नौ फणी पार्श्वनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक
भास्कर संवाददाता | टोंक श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पुरानी टोंक में श्याम वर्ण भगवान पार्श्वनाथ का 108 कलशों से रिद्धि मंत्रों के उच्चारण के साथ महामस्तकाभिषेक किया। गंधोदक को श्रद्धालुओं ने मस्तक पर लगाकर भगवान पार्श्वनाथ से आशीर्वाद प्राप्त किया प्रवक्ता राजेश अरिहंत ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर ससंघ के सान्निध्य में 7 से 12 नवंबर तक आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव में प्रतिष्ठित भगवान पार्श्वनाथ की श्याम वर्ण की प्रतिमा को सोने की नक्काशी से जड़ित वेदी में विराजमान किया गया है। यह प्रतिमा सवा नौ फीट ऊंची पद्मासन रूप में विराजमान है। पदम कासलीवाल ने बताया कि महामस्तका अभिषेक के बाद रिद्धि मंत्रों के उच्चारण के बीच शांतिधारा परिवारों के नाम उच्चारण के साथ भगवान पार्श्वनाथ की शांतिधारा की गई। शांतिधारा के पुण्यार्जक प्रेमचंद, योगेश कुमार कासलीवाल, पारस कुमार, पुनीत कुमार सोनी परिवार रहे। ताराचंद, , अजय सोगानी, मनोज बाकलीवाल, दीपक सोनी, मोनू पाटनी, जितेंद्र कासलीवाल, सोनाक्ष सोगानी, कन्नू सोनी, रिंकू सोनी, निर्मल सोगानी, मोलिक बाकलीवाल, उत्तम सोनी आदि ने की। भक्तामर महामंडल विधान की पूजा का आयोजन किया गया, जिसमें सर्वप्रथम मंडल रचना मंगल कलश स्थापना सकली करण आचार्य निमंत्रण शुद्धि के पश्चात विधान की पूजा की शुरुआत की गई। इंद्र इंद्राणी बने मनोज, गुड्डू, रेखा, निर्मल, योगेश, स्नेहलता कासलीवाल आदि ने अर्घ्य एवं श्रीफल समर्पित किए।
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श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पुरानी टोंक में श्याम वर्ण भगवान पार्श्वनाथ का 108 कलशों से रिद्धि मंत्रों के उच्चारण के साथ महामस्तकाभिषेक किया। गंधोदक को श्रद्धालुओं ने मस्तक पर लगाकर भगवान पार्श्वनाथ से आशीर्वाद प्राप्त किया
प्रवक्ता राजेश अरिहंत ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर ससंघ के सान्निध्य में 7 से 12 नवंबर तक आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव में प्रतिष्ठित भगवान पार्श्वनाथ की श्याम वर्ण की प्रतिमा को सोने की नक्काशी से जड़ित वेदी में विराजमान किया गया है। यह प्रतिमा सवा नौ फीट ऊंची पद्मासन रूप में विराजमान है। पदम कासलीवाल ने बताया कि महामस्तका अभिषेक के बाद रिद्धि मंत्रों के उच्चारण के बीच शांतिधारा परिवारों के नाम उच्चारण के साथ भगवान पार्श्वनाथ की शांतिधारा की गई। शांतिधारा के पुण्यार्जक प्रेमचंद, योगेश कुमार कासलीवाल, पारस कुमार, पुनीत कुमार सोनी परिवार रहे। ताराचंद, , अजय सोगानी, मनोज बाकलीवाल, दीपक सोनी, मोनू पाटनी, जितेंद्र कासलीवाल, सोनाक्ष सोगानी, कन्नू सोनी, रिंकू सोनी, निर्मल सोगानी, मोलिक बाकलीवाल, उत्तम सोनी आदि ने की। भक्तामर महामंडल विधान की पूजा का आयोजन किया गया, जिसमें सर्वप्रथम मंडल रचना मंगल कलश स्थापना सकली करण आचार्य निमंत्रण शुद्धि के पश्चात विधान की पूजा की शुरुआत की गई। इंद्र इंद्राणी बने मनोज, गुड्डू, रेखा, निर्मल, योगेश, स्नेहलता कासलीवाल आदि ने अर्घ्य एवं श्रीफल समर्पित किए।