मरुस्थलीय जलवायु एवं मौसम की होगी सटीक भविष्यवाणी
संकलित डाटा का प्रयोग जलवायु परिवर्तन, मरुस्थलीकरण, मौसम पूर्वानुमान में किया जाएगा बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय (BTU), बीकानेर एवं भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे के मध्य एक एमओयू होने जा रहा है। इसके अंतर्गत बीटीयू परिसर में लगभग ₹5 से ₹7 करोड़ की लागत से आईआईटीएम द्वारा “क्लाइमेट एवं ग्रीनहाउस गैस रेफरेंस स्टेशन’ की स्थापना होगी। यह स्टेशन दोनों संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से काम करेगा। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने बताया की यह एमओयू भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्यरत आईआईटीएम, पुणे एवं राजस्थान के अग्रणी राज्य तकनीकी विश्वविद्यालय बीटीयू, बीकानेर के बीच अकादमिक एवं अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करेगा। यह स्टेशन बीकानेर जैसे शुष्क एवं मरुस्थलीय क्षेत्र में दीर्घकालिक जलवायु, मौसम एवं ग्रीनहाउस गैसों से संबंधित उच्च गुणवत्ता का वैज्ञानिक डाटा संकलित किया जाएगा। आईआईटीएम अत्याधुनिक उपकरण लगाएगा और संचालन करेगा। बीटीयू आवश्यक भौतिक अवसंरचना, स्थान, विद्युत एवं इंटरनेट सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। संकलित डाटा का उपयोग जलवायु परिवर्तन, मरुस्थलीकरण, भूमि-वायुमंडलीय अंतःक्रियाओं तथा मौसम पूर्वानुमान से जुड़े अनुसंधानों में किया जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत स्टेशन की स्थापना से संबंधित समस्त समन्वय, तकनीकी एवं प्रशासनिक फॉलो-अप कार्य बीटीयू की ओर से डॉ. गणेश पी. प्रजापत, डीन (इंडस्ट्री-इंस्टीट्यूट रिलेशन), बीटीयू बीकानेर तथा आईआईटीएम, पुणे की ओर से डॉ. नवीन गांधी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, आईआईटीएम पुणे द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। एमओयू की अवधि पाँच वर्ष की होगी, जिसे पारस्परिक सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा। यह सहयोग न केवल बीटीयू बीकानेर को जलवायु अनुसंधान के राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करेगा, बल्कि राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों से संबंधित वैज्ञानिक अध्ययनों को भी नई दिशा प्रदान करेगा
संकलित डाटा का प्रयोग जलवायु परिवर्तन, मरुस्थलीकरण, मौसम पूर्वानुमान में किया जाएगा
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बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय (BTU), बीकानेर एवं भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे के मध्य एक एमओयू होने जा रहा है। इसके अंतर्गत बीटीयू परिसर में लगभग ₹5 से ₹7 करोड़ की लागत से आईआईटीएम द्वारा “क्लाइमेट एवं ग्रीनहाउस गैस रेफरेंस स्टेशन’ की स्थापना होगी। यह स्टेशन दोनों संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से काम करेगा।