बिना शक्ति के कुछ भी हासिल नहीं होता और वह शक्ति संगठन में हैं: शंभूसिंह
भास्कर न्यूज | जैसलमेर देगराय शक्तिपीठ में विगत सात दिनों से चल रहे श्री क्षत्रिय युवक संघ के माध्यमिक प्रशिक्षण शिविर का समापन बुधवार को हुआ। शिविर में जैसलमेर व पोकरण के विभिन्न गांवों से आए हुए शिविरार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। विदाई कार्यक्रम के दौरान नागौर संभाग प्रमुख शिविर संचालक शंभूसिंह आसरवा ने कहा कि आपने यहां पर जो सीखा उसे अपने जीवन में अभ्यास के द्वारा लाएं। क्षात्र धर्म कभी संकुचित नहीं होता, अपने आप में व्यापक शब्द है। यह किसी पंथ, मजहब व जाति सीमाओं से भी परे हैं, इसका ऊंचा स्थान है। उन्होंने कहा कि आपके पूर्वजों ने क्षात्र धर्म का पालन किया हैं और प्रजा के लिए अपने सुखों का त्याग किया है। उन्होंने कहा कि क्षत्रियों ने सदैव प्रजा वत्सल अपना जीवन जीया। इसके लिए उन्होंने सदैव त्याग किया है। जहां भी क्षात्र धर्म की पुकार सुनी, स्वयं को आगे प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि श्री क्षत्रिय युवक संघ का कार्य कोई पांच या दस वर्षीय योजना नहीं है, शताब्दियों तक का है। जिस तरह से आज हम चारों ओर देखे, अराजकता का माहौल है, लोग अपने निजी स्वार्थपूर्ति में लगे हुए हैं। वर्तमान समय की दिशा में हमें भी आगे कदम बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि बिना शक्ति के कुछ भी हासिल नहीं होता और वह शक्ति संगठन में हैं। विदाई कार्यक्रम में वरिष्ठ स्वयंसेवक संभाग प्रमुख गणपतसिंह अवाय, वरिष्ठ स्वयंसेवक गंगासिंह तेजमालता, गिरधारीसिंह धोलिया, भवानीसिंह मुंगेरिया, सांवलसिंह मोढ़ा, तारेंद्रसिंह झिनझिनयाली, नरपतसिंह राजगढ़, उम्मेदसिंह बडोड़ा गांव व अमरसिंह रामदेवरा उपस्थित रहे।
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देगराय शक्तिपीठ में विगत सात दिनों से चल रहे श्री क्षत्रिय युवक संघ के माध्यमिक प्रशिक्षण शिविर का समापन बुधवार को हुआ। शिविर में जैसलमेर व पोकरण के विभिन्न गांवों से आए हुए शिविरार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। विदाई कार्यक्रम के दौरान नागौर संभाग प्रमुख शिविर संचालक शंभूसिंह आसरवा ने कहा कि आपने यहां पर जो सीखा उसे अपने जीवन में अभ्यास के द्वारा लाएं। क्षात्र धर्म कभी संकुचित नहीं होता, अपने आप में व्यापक शब्द है। यह किसी पंथ, मजहब व जाति सीमाओं से भी परे हैं, इसका ऊंचा स्थान है।
उन्होंने कहा कि आपके पूर्वजों ने क्षात्र धर्म का पालन किया हैं और प्रजा के लिए अपने सुखों का त्याग किया है। उन्होंने कहा कि क्षत्रियों ने सदैव प्रजा वत्सल अपना जीवन जीया। इसके लिए उन्होंने सदैव त्याग किया है। जहां भी क्षात्र धर्म की पुकार सुनी, स्वयं को आगे प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि श्री क्षत्रिय युवक संघ का कार्य कोई पांच या दस वर्षीय योजना नहीं है, शताब्दियों तक का है।