्किल-पुलां, भुवाणा और प्रतापनगर-देबारी फ्लाईओवर न केवल जाम से मुक्ति दिलाएंगे, बल्कि उदयपुर को भविष्य की यातायात जरूरतों के लिए भी तैयार करेंगे। वाहन बढ़े, अब सड़कों की चौड़ाई भी बढ़ानी होगी सूरजपोल से प्रतापनगर हर जगह जाम इस मार्ग पर एयरपोर्ट, शिक्षण संस्थानों सहित चित्तौड़गढ़ की तरफ जाने वाले 1 लाख से ज्यादा वाहनों दबाव है। कदम-कदम पर संपर्क सड़कें हैं। मंडी पास होने से भारी वाहनों का भी आवागमन रहता है। सुखाड़िया सर्किल से पुलां के ये हाल यह मार्ग शहर के सबसे व्यस्ततम मार्गों में से एक है। विश्वविद्यालय, न्यायालय, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और पर्यटकों के वाहनों का दवा रहता है। ट्रैफिक के कारण यहां दिनभर जाम के हालात रहते हैं। भुवाणा क्षेत्र हाईवे जाम का नया केंद्र भुवाणा व आसपास के क्षेत्रों में आवासीय व व्यावसायिक विकास तेजी से हुआ है। नाथद्वारा हाईवे से जुड़े इस इलाके में हाईवे ट्रैफिक और स्थानीय ट्रैफिक के टकराव से जाम और दुर्घटनाएं बढ़ी हैं। प्रताप नगर से देबारी तक यूं बढ़ेगी गति प्रतापनगर और देबारी मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव रहता है। एयरपोर्ट पर आने-जाने वाले प्रतिमाह औसतन 1 लाख लोग भी इसी मार्ग से गुजरते हैं। वाहनों के चौराहों पर रुक-रुक कर चलने से जाम लगा रहता है। बढ़ेगी स्वच्छता की चमक-कचरा निस्तारण तक मॉनिटरिंग, रात में सफाई व पब्लिक टॉयलेट जरूरी कचरा संग्रहण - सुबह-शाम दोनों समय कचरा संग्रहित किया जाए। टिपरों की संख्या 1 वार्ड में 2 और पूरे शहर में 200 की जाए। कचरा स्टेशन भी दो बनाए जाने चाहिए। यूडीए के क्षेत्र में भी व्यवस्था मजबूत की जाए। कचरा निस्तारण - शहर के 1.70 टन कचरे को प्लांटों तक पहुंचाने की प्रॉपर मॉनिटरिंग हो। गीले-सूखे कचरे की मॉनिटरिंग नहीं होने से ही प्लांटों पर ढेर लगे रहते हैं। कचरा छांटने की प्रक्रिया में तेजी लाकर और निस्तारण पर रोज निगरानी कर व्यवस्था सुधारी जा सकती है। रात में सफाई - शहर के 70 वार्डों में सुबह की जगह रात को सफाई कराए जाने पर फोकस करने की जरूरत है। सफाईकर्मियों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए। यूडीए-निगम में सामंजस्य की भी जरूरत है। पब्लिक टॉयलेट - शहर में हर साल औसत 20 लाख पर्यटक आते हैं और 6 लाख आबादी है। इस लिहाज से 350 नए टॉयलेट की जरूरत है। स्वच्छता के लिए खानापूर्ति कर लगाए 228 यूरिनल हटाए जाने चाहिएं। सर्वे प्लान - निगम के रिकॉर्ड में मात्र 1700 होटल-रेस्टोरेंट-किराना दुकान हैं। हकीकत में 3000 से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट-किराना दुकान संचालित हैं। ऐसे में संस्थानों का सर्वे करने के बाद सफाई का नया प्लान बनाएं।