रेगुलेटरी सरचार्ज का भार राज्य सरकार द्वारा वहन करे: चैम्बर
मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री ने अजमेर विद्युत वितरण निगम द्वारा राजस्थान विद्युत नियामक आयोग में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दायर याचिका के संबंध में पुनर्विचार याचिका दायर की है। चैम्बर ने मांग की है कि विद्युत दरों को तर्कसंगत किया जाए और रेगुलेटरी सरचार्ज का भार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाए। चैम्बर के प्रेसिडेंट अनिल मिश्रा ने बताया कि चालू वर्ष में टैरिफ और फिक्स्ड चार्जेज में वृद्धि के कारण उपभोक्ताओं पर लगभग 1.50 रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त भार पड़ा है, जिससे औद्योगिक उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई। अनिल मिश्रा ने कहा कि राजस्थान में बिजली दरें पड़ोसी राज्यों की तुलना में सर्वाधिक हैं। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक टैरिफ कम हैं। उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए बिजली दर 6.30 रुपये प्रति यूनिट तय करने की मांग की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 से डिस्कॉम द्वारा 1 रुपये प्रति यूनिट रेगुलेटरी सरचार्ज लगाया गया है, जबकि वास्तविक ईंधन अधिभार 0.28 रुपये था। 2026-27 में अनुमानित 0.14 रुपये प्रति यूनिट अधिभार के बजाय डिस्कॉम ने 0.86 रुपये प्रस्तावित किया, जिसे राज्य सरकार द्वारा वहन करने की अपील की गई। चैम्बर ने वर्तमान टीओडी टैरिफ व्यवस्था, कैप्टिव सोलर प्लांट की क्षमता, बैटरी बैक-अप अनिवार्यता और सोलर पावर शुल्क को लेकर भी आपत्तियां उठाईं। ऑफ-पीक और पीक आवर्स में छूट और अधिभार के समय को समान दर पर 6-6 घंटे करने, ताकि उपभोक्ता महंगी बिजली से बच सकें, की भी सिफारिश की गई।
मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री ने अजमेर विद्युत वितरण निगम द्वारा राजस्थान विद्युत नियामक आयोग में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दायर याचिका के संबंध में पुनर्विचार याचिका दायर की है। चैम्बर ने मांग की है कि विद्युत दरों को तर्कसंगत किया जाए और रे
.
वित्त वर्ष 2025-26 से डिस्कॉम द्वारा 1 रुपये प्रति यूनिट रेगुलेटरी सरचार्ज लगाया गया है, जबकि वास्तविक ईंधन अधिभार 0.28 रुपये था। 2026-27 में अनुमानित 0.14 रुपये प्रति यूनिट अधिभार के बजाय डिस्कॉम ने 0.86 रुपये प्रस्तावित किया, जिसे राज्य सरकार द्वारा वहन करने की अपील की गई। चैम्बर ने वर्तमान टीओडी टैरिफ व्यवस्था, कैप्टिव सोलर प्लांट की क्षमता, बैटरी बैक-अप अनिवार्यता और सोलर पावर शुल्क को लेकर भी आपत्तियां उठाईं। ऑफ-पीक और पीक आवर्स में छूट और अधिभार के समय को समान दर पर 6-6 घंटे करने, ताकि उपभोक्ता महंगी बिजली से बच सकें, की भी सिफारिश की गई।