रतनपुरा में ग्रामीणों ने निकाला कैंडल मार्च:जल जीवन मिशन कार्य पर रोष, एक साल बाद भी पाइपलाइन नहीं
चूरू के रतनपुरा गांव में ग्रामीणों ने जल जीवन मिशन की कार्यप्रणाली के विरोध में शुक्रवार रात कैंडल मार्च निकाला। गांव में पेयजल समस्या के कारण ग्रामीण पिछले दस दिनों से धरने पर बैठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन के तहत टंकी बने एक साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन अभी तक पाइपलाइन नहीं डाली गई है। इस कारण गांव में पेयजल आपूर्ति बाधित है। ग्रामीणों का धरना दिन-रात जारी है, जिसमें महिलाएं भी सहयोग कर रही हैं। कैंडल मार्च के दौरान ग्रामीणों ने मौन रहकर सरकार और जनप्रतिनिधियों के प्रति अपना रोष व्यक्त किया। ग्रामीणों ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लगातार अवगत करा रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की होगी। कैंडल मार्च में करण सिंह फगेड़िया, ईश्वरसिंह जांगिड़, विजयसिंह सहारण, सुनील थाकन, सोमवार सहारण, पवन नाई, मनोज सुंडा, ईश्वर स्वामी, संजय महला, विवेक धींधवाल, माईराम धींधवाल, प्रभूदयाल संुडा, हनुमान सिंह मेघवाल, अनिल जांगिड़, दिलीप फौजी, मनफूल सहारण, राहुल बिंदा, प्रमोद मीणा और मांगेराम महला सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।
चूरू के रतनपुरा में पेयजल न होने की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने कैंडल मार्च निकाला।
चूरू के रतनपुरा गांव में ग्रामीणों ने जल जीवन मिशन की कार्यप्रणाली के विरोध में शुक्रवार रात कैंडल मार्च निकाला। गांव में पेयजल समस्या के कारण ग्रामीण पिछले दस दिनों से धरने पर बैठे हैं।
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ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन के तहत टंकी बने एक साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन अभी तक पाइपलाइन नहीं डाली गई है। इस कारण गांव में पेयजल आपूर्ति बाधित है।
ग्रामीणों का धरना दिन-रात जारी है, जिसमें महिलाएं भी सहयोग कर रही हैं। कैंडल मार्च के दौरान ग्रामीणों ने मौन रहकर सरकार और जनप्रतिनिधियों के प्रति अपना रोष व्यक्त किया।

ग्रामीणों ने जिम्मेदारों पर सुनवाई न करने का आरोप लगाया।
ग्रामीणों ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लगातार अवगत करा रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की होगी।
कैंडल मार्च में करण सिंह फगेड़िया, ईश्वरसिंह जांगिड़, विजयसिंह सहारण, सुनील थाकन, सोमवार सहारण, पवन नाई, मनोज सुंडा, ईश्वर स्वामी, संजय महला, विवेक धींधवाल, माईराम धींधवाल, प्रभूदयाल संुडा, हनुमान सिंह मेघवाल, अनिल जांगिड़, दिलीप फौजी, मनफूल सहारण, राहुल बिंदा, प्रमोद मीणा और मांगेराम महला सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।