जल जीवन मिशन:ग्रामीण अब खुद आकलन कर बताएंगे कि गांव में जल आपूर्ति की व्यवस्था कैसी
जल जीवन मिशन के तहत अब ग्रामीण सामुदायिक स्तर पर बैठकर चर्चा करेंगे कि गांव में जल व्यवस्था किस तरह संचालित की जा रही है। पानी पर्याप्त मात्रा में मिल रहा है या नहीं। पानी नियमित मिल रहा है या नहीं। जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता ठीक है या नहीं। यह आकलन ग्राम सभा में ग्रामीणों के सामने रखा जाएगा। जल शक्ति मंत्रालय ने सभी राज्यों से 26 जनवरी तक जल आकलन की रिपोर्ट ऑनलाइन करने को कहा है। इसके लिए मंत्रालय ने जल सेवा आकलन के लिए पोर्टल पर एक टूल ई–लॉन्च जारी किया है। इससे गांव के लोग मिलकर अपने पानी की व्यवस्था को बेहतर बनाने में भागीदारी कर सकेंगे। इसका मकसद गांवों में पेयजल आपूर्ति की नियमितता, उपलब्धता, गुणवत्ता और स्थिरता पुख्ता करना है। जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में 9458 गांव ऐसे हैं, जहां कनेक्शन देने में शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब वहां रोजाना शुद्ध और पर्याप्त मात्रा में पानी सप्लाई करने पर जोर दिया जा रहा है। इसकी देखरेख करने के लिए जल सेवा आकलन शुरू किया गया है। इनमें से 5243 गांवों को सर्टिफाइड किया गया है। इस दायरे में प्रदेश की एक हजार से ज्यादा पंचायतें शामिल हैं। यहां के लोगों को किसी अन्य एजेंसी पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जल सेवा वितरण सिस्टम को खुद ही परखने में सक्षम बनाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों का प्रबंधन ग्रामीणों के द्वारा ही किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने इस पहल से जल सेवा आकलन ग्राम पंचायतों को अपनी जल आपूर्ति प्रणालियों का संरक्षक बनने का अधिकार दिया है। वे ग्राम सभाओं के माध्यम से निर्णय ले पाएंगे। यह भी पता लगेगा कि पाइपलाइन द्वारा जल आपूर्ति प्रणाली प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है या नहीं। इस आकलन में ग्रामीण, पंचायत पदाधिकारी, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों की भागीदारी रहेगी। ग्रामीणों द्वारा किए गए मूल्यांकन के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे। ऐसे में गड़बड़ियां भी उजागर होंगी। इससे बचने के लिए जिला स्तर पर प्रशिक्षण होगा। चर्चा में महिलाओं को भी शामिल करना होगा ग्राम सभा में चर्चा के दौरान महिलाओं और पिछड़े तबके के लोगों को भी शामिल करना होगा। ग्राम सभा के प्रस्ताव द्वारा अनुमोदन प्राप्त होने पर मूल्यांकन को जल जीवन मिशन पंचायत डैशबोर्ड पर अपलोड किया जाएगा। ग्रामीणों का फीडबैक लेने के लिए एक माह का समय रहेगा। ग्रामीणों की ओर से किए गए आकलन की एक रिपोर्ट कलेक्टर व जिला परिषदों के सीईओ को भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि उन समस्याओं के निस्तारण की योजनाएं बनाई जा सके।