किसानों व युवाओं को आय बढ़ाने-स्वरोजगार के तरीके बताए
भास्कर न्यूज | बूंदी प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर विकसित करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र पर तीन दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। यह प्रशिक्षण निदेशालय जलग्रहण विकास व भू-संरक्षण विभाग जयपुर के सहयोग से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के वाटरशेड विकास घटक के अंतर्गत किया गया। केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. महेश चौधरी ने बताया कि प्रशिक्षण का विषय एकीकृत नर्सरी, चारा, वृक्ष प्रबंधन, विपणन व मूल्य संवर्धन रखा गया। इसमें जिले की विभिन्न पंचायत समितियों से आए किसानों, ग्रामीण युवाओं, कृषि उद्यमियों व प्रसार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य खेती को पारंपरिक ढर्रे से निकालकर वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी मॉडल की ओर ले जाना रहा। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। मृदा वैज्ञानिक डॉ. सेवाराम रूंडला ने मृदा नमूना लेने की सही विधि, प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग, मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिका, उनकी कमी के लक्षण, मृदा व पर्णीय अनुप्रयोग की जानकारी दी। साथ ही जैव उर्वरकों के महत्व पर भी चर्चा की। उन्नत चारा उत्पादन पर डॉ. दीपक कुमार ने एकवर्षीय व बहुवर्षीय चारा फसलों की उन्नत किस्में, फसल चक्र, संतुलित पोषण, कटाई की सही अवस्था, साइलेज निर्माण व सालभर हरे चारे की उपलब्धता करने की तकनीक समझाईं। वहीं, हिंडौली कृषि कॉलेज के सहायक आचार्य (पादप व्याधि) डॉ. हनुमानसिंह राठौर ने नर्सरी, वानिकी व अन्य फसलों में लगने वाली बीमारियों की पहचान और नियंत्रण के उपाय बताए। उन्होंने प्राकृतिक खेती, जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत व दशपर्णी अर्क से कीट-रोग प्रबंधन पर भी चर्चा की। प्रशिक्षण में बैंक अधिकारी द्वारकाप्रसाद काबरा ने वित्तीय साक्षरता, ऋण योजनाओं व बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी दी। इसके साथ ही विपणन व मूल्य संवर्धन पर विशेष सत्र किया, जिसमें पैकेजिंग, ग्रेडिंग, ब्रांडिंग, बाजार से जुड़ाव, सरकारी अनुदान, स्वयं सहायता समूहों व एफपीओ के माध्यम से विपणन के अवसर बताए गए। प्रशिक्षण के समापन पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता कराई गई, जिसमें पीर मोहम्मद, हनुमान मीणा व यादराम मीणा को बेहतर प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विकास ताखर, लोकेश प्रजापत, विजेंद्र वर्मा, दीपक रैगर व रामप्रसाद का विशेष योगदान रहा। नर्सरी प्रबंधन पर प्रशिक्षण हिंडौली कृषि कॉलेज की सहायक आचार्य (उद्यानिकी) डॉ. अनोप कुमारी ने नर्सरी प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने नर्सरी स्थापना के लिए उपयुक्त स्थल चयन, जल व मृदा की गुणवत्ता, नर्सरी लेआउट, शेडनेट व पॉलीहाउस, गुणवत्तायुक्त बीजारोपण सामग्री, बीज उपचार, उन्नत पौध प्रवर्धन तकनीक, हार्डनिंग, टैगिंग व रिकॉर्ड संधारण की जानकारी दी। कोटा कृषि कॉलेज के सहायक आचार्य (वानिकी) डॉ. भुवनेश नागर ने कृषि वानिकी की अवधारणा को समझाते हुए फलदार व बहुउपयोगी पौध प्रजातियों के चयन, रोपण विधि, पौध संरक्षण, कटाई-छंटाई व मृदा व जल संरक्षण में पेड़ों की भूमिका पर प्रकाश डाला।