पाकिस्तान क्या बांग्लादेश को लड़ाकू जेट बेचने की तैयारी में है?
बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल हसन महमूद ख़ान पाकिस्तान के दौरे पर गए थे. पाकिस्तान ने कहा है कि बांग्लादेश ने जेएफ़-17 थंडर ख़रीदने में दिलचस्पी दिखाई है.
पाकिस्तान क्या बांग्लादेश को लड़ाकू जेट बेचने की तैयारी में है?

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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल हसन महमूद ख़ान ने अपने हालिया पाकिस्तान दौरे के दौरान पाकिस्तान से जेएफ़-17 ब्लॉक-3 लड़ाकू विमान 'ख़रीदने में दिलचस्पी' दिखाई है
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- Author, मुनज़्ज़ा अनवार
- पदनाम, बीबीसी उर्दू
- 8 जनवरी 2026
बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल हसन महमूद ख़ान ने अपने हालिया पाकिस्तान दौरे के दौरान पाकिस्तान से जेएफ़-17 ब्लॉक-3 लड़ाकू विमान 'ख़रीदने में दिलचस्पी' दिखाई है.
जेएफ़-17 थंडर ब्लॉक-3 एक एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैंड एरे (एईएसए) रडार और लॉन्ग रेंज बीवीआर (बियॉन्ड विज़ुअल रेंज) से लैस 4.5 जनरेशन का मल्टी-रोल फ़ाइटर प्लेन है, जो कई तरह के युद्ध अभियानों में हिस्सा लेने की क्षमता रखता है.
पाकिस्तान ने चीन की मदद से इन विमानों को बनाने की क्षमता हासिल की है और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह लड़ाकू विमान एक हल्का, फ़ोर्थ जनरेशन मल्टी-रोल एयरक्राफ़्ट है, जिनका इस्तेमाल भारत के साथ 2019 और मई 2025 के तनाव के दिनों में किया गया था.
पाकिस्तान अब तक अज़रबैजान, म्यांमार और नाइजीरिया को यह जेट बेच चुका है और माना जाता है कि इराक़ और लीबिया समेत कई देशों के साथ इस विमान की बिक्री के समझौते तय हो चुके हैं.
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पाकिस्तानी वायुसेना के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि हालांकि बांग्लादेश के साथ अभी तक इस विमान की बिक्री के लिए कोई समझौता नहीं हुआ है, लेकिन "उन्होंने इसे ख़रीदने में दिलचस्पी दिखाई है और इस बारे में हमारी लंबी बातचीत हुई है."
पाकिस्तानी वायुसेना के अनुसार, मंगलवार को हुई मुलाक़ात में, "पाकिस्तान के एयर चीफ़ मार्शल ज़हीर अहमद बाबर सिद्धू ने प्रशिक्षण विमानों की तेज़ डिलीवरी के साथ-साथ पूरा ट्रेनिंग सिस्टम और दीर्घकालिक तकनीकी मदद देने का आश्वासन भी दिया."
क्या हुआ वायुसेना प्रमुखों की मुलाक़ात में?

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इमेज कैप्शन, माना जा रहा है कि इराक़ और लीबिया सहित कई देशों के साथ इस विमान की बिक्री के सौदे भी तय हो चुके हैं
बांग्लादेश वायुसेना प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल हसन महमूद ख़ान के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल ने इस्लामाबाद में एयर हेडक्वार्टर का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल ज़हीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाक़ात की.
वायुसेना की तरफ़ से जारी बयान के अनुसार, "मुलाक़ात में ऑपरेशनल सहयोग और संस्थागत तालमेल को मज़बूत करने पर बल दिया गया. ख़ास तौर पर ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट और एयरोस्पेस के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा हुई."
"बांग्लादेश एयरफ़ोर्स के प्रमुख ने पाकिस्तानी वायुसेना के शानदार वॉर रिकॉर्ड की तारीफ़ करते हुए इसके ऑपरेशनल महारत से फ़ायदा उठाने में दिलचस्पी दिखाई है."
बयान के मुताबिक़, "मुलाक़ात में पाकिस्तान के एयर चीफ़ मार्शल ज़हीर अहमद बाबर सिद्धू ने इस संकल्प को दोहराया कि पाकिस्तान, बांग्लादेश वायुसेना को बुनियाद से लेकर आधुनिक उड़ान और विशेष कोर्सेज़ तक, पाकिस्तानी एयरफ़ोर्स के ट्रेनिंग सेंटर्स से व्यापक प्रशिक्षण सहयोग करना जारी रखेगा."
बांग्लादेश वायुसेना प्रमुख ने "बांग्लादेश एयरफ़ोर्स के पुराने बेड़े के रखरखाव के साथ मरम्मत और हवाई निगरानी को बेहतर करने के लिए एयर डिफ़ेंस रडार सिस्टम्स को जोड़ने में मदद लेने की भी बात कही है."
बयान के अनुसार, "प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी वायुसेना के महत्वपूर्ण संयंत्रों का भी दौरा किया, जिनमें नेशनल आईएसआर ऐंड इंटीग्रेटेड एयर ऑपरेशंस सेंटर, पाकिस्तानी एयरफ़ोर्स साइबर कमांड और नेशनल एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी पार्क शामिल थे. इस दौरान उन्हें आईएसआर, साइबर, स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफ़ेयर और पायलटलेस सिस्टम्स में पाकिस्तानी वायुसेना की क्षमताओं से रूबरू कराया गया."
इस दौरे को पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच मज़बूत ऐतिहासिक संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें रक्षा सहयोग को और बढ़ाने के साथ-साथ दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी बनाने का साझा संकल्प लिया गया.
रक्षा बाज़ार में बदलते रुझान

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान अब तक अज़रबैजान, म्यांमार और नाइजीरिया को ये विमान बेच चुका है
पाकिस्तान अब तक अज़रबैजान, म्यांमार और नाइजीरिया को ये विमान बेच चुका है.
पिछले साल पाकिस्तान ने अज़रबैजान को 40 जेएफ़-17C ब्लॉक-3 विमान बेचने का समझौता किया जो 4.6 अरब डॉलर के ऐतिहासिक रक्षा समझौते का हिस्सा था.
पाकिस्तानी वायुसेना के प्रवक्ता ने अब तक बेचे गए विमानों की सटीक संख्या बताने से परहेज़ किया है. लेकिन माना जाता है कि इराक़ और लीबिया सहित कई देशों के साथ इस विमान की बिक्री के सौदे भी तय हो चुके हैं. इसके अलावा ऐसी ख़बरें भी हैं कि ईरान समेत कई देशों ने इन विमानों को ख़रीदने में दिलचस्पी दिखाई है.
कुछ विश्लेषक इस बात पर हैरान हैं कि कई देश पारंपरिक पश्चिमी सप्लायर्स के बजाय पाकिस्तान जैसे विकासशील देश से युद्धक विमान ख़रीदना क्यों पसंद कर रहे हैं.
जेएफ़-17 जैसे प्लेटफ़ॉर्म का इन वायुसेनाओं के लिए बढ़ते कथित आकर्षण की वजह क्या है? ख़ास तौर पर ऐसे कौन से फ़ायदे हैं जो पाकिस्तान से मिलते हैं और पश्चिमी डिफ़ेंस सप्लायर्स के पास नहीं हैं? पाकिस्तान से विमान ख़रीदने की इच्छा वैश्विक रक्षा बाज़ार में बदलते रुझानों के बारे में क्या बताती है?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान की साझेदारी से तैयार जेएफ़-17 थंडर क़ीमत, राजनीतिक लचीलेपन और कुछ आसानी से मिलने के कारण पश्चिमी लड़ाकू विमानों की तुलना में ख़रीदार देशों के लिए आकर्षक है.
आधुनिक अपग्रेड और स्थानीय स्तर पर रखरखाव की सुविधा इसे सीमित बजट वाली वायुसेनाओं के लिए व्यावहारिक और प्रभावी बनाती है.
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तानी जेएफ़-17 पश्चिमी देशों द्वारा निर्मित लड़ाकू विमानों की तुलना में क़ीमत के हिसाब से आकर्षक है
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ (आईआईएसएस) से जुड़े मिलिट्री एयरोस्पेस विशेषज्ञ डगलस बेरी का कहना है कि चीन और पाकिस्तान की साझेदारी से बने पाकिस्तानी जेएफ़-17 पश्चिमी देशों द्वारा निर्मित लड़ाकू विमानों की तुलना में क़ीमत के हिसाब से आकर्षक है.
बीबीसी से बात करते हुए डगलस बेरी कहते हैं कि इस विमान के नवीनतम अपग्रेड में प्रभावी रडार और हवाई हथियार शामिल किए गए हैं. "जेएफ़-17 और चेंगदू जे-10 (जो पाकिस्तान में भी ऑपरेशनल हैं) से पहले चीनी युद्धक विमानों के डिज़ाइन अपने जैसे पश्चिमी या रूसी जहाज़ों से कमज़ोर समझे जाते थे. हालांकि अब यह क्षमता का अंतर काफ़ी कम हो गया है."
एलेक्स प्लिट्सास, अटलांटिक काउंसिल के सीनियर फ़ेलो और पूर्व पेंटागन अधिकारी हैं. यह रक्षा, एयरोस्पेस और हाई-टेक क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी और डिजिटल बदलावों के विशेषज्ञ हैं.
उनका मानना है कि यह जहाज़ उन देशों के लिए आकर्षक है जो राजनीतिक कारणों से पश्चिमी सप्लाई चेन पर निर्भर नहीं रह सकते या रहना पसंद नहीं करते और ख़र्चों को लेकर सावधान हैं.
बीबीसी से बात करते हुए वह कहते हैं कि जेएफ़-17 थंडर के ख़रीदार देश पश्चिमी लड़ाकू विमानों के बजाय मुख्य रूप से क़ीमत, राजनीतिक लचीलेपन और उपलब्धता के कारण इसे पाकिस्तान से ख़रीदते हैं. "जेएफ़-17 की ख़रीद और इसका ऑपरेशन पश्चिमी मॉडलों जैसे एफ़-16 से काफ़ी सस्ता है, जिससे यह सीमित रक्षा बजट वाली वायुसेनाओं के लिए आकर्षक बन जाता है."

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इमेज कैप्शन, जेएफ़-17 टॉप-टियर लड़ाकू विमान नहीं है और कुल मिलाकर यह चौथी पीढ़ी का फ़ाइटर प्लेन है
एलेक्स प्लिट्सास का मानना है कि इसके अलावा इस पर राजनीतिक प्रतिबंध भी बहुत कम हैं, जैसे एक्सपोर्ट कंट्रोल, इस्तेमाल की निगरानी, या पुर्ज़ों की आपूर्ति में रुकावटें, जो अक्सर अमेरिकी या यूरोपीय बिक्री के साथ जुड़ी होती हैं.
वह कहते हैं कि ऐसे देश जिन पर प्रतिबंध हैं या जिनके पश्चिम के साथ संबंध तनावपूर्ण हैं, उनके लिए जेएफ़-17 एकमात्र आधुनिक और व्यावहारिक लड़ाकू विमान हो सकता है.
वह इस बात की तरफ़ भी इशारा करते हैं कि पाकिस्तान और चीन टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र, लोकल असेंबलिंग और घरेलू रखरखाव की सुविधा देने को तैयार हैं जो स्थानीय विमानन क्षमताओं को विकसित करने के लिए ज़रूरी है.
एलेक्स का मानना है कि हालांकि जेएफ़-17 टॉप-टियर लड़ाकू विमान नहीं है और कुल मिलाकर यह चौथी पीढ़ी का फ़ाइटर प्लेन है जो कुछ क्षेत्रों में पश्चिमी फ़ाइटर जेट्स से पीछे है. "इनमें स्पीड, रडार रेंज और एवियोनिक्स शामिल हैं लेकिन यह हवाई निगरानी, बॉर्डर सिक्योरिटी और हल्के हमलों वाले मिशनों के लिए बहुत कारगर मल्टी-रोल क्षमता देता है, जिससे इसके ख़रीदार देश अपनी क्षमता, आत्मनिर्भता और किफ़ायती ख़र्च के बीच संतुलन बना सकते हैं."
वह भारत के साथ 2019 और पिछले साल मई में हुए तनाव का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में "जेएफ़-17 ने अपने जैसे दूसरे जहाज़ों की तुलना में युद्ध के दौरान अच्छा प्रदर्शन किया है, जो नए फ़ाइटर प्लेन ख़रीदने वाले देशों के लिए एक अहम बात हो सकती है."
पाकिस्तान ने जेएफ़-17 पर काम कब शुरू किया?

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इमेज कैप्शन, जेएफ़-17 विमानों की ख़ास बात यह है कि यह पाकिस्तान के अंदर कामरा नाम की जगह पर तैयार किए जा रहे हैं
यह कहानी साल 1995 से शुरू होती है, जब पाकिस्तान और चीन ने जेएफ़-17 से जुड़े एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे.
इस जहाज़ का पहला टेस्ट मॉडल साल 2003 में तैयार हुआ और पाकिस्तानी वायुसेना ने साल 2010 में पहली बार जेएफ़-17 थंडर को अपने बेड़े में शामिल किया. इस प्रोजेक्ट में मिग विमान बनाने वाली रूसी कंपनी मिकोयान भी शामिल हो गई थी.
पाकिस्तानी वायुसेना ने जेएफ़-17 थंडर को पुराने हो चुके मिराज, एफ़-7 और ए-5 विमानों को बदलने के कार्यक्रम के तहत डिज़ाइन किया था.
जेएफ़-17 विमानों की ख़ास बात यह है कि यह पाकिस्तान के अंदर कामरा नाम की जगह पर तैयार किए जा रहे हैं.
सन 2020 में जेएफ़-17 ब्लॉक-3 के प्रोडक्शन की शुरुआत के मौक़े पर पाकिस्तानी वायुसेना के प्रवक्ता एयर कमोडोर अहमर रज़ा ने बीबीसी को बताया था कि जेएफ़-17 ब्लॉक-3 चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं.
उस वक़्त पाकिस्तानी एयरफ़ोर्स ने बताया था कि ब्लॉक-3 के जेएफ़-17 विमान सबसे एडवांस्ड मॉडल होंगे और इसकी मदद से पाकिस्तानी वायुसेना को क्षेत्र में बदलती स्थिति में सैन्य संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी.
तब वायुसेना प्रवक्ता का कहना था कि ब्लॉक-3 जेएफ़-17 का अगला वर्ज़न है. इसमें नए रडार लगाए जाएंगे, इस वर्ज़न का जहाज़ नए और आधुनिक हथियारों व मिसाइलों से भी लैस होगा. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफ़ेयर की क्षमता को भी बढ़ाया जाएगा और हर पहलू से इसमें सुधार लाया जाएगा.
जेएफ़-17 थंडर किन क्षमताओं से लैस है?

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इमेज कैप्शन, जेएफ़-17 थंडर दुश्मन की निगरानी और हवाई युद्ध के साथ-साथ ज़मीनी हमले की क्षमता भी रखता है
जेएफ़-17 थंडर लड़ाकू विमान पाकिस्तान के लिए इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि पाकिस्तान इसे ख़ुद तैयार करता है.
पाकिस्तान ने चीन की मदद से ही इन विमानों को बनाने की क्षमता हासिल की और विशेषज्ञों के अनुसार यह विमान एक कम वज़न वाला, फ़ोर्थ जनरेशन मल्टी-रोल एयरक्राफ़्ट है.
इस विमान के निर्माण, अपग्रेडेशन और 'ओवरहॉलिंग' की सुविधाएं भी पाकिस्तान के अंदर मौजूद हैं, जिसका मतलब है कि पाकिस्तान इस विमान के निर्माण के किसी भी स्टेज के लिए दूसरे देश पर निर्भर नहीं है.
रक्षा मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, "जेएफ़-17 थंडर विमान एफ़-16 फ़ॉल्कन की तरह हल्के वज़न के साथ-साथ सभी तरह के मौसम में ज़मीनी और हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने वाला बहुमुखी विमान है, जो दूर से ही लक्ष्य भेदने वाली मिसाइलों से लैस है."
जेएफ़-17 थंडर ने इसी क्षमता की बदौलत बीवीआर मिसाइल से बालाकोट घटना के बाद भारतीय वायुसेना के मिग को मार गिराया, जिससे जेएफ़-17 थंडर की काफ़ी चर्चा हुई थी.
जेएफ़-17 थंडर विमानों में वह आधुनिक रडार लगा है जिसे रफ़ाल की भी बड़ी ख़ूबी माना जाता है. यह जहाज़ टारगेट को लॉक करके मिसाइल दागने की क्षमता रखता है.
इसकी रेंज 150 किलोमीटर तक बताई जाती है और यह मिसाइल अपने लक्ष्य का पीछा बिल्कुल वैसे ही करती है जैसे हॉलीवुड फ़िल्मों में दिखाया जाता है.
जेएफ़-17 थंडर दुश्मन की निगरानी और हवाई युद्ध के साथ-साथ ज़मीनी हमले की क्षमता भी रखता है.
यह विमान हवा-से-ज़मीन, हवा-से-हवा और हवा-से-समुद्र में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम्स के अलावा दूसरे हथियारों का इस्तेमाल करने में सक्षम है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.